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सीरम ने कोरोना वैक्सीन ट्रायल में शामिल वालंटियर के आरोपों को नकारा, 100 करोड़ हर्जाने की धमकी दी

वालंटियर ने एसएसआई के अलावा टीके के प्रायोजक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और उस व्यक्ति को टीका लगाने वाले उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को नोटिस भेजा है. फाइल फोटो
वालंटियर ने एसएसआई के अलावा टीके के प्रायोजक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और उस व्यक्ति को टीका लगाने वाले उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को नोटिस भेजा है. फाइल फोटो

40 वर्षीय वालंटियर के आरोपों पर बयान जारी करते हुए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) ने कहा कि कंपनी दुर्भावनापूर्वक भ्रामक प्रचार के खिलाफ मजबूती से अपना रखेगी और 100 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 9:36 PM IST
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नई दिल्ली. वैक्सीन टीका बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) ने कोविड-19 के संभावित टीके के परीक्षण में शामिल एक व्यक्ति (वालंटियर) के आरोपों को रविवार को खारिज कर दिया. कंपनी ने गलत आरोप लगाने को लेकर भारी-भरकम जुर्माना वसूलने की भी धमकी दी.

कोविडशील्ड (Covishield) के परीक्षण में चेन्नई में भाग लेने वाले एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने आरोप लगाया कि गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या और ज्ञानेंद्री संबंधी समस्या समेत गंभीर दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ा है. व्यक्ति ने सीरम इंस्टीट्यूट तथा अन्य से पांच करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की है. उसने परीक्षण पर रोक लगाने की भी मांग की है.

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा, ‘‘नोटिस में लगाये गये आरोप दुर्भावनापूर्ण और गलत हैं. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया उक्त व्यक्ति की चिकित्सा स्थिति के प्रति सहानुभूति रखता है, लेकिन टीके के परीक्षण का उसकी स्थिति के साथ कोई संबंध नहीं है.’’



कंपनी ने कहा कि वह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के लिये गलत तरीके से टीके को जिम्मेदार बता रहा है. कंपनी ने कहा कि वह ऐसे आरोपों से अपना बचाव करेगी और गलत आरोप के लिये 100 करोड़ रुपये तक की मानहानि का दावा कर सकती है.
पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University) और फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका (Astrazeneca) के साथ मिलकर कोविड-19 टीका कोविशील्ड बनाने के लिये गठजोड़ किया है. सीरम इंस्टीट्यूट भारत में इस टीके का परीक्षण भी कर रही है.

वॉलंटियर ने परीक्षण टीके को असुरक्षित बताते हुए इसकी टेस्टिंग, निर्माण, और वितरण की मंजूरी रद्द करने की भी मांग की और ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. एसएसआई के अलावा टीके के प्रायोजक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और उस व्यक्ति को टीका लगाने वाले उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को नोटिस भेजा गया है.

व्यक्ति ने आरोप लगाया कि टीका लगवाने के बाद उसे तीव्र मस्तिष्क विकृति, मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली क्षति अथवा रोग का सामना करना पड़ा है और सभी जांचों से पुष्टि हुई है कि उसकी सेहत को टीका परीक्षण से नुकसान हुआ है. इस व्यक्ति को एक अक्टूबर को टीका लगाया गया था.
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