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कठुआ रेपः बच्ची क्यों नहीं लगा सकी मदद की गुहार? एक्सपर्ट्स ने दिया जवाब

कठुआ रेपः बच्ची क्यों नहीं लगा सकी मदद की गुहार? एक्सपर्ट्स ने दिया जवाब

News18 Creatives by Mir Suhail.

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क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट में सांजी राम और उसके किशोर भतीजे के अलावा उसके बेटे विशाल , विशेष पुलिस अधिकारियों दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा और दोस्त परवेश कुमार उर्फ मन्नू के नाम दर्ज हैं.

    फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कहा है कि कठुआ में इस साल जनवरी में आठ साल की एक लड़की से रेप से पहले उसे जबरन नींद की काफी गोलियां दी गयीं. जिसके चलते संभवत : वह कोमा में चली गयी. आरोपियों ने बच्ची को मन्नार कैंडी (इसे स्थानीय गांजा समझा जाता है) और एपिट्रिल 0.5 एमजी गोलियां खिलाई थी. इस मामले की जांच कर रही जम्मू कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नशीली दवाओं के प्रभाव की जांच करने के लिए बच्ची का विसरा फॉरेंसिक लैब में भेजा था.

    हाल ही में क्राइम ब्रांच को मिली रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा है कि आठ साल की लड़की को दी गयी गोलियों से संभवत: वह सदमे की स्थिति में या कोमा में चली गयी. क्राइम ब्रांच ने मेडिकल विशेषज्ञों से आठ साल की लड़की को उसके खाली पेट रहने के दौरान दी गयी इन दवाइयां के संभावित असर के बारे में पूछा था.

    क्राइम ब्रांच ने तब विस्तृत मेडिकल राय जाने का फैसला किया जब अदालत में आरोपियों और उनके वकीलों ने और सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने दावा किया कि यह करीब-करीब असंभव है कि लड़की पर हमला हो रहा हो और वह नहीं चिल्लायी हो. विसरा का परीक्षण करने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि लड़की को जो दवा दी गयी थी उसमें क्लोनाजेपाम साल्ट था और उसे मरीज के उम्र और वजन को ध्यान में रखकर चिकित्सकीय निगरानी में ही दिया जाता है.

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    चिकित्सकीय राय में कहा गया है, ‘‘उसके (पीड़िता के) 30 किलोग्राम वजन को ध्यान में रखते हुए मरीज को तीन खुराक में बांटकर प्रति दिन 0.1 से 0.2 एमजी दवा देने की सिफारिश की जाती है.’’ उसमें कहा गया है , ‘‘उसे 11 जनवरी को जबर्दस्ती 0.5 एमजी की क्लोनाजेपाम की पांच गोलियां दी गयीं जो सुरक्षित डोज से ज्यादा थी. बाद में भी उसे और गोलियां दी गयीं. ज्यादा डोज के संकेत और लक्षण नींद, भ्रम, समझ में कमी, प्रतिक्रियात्मक गतिविधि में गिरावट, सांस की गति में कमी या रुकावट, कोमा और मृत्यु हो सकते हैं.’’

    चिकित्सकीय राय के अनुसार क्लोनाजेपाम दवा लेने के करीब एक से डेढ़ घंटे में रक्त में घुल जाती है, चाहे उसे भोजन के साथ लिया जाए या उसके बगैर. यह रिपोर्ट अगले हफ्ते पठानकोट की जिला और सत्र अदालत को सौंपी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले की सुनवाई कठुआ से पठानकोट स्थानांतरित कर दी गई थी.

    डॉक्टरों ने कहा कि यदि क्लोनाजेपाम को अल्कोहल जैसी अन्य चीजों के साथ लिया जाए तो जोखिम ज्यादा हो जाता है. हालांकि डॉक्टर मन्नार कैंडीज का कोई प्रयोगशाला आधारित विश्लेषण नहीं दे पाए और उन्होंने कहा कि क्लोनाजेपाम के साथ ऐसी किसी अन्य दवा देने के प्रभाव के बारे में टिप्पणी करना मुश्किल है. मन्नार स्थानीय रूप से उपलब्ध भांग है जो व्यक्ति को कुछ घंटे तक बेसुध रखता है.


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    अल्पसंख्यक घुमंतू जनजाति से जुड़ी आठ साल की एक लड़की को दस जनवरी को मुख्य आरोपी सांझी राम के किशोर भतीजे ने कथित रूप से अगवा कर लिया था और 14 जनवरी को उसकी हत्या कर दी गयी. उसका शव 17 जनवरी को मिला. जांच के अनुसार सांझी राम को पता था कि उसे अगवा किया गया है लेकिन उसे उसके साथ बलात्कार होने की जानकारी नहीं थी.

    क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट में सांझी राम और उसके किशोर भतीजे के अलावा उसके बेटे विशाल , विशेष पुलिस अधिकारियों दीपक खजूरिया और सुरेंद्र वर्मा और दोस्त परवेश कुमार उर्फ मन्नू के नाम दर्ज हैं.


    उसमें कांस्टेबल तिलक राज और उपनिरीक्षक आंनद दत्ता के भी नाम हैं जिन पर सांझीराम से चार लाख रुपये रिश्वत लेने और सबूत मिटाने का आरोप है. पठानकोट की जिला और सत्र अदालत ने आठ जून को सात आरोपियों के विरुद्ध बलात्कार और हत्या के आरोप तय किये थे.

    आरोप है कि मुख्य आरोपी सांझी राम ने अल्पसंख्यक घुमंतू समुदाय को इलाके से हटाने की रणनीति के तहत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर लड़की के अपहरण की साजिश रची थी. आठवां आरोपी , जो किशोर है , की तकदीर का फैसला होना बाकी है क्योंकि क्राइम ब्रांच उसके बालिग होने का दावा करते हुए हाईकोर्ट पहुंच गयी है.

    Tags: Jammu and kashmir, Kathua Rape

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