अमरनाथ यात्रियों को पहली बार मिलेगी बारकोड स्लिप, हाइटेक होगी सुरक्षा व्यवस्था

एक जुलाई से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा. तीर्थयात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए पहली बार हो रही हाईटेक तैयारी. मार्ग की ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से होगी निगरानी.

News18Hindi
Updated: June 25, 2019, 11:37 AM IST
अमरनाथ यात्रियों को पहली बार मिलेगी बारकोड स्लिप, हाइटेक होगी सुरक्षा व्यवस्था
अमरनाथ यात्रा 46 दिन तक चलेगी. 15 अगस्त को इसका आखिरी दिन होगा.
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Updated: June 25, 2019, 11:37 AM IST
जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ की पवित्र यात्रा 1 जुलाई से शुरू हो रही है. पुलवामा हमले के बाद हो रही इस यात्रा के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और भारतीय सेना ने बड़े हाइटेक इंतजाम किए हैं. पहली बार अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को बारकोड स्लिप मिलेगी. श्रद्धालुओं का जत्था जिन-जिन रास्तों से होकर गुजरेगा, वहां सीसीटीवी और ड्रोन से 24 घंटे निगरानी की जाएगी. इसके अलावा वाहनों में रेडियो टैग लगेंगे, जिससे कंट्रोल रूम को काफिलों व यात्रियों की रियल टाइम फुटेज और लोकेशन की जानकारी मिलती रहेगी. बता दें कि अमरनाथ यात्रा 46 दिन तक चलेगी. 15 अगस्त को इसका आखिरी दिन होगा.

ऐसे होगी यात्रियों की पहचान


यात्रियों की पहचान और लोकेशन जानने के लिए पहली बार उनकी यात्रा स्लिप में बारकोड होगा. इस स्लिप में यात्रियों की पूरी जानकारी होगी. मसलन वो कहां से आए हैं, उनका मोबाइल नंबर क्या है, वगैरह-वगैरह. बारकोड स्लिप से कंट्रोल रूम और सुरक्षा बलों को ये जानकारी हो सकेगी कि कितने यात्रा श्राइन पहुंचे हैं. इसके अलावा स्लिप की तीन कॉपीज़ होंगी, जिन्हें अलग-अलग पड़ाव पर पहचान के लिए दिखाया जाएगा.

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गाड़ियों में लगेंगे रेडियो टैग
पिछली बार हुए अमरनाथ यात्रा की तरह इस बार भी गाड़ियों में रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग (रेडियो टैग) लगाए जाएंगे, ताकि गाड़ियों को ट्रैक किया जा सके. श्रद्धालुओं की ये गाड़ियां जम्मू के बेस कैंप तक पैरामिलिट्री फोर्स के काफिले के साथ ही जाएंगे. इस साल हाई रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस ड्रोन से भी इस यात्रा की निगरानी होगी.

भीड़ कम रखने के लिए रोज गुफा में जा सकेंगे 7500 यात्री
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गुफा में भीड़ को कम रखने के लिए रोजाना सिर्फ 7500 यात्री ही पवित्र गुफा के लिए रवाना किए जाएंगे. उनकी सुरक्षा के लिए इस साल 30 हजार से ज्यादा एडिशनल फोर्स तैनात किए जा रहे हैं. पूरी सुरक्षा व्यवस्था तीन लेयर में बनाई गई है. पहली लेयर में सीआरपीएफ, दूसरी में राज्य पुलिस और आखिरी लेयर सेना की होगी. यात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षाबलों की 300 कंपनियां (एक कंपनी में 80 से 100 जवान) रिजर्व रखे गए हैं.

बन गई अस्थायी चौकियां
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नेशनल हाईवे पर स्थित सभी पहाड़ियों पर सेना के जवानों की अस्थायी चौकियां बना दी गई हैं. जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ, रियासी, गूल, डोडा और किश्तवाड़ में विशेष सुरक्षा प्रबंध रहेंगे. इन इलाकों में ग्राम सुरक्षा समितियों के सदस्यों को भी सक्रिय किया जाएगा. जवाहर सुरंग से अनंतनाग, काजीगुंड, खन्नाबल, बिजबेहाड़ा, पांपोर, श्रीनगर, गांदरबल, कंगन, सोनमर्ग तक हाईवे पर और उसके साथ सटी आवासीय बस्तियों और जंगलों को भी खंगाला जा रहा है.

बिजबेहाड़ा से पहलगाम और खन्नाबल-पहलगाम, कंगन-सोनमर्ग-बालटाल और बालटाल से आगे पवित्र गुफा के आसपास भी सेना के जवान मौजूद रहेंगे. यात्रा मार्ग पर सेना के बमरोधी दस्ते और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्यूआरटी दस्ते भी तैनात किए गए हैं.
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