1993 मुंबई ब्लास्ट: धमाकों के बाद हिंदू-मुस्लिम गुटों में बंटी डी कंपनी, बदल गई अंडरवर्ल्ड की तस्वीर

1993 मुंबई ब्लास्ट: धमाकों के बाद हिंदू-मुस्लिम गुटों में बंटी डी कंपनी, बदल गई अंडरवर्ल्ड की तस्वीर
दाऊद इब्राहिम(file photo)

1993 मुंबई बम धमाकों में दोषी अबु सलेम को उम्र कैद, ताहिर मर्चेंट-फिरोज को फांसी की सजा, रियाज सिद्दिकी को 10 साल की सजा मुंबई का टाडा कोर्ट में सुनाई गई. 12 मार्च साल 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में अबु सलेम और मुस्तफा डोसा मुख्य आरोपी हैं. इस केस का फैसला आने में 24 साल का वक्त जरूर लगा लेकिन अब अदालत के फैसले से उन दिलों की टीस जरूर कम होगी जिन्हें मुंबई के धमाकों ने कभी न भूलने वाले जख्म दिये.

  • Last Updated: September 7, 2017, 4:16 PM IST
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1993 मुंबई बम धमाकों में दोषी अबु सलेम को उम्र कैद, ताहिर मर्चेंट-फिरोज को फांसी की सजा, रियाज सिद्दिकी को 10 साल की सजा मुंबई का टाडा कोर्ट में सुनाई गई. 12 मार्च साल 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में अबु सलेम और मुस्तफा डोसा मुख्य आरोपी हैं. इस केस का फैसला आने में 24 साल  का वक्त जरूर लगा लेकिन अब अदालत के फैसले से उन दिलों की टीस जरूर कम होगी जिन्हें मुंबई के धमाकों ने कभी न भूलने वाले जख्म दिये.

पहली बार RDX का इस्तेमाल मुंबई धमाकों में
इस बम धमाके का मुख्य साजिशकर्ता अबू सलेम और मुस्तफा दौसा हैं. ये दोनों हमले की साजिश में शामिल थे और आरडीएक्स जैसे विस्फोटक मुंबई पहुंचाए थे. पहली बार धमाकों में आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया गया था और धमाके बाद दोनो आरोपी फरार हो गए थे. इस धमाके से पूरा मुंबई दहल गया था.





मुंबई की आबोहवा में ग्लैमर, बॉलीवुड, और अंडरवर्ल्ड की कहानियां रोमांच को बढ़ा जाती हैं. सपनों की ये माया नगरी कभी सोती नहीं है, इस शहर की रफ्तार कभी थमती नहीं है. लेकिन 24 साल पहले 12 मार्च 1993 को देश की इस कमर्शियल कैपिटल के हिस्से एक ‘ब्लैक फ्राइडे’ भी आया था. जब मुंबई की रफ्तार थम गई थी.



अंडरवर्ल्ड डॉन के हाथों आतंकी हमला
अंडरवर्ल्ड के साए में जीने वाला मुंबई पहली बार आतंकवादी हमलों को झेल रहा था. ये ऐसा आतंकी हमला था जिसने आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड की परिभाषा ही बदल दी. इसे पहले मुंबई ने अंडरवर्ल्ड डॉन वरदराजन मुदलियार, हाजी मस्तान, करीम लाला के वक्त सिर्फ गैंगवार देखा था, लेकिन पहली बार अंडरवर्ल्ड डॉन के हाथों मुंबई पर आतंकी हमला देख रहा था.

पाकिस्तान में रची गई थी साजिश
पाकिस्तान से न सिर्फ इस आतंकी हमले की साजिश रची गई बल्कि, हमले में शामिल लोगों को विस्फोटक तैयार करने की ट्रेनिंग भी पाकिस्तान में दिलाई गई. पहली बार तस्करी के जरिये समंदर के रास्ते आरडीएक्स मुंबई पहुंचाया गया.

पहली बार हुआ था सीरियल ब्लास्ट
ये पहली बार था जब किसी आतंकी हमले के लिए मुंबई में एक स्लीपर सेल एक्टिव हुई जिसने विस्फोटक बनाकर धमाकों को अंजाम दिया. सीरियल ब्लास्ट का हमला देश ने पहली बार झेला था.

मुंबईकरों को मार कराची भागा दाऊद
इस हमले में 257 लोगों की जान गईं और ये जान लेने वाल शख्स है दाऊद इब्राहिम कासकर. जो मुंबई की गलियों से निकलकर अब पाकिस्तान की पनाह में हैं और वहीं से भारत के खिलाफ आतंकी हमले और साजिशें करता रहता है.

189 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
इस हमले पर 4 नवंबर, 1993 को 10 हजार पन्नों की चार्जशीट दायर की गई थी, जिसके तहत 189 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. मुंबई बम धमाकों में आरोपी मुस्तफा दोसा और अबू सलेम सहित रियाज सिद्दीकी, करिमुल्ला खान, फिरोज अब्दुल राशिद, ताहिर मर्चेंट, अब्दुल कयूम के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दर्ज कर टाडा कोर्ट में मामला चलाया. इन धमाकों के बाद ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, अबू सलेम, मुस्तफा दौसा को फरार घोषित किया था.

अभिनेता संजय दत्त भी थे शामिल
इस आतंकी हमले का सबसे पहला और अहम फैसला 2006 मे आया था. तब 123 अभियुक्तों में से 100 को सजा सुनाई गई थी और 23 को बरी कर दिया गया था. अभिनेता संजय दत्त भी उन्ही अभियुक्तों में शामिल थे जिन्हे सजा सुनाई गई थी.



2006 में शुरू हुआ सजा का सिलसिला
इसी फैसले में याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई गई. याक़ूब धमाकों में वांटेड टाइगर मेमन का भाई था. याकूब मेमन को 30 जुलाई, 2015 को महाराष्ट्र के यरवडा जेल में फांसी दी गई. जबकि धमाके के मुख्य अभियुक्त दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, अनीस इब्राहिम समेत 20 लोग अभी भी फरार हैं.

इंटरपोल नोटिस जारी होने के बाद भी फरार दाउद
इंटरपोल नोटिस जारी होने के बाद भी दाउद इब्राहिम फरार है लेकिन दाऊद के अलावा इस हमले में जो भी नाम सामने आए वो कानून के शिकंजे से बच नहीं सके. पार्ट बी की सुनवाई में दाऊद का दायां हाथ माने जाने वाले जो बड़े अभियुक्त मुस्तफा दौसा और अबू सलेम समेत छह लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है.



पुर्तगाल सरकार ने रखी थी सलेम के फांसी न देने की शर्त
सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था. सलेम को पुर्तगाल सरकार ने इस शर्त पर भारत को सौंपा था कि उसे किसी भी मामले में मौत की सजा नहीं दी जाएगी. जबकि मुस्तफा दौसा को साल 2004 में यूएई से गिरफ्तार किया गया था.

दाऊद ने पूछा- कैसे लगे हमारे धमाके?
बकौल मुंबई के एक जर्नलिस्ट, बलजीत परमार का कहना है कि दाऊद ने उन्हें फोन कर पूछा था कि – भाईसाहब हमारे धमाके कैसे लगे? बलजीत परमार के लिये कहा जाता है कि उन्होंने ही 1993 में मुंबई ब्लास्ट के मामले में संजय दत्त की खबर ब्रेक थी.

दाऊद ने मुंबई पर हमला करने के लिये उस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जिसे वो अपनी तस्करी और अंडरवर्ल्ड के दूसरे कामों के लिये करता था. दाऊद ने अंडर्वर्ल्ड के कनेक्शन का इस्तेमाल आतंकी हमले के लिये किया. यहीं के लोग उसके साथ देश के खिलाफ हमले की साजिश में शामिल हो गए और वो लोग भी हिस्सा बने जिन्हें दाऊद का असल मकसद पता नहीं था.

धमाकों के बाद हिन्दू-मुस्लिम में बंटी डी-कंपनी
मुंबई धमाकों के बाद के बाद ही दाऊद की डी-कंपनी भी बंट गई. मुंबई धमाकों ने दाऊद और उसके करीबी शूटर रहे छोटा राजन के बीच दुश्मनी को हवा दी. छोटा राजन खुद को देशभक्त बताता है.



दोनों के बीच दुश्मनी का ऐसी हुई कि एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए. दाऊद ने कई दफे छोटा राजन पर हमला कराया लेकिन वो बच निकला. बैंकाक में छोटा शकील के गुर्गों ने छोटा राजन पर गोलियां तक बरसाई.

मुंबई धमाकों के बाद भड़के गैंगवार में दाऊद ने भी छोटा राजन के करीबी होटल मालिक रामनाथ पायडे, बिल्डर ओ पी कुकरेजा और फिल्म डायरेक्टर मुकेश दुग्गल का मर्डर करा दिया. इसके बाद राजन के गैंग ने दाऊद के शार्प शूटर सुनील सावंत को ठिकाने लगा दिया. उसके बाद दाऊद का मुंबई में धंधा संभालने वाले थाकीउद्दीन वाहिद का मर्डर करा दिया.

2008 में फिर हुआ मुंबई पर हमला
इस गैंगवार में दोनों ही लोगों ने अपने-अपने करीबियों को मरते देखा है. अब छोटा राजन देश की जेल में बंद है जबकि दाऊद अब भी फरार है. मुंबई में गैंगवार की घटनाओं में कमी तो आई, लेकिन कभी न रुकने वाली मुंबई में एकबार फिर 2008 में आतंकी हमला हुआ. लेकिन मुंबई की रफ्तार हर हादसे और हमले को भुला कर आगे बढ़ने में यकीन रखती है.
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