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Exclusive: छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों ने बड़े नक्सल विरोधी अभियान को दिया अंजाम, अत्याधुनिक Drones को बनाया हथियार

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान को अंजाम दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान को अंजाम दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि नक्सलियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई के कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बलों ने आक्रामक तरीके से हमला किया और पूरे इलाके में बमबारी की. इस ऑपरेशन को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि करीब दो महीने की तैयारियों के बाद अंजाम दिया गया.

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अंकुश शर्मा/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में 15 अप्रैल की सुबह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने बड़े पैमाने पर एक नक्सल विरोधी अभियान को अंजाम दिया. शीर्ष सूत्रों ने News18 को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने अत्याधुनिक ड्रोन्स का इस्तेमाल किया. इन ड्रोन्स की मदद से एंटी नक्सल ऑपरेशन शुरू और समाप्त किया गया. सूत्रों ने कहा कि वास्तव में नक्सलियों के खिलाफ इन ड्रोन्स का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया गया. सुरक्षा बलों ने बस्तर जिले के दक्षिणी क्षेत्र के अंदरूनी हिस्से में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया.

राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड के सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने इस एंटी नक्सल ऑपरेशन की निगरानी की और इसके पूरा होने के बाद, सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी छत्तीसगढ़ गए. सूत्रों ने पुष्टि की है कि नक्सलियों की ओर से बड़े पैमाने पर हताहत हुए हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने बताया है कि मोस्ट वांटेड नक्सली नेता माडवी हिडमा अब भी जिंदा है. सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार तड़के करीब 1 बजे इस अभियान को अंजाम देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया.

छत्तीसगढ़ के 9 जिले नक्सलवाद से प्रभावित
भारत में नक्सल या माओवादी आंदोलन का उदय 1967 में हुआ, जब सशस्त्र किसानों ने पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में विद्रोह किया और बाद में भाकपा (माओवादी) के कार्यकर्ताओं ने आदिवासी और स्थानीय लोगों के लिए वैध सामाजिक-आर्थिक अधिकारों का दावा करते हुए आंदोलन का नेतृत्व किया. वर्तमान में छत्तीसगढ़ के बस्तर खंड के आसपास भारतीय सुरक्षाबल नक्सली गुरिल्लाओं के साथ खूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, जो सुकमा, बीजापुर, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और जगदलपुर जिलों तक फैला हुआ है.

कई सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर ऑपरेशन को दिया अंजाम
News18 ने CRPF DG कुलदीप सिंह से भी इस अभियान को लेकर प्रतिक्रिया मांगी है, जो व्यक्तिगत रूप से ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे. उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार है. अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि नक्सलियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई के कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बलों ने आक्रामक तरीके से हमला किया और पूरे इलाके में बमबारी की. इस ऑपरेशन को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि करीब दो महीने की तैयारियों के बाद अंजाम दिया गया. सूत्रों से पता चला है कि इस एंटी नक्सल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए कई सुरक्षा एजेंसियां ​​एक साथ काम कर रही थीं और केंद्रीय गृह मंत्रालय सीधे इसकी निगरानी कर रहा था.

जवाबी कार्रवाई की आशंका में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर
भारत में नक्सलवाद पर गृह मंत्रालय के सलाहकार के. विजय कुमार सहित शीर्ष अधिकारी इस एंटी नक्सल ऑपरेशन की योजना को अंतिम रूप देने में शामिल थे. पिछले 40-50 दिनों में विवरण एकत्र किया गया था, फिर स्थान की पुष्टि होने के बाद, सीआरपीएफ के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने अभियान शुरू किया. विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस ऑपरेशन में नक्सलवादियों को भारी नुकसान हुआ है और वे जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं.

Tags: Anti naxal operation, Naxal Movement in India, Security Forces

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