रामजन्‍म भूमि मामले की तर्ज पर हो रविदास मंदिर की सुनवाई, कांग्रेस नेता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

दिल्‍ली (Delhi) में रविदास मंदिर (Ravidas Mandir) को लेकर पूर्व मंत्री प्रदीप जैन और हरियाणा कांग्रेस अध्‍यक्ष (Haryana Congress President) अशोक तंवर ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की है.

News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 8:02 PM IST
रामजन्‍म भूमि मामले की तर्ज पर हो रविदास मंदिर की सुनवाई, कांग्रेस नेता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
दिल्‍ली में रविदास मंदिर को लेकर पूर्व मंत्री प्रदीप जैन और हरियाणा कांग्रेस अध्‍यक्ष अशोक तंवर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
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Updated: August 27, 2019, 8:02 PM IST
अदालत के आदेश पर दिल्‍ली में संत रविदास का मंदिर गिराए जाने का मामला मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. यूपीए सरकार में मंत्री रहे बुंदेलखंड के वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता प्रदीप जैन आदित्‍य और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष अशोक तंवर ने मंदिर के पुर्ननिर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में संत रविदास मन्दिर और समाधियों के पुर्ननिर्माण और पवित्र सरोवर की बहाली की मांग की गई है. याचिका में कहा गया कि दोनों याचिकाकर्ता संत रविदास के भक्त, शिष्य और अनुयायी हैं, जिन्हें मन्दिर टूटने से गहरा मानसिक और आध्यात्मिक आघात हुआ है.

याचिकाकर्त्ताओं के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में राममन्दिर मामले पर संविधान बेंच द्वारा व्यापक सुनवाई हो रही है परन्तु रविदास मन्दिर मामले पर कानूनी पक्ष को सही तरीके से नहीं रखने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में डीडीए ने ऐतिहासिक मन्दिर को 10 अगस्त 2019 को ढहा दिया. इस याचिका में अंतरिम प्रार्थना करते हुए मन्दिर स्थल पर मूर्ति की पुर्नस्थापना और पूजा-अर्चना की इजाजत देने की मांग की गई है.

याचिका में उठाए गए कई महत्वपूर्ण बिंदु

याचिकाकर्ताओं के अनुसार गुरुनानक के पवित्र स्थल करतारपुर के दर्शनों के लिए कॉरीडोर बनाने के लिए पाकिस्तान जैसे देश ने सहमति दे दी. दूसरी ओर भारत की राजधानी में केन्द्र सरकार की एजेंसी डीडीए द्वारा करोड़ों लोगों के पूज्य और वंचित समाज के मसीहा संत रविदास के ऐतिहासिक स्थल को नेस्तनाबूद कर दिया गया. इस याचिका में निम्न महत्वपूर्ण तथ्य और कानूनी बिन्दु उठाये गये हैं.

Congress, Supreme court
यूपीए सरकार में मंत्री रहे बुंदेलखंड के वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता प्रदीप जैन आदित्‍य और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्ष अशोक तंवर ने मंदिर के पुर्ननिर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है.


सुप्रीम कोर्ट में राममन्दिर मामले की सुनवाई चल रही है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामलला की मूर्ति की कानूनी दर्जा दिया है. जन्म स्थान और मन्दिर को भी कानूनी दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट में सहमति है. उसी तर्ज पर संत रविदास की यह भूमि, मूर्ति और मन्दिर सभी का कानूनी दर्जा है, जिसके लिए याचिकाकर्त्ताओं ने नये तरीके से अपना पक्ष रखा है.
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जिस दौर में बाबर द्वारा अयोध्या में राममन्दिर तोड़ने की बात कही जा रही है, उसी काल में दिल्ली के सुल्तान सिकन्दर लोदी ने संत रविदास को यह जमीन दान में दी थी, जिसका राजस्व रिकॉर्ड में उल्लेख भी है. इसीलिए मन्दिर के पास वाली सड़क का नाम संत रविदास के नाम पर है.

600 वर्ष पुराने मन्दिर स्थल और सरोवर में देश के करोड़ों रविदासियों की श्रद्धा है. इस जगह पर एक नये आधुनिक मन्दिर का निर्माण हुआ, जिसका उद्घाटन तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बाबू जगजीवनराम ने सन् 1959 में किया था.

मंदिर के आस-पास का इलाका संरक्षित जंगल
डीडीए की स्थापना सन् 1957 में हुई. दिल्ली सरकार ने इस मन्दिर के चारों तरफ के जंगल को सन् 1980 में संरक्षित जंगल घोषित किया था. संरक्षित वनों के भीतर अनेक ऐतिहासिक इमारतें और मकबरे हैं. 600 वर्ष पुराने संत रविदास के ऐतिहासिक मन्दिर को भी संरक्षित वन क्षेत्र में कायम रखा जा सकता था और इसे गिराने से वंचित वर्ग में दुःख, निराशा और क्रोध है.

दिल्ली सरकार ने DDA को वन क्षेत्र उपलब्ध कराने की पेशकश की
भारतीय संसद ने सन् 1991 में कानून बनाकर यह कहा था कि विवाद की स्थिति में देश के सभी धर्मस्थलों में 15 अगस्त 1947 की यथास्थिति बरकरार रखी जायेगी. सभी पक्षों ने इस कानूनी बिन्दु को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में नहीं रखा, जिसकी वजह से संत रविदास मन्दिर को गिरा दिया गया. संत रविदास की पवित्र भूमि यह मन्दिर को अन्य क्षेत्र में स्थानान्तरित नहीं किया जा सकता. इसके एवज में दिल्ली सरकार ने डीडीए को वन क्षेत्र उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है.

मन्दिर को गिराने के बाद दिल्ली और देशभर में विरोध की लहर है. याचिकाकर्त्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हुए कहा है कि मन्दिर की जमीन को संत रविदास के अनुयायियों के दर्शन और पूजा-अर्चना हेतु डीडीए द्वारा तुरन्त प्रदान किया जाये.

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First published: August 27, 2019, 7:53 PM IST
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