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सीरम इंस्टीट्यूट ने जून में किया कोविशील्ड टीके की 10 करोड़ से अधिक खुराकों का उत्पादन

12-16 सप्ताह  हो गया है कोविशील्ड के दो डोज का अंतर   (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

12-16 सप्ताह हो गया है कोविशील्ड के दो डोज का अंतर (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के हवाले से भारत के दवा नियामक ने बताया कि कंपनी ने कोविडशील्ड टीके के 45 बैच कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला को भेज दिए हैं जिसमें 10.80 करोड़ खुराक शामिल हैं.

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    नई दिल्ली. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अपना वादा पूरा करते हुए जून के दौरान अब तक कोविशील्ड टीके की 10 करोड़ से अधिक खुराकों का उत्पादन किया है. कोविड महामारी की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए भारत में टीकाकरण की रफ्तार बढ़ा दी गई है. भारत में 21 जून से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी निशुल्क कोविड-19 टीकाकरण अभियान के बाद पिछले छह दिन के दौरान प्रतिदिन औसतन 69 लाख खुराकें दी गईं हैं. रविवार को सुबह सात बजे तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक कोविड टीके की 32.17 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं.

    पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के हवाले से भारत के दवा नियामक ने बताया कि कंपनी ने कोविडशील्ड टीके के 45 बैच कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला को भेज दिए हैं जिसमें 10.80 करोड़ खुराक शामिल हैं. इन्हें जून में जारी किया जाएगा. कंपनी के सरकार एवं नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने मई में गृह मंत्री अमित शाह को जून के दौरान टीके की 10 करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध कराने को लेकर आश्वस्त किया था.

    एक और वैक्सीन का निर्माण कर रहा है सीरम
    पुणे बेस्ड सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कोरोना वायरस के बचाव की एक और वैक्सीन कोवोवैक्स का निर्माण शुरू कर दिया है. क्लीनिकल ट्रायल में कोवोवैक्स 90 प्रतिशत से ज्यादा असरदार पाई गई है. भारत में उसका ब्रीजिंग ट्रायल भी अंतिम दौर में है यानी जल्द ही देश को एक और कोरोना वैक्सीन मिलने वाली है. अगले महीने देश में बच्चों पर भी कोवोवैक्स का क्लीनिकल ट्रायल शुरू होने वाला है.

    वैक्सीनेशन के लिए दो टीको का हो रहा है इस्तेमाल
    भारत में चल रहे कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में ज्यादातर कोविशील्ड का ही इस्तेमाल हो रहा है. उसके अलावा भारत बायोटेक की बनाई देसी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन और रूसी वैक्सीन स्पूतनिक V का भी देश में इस्तेमाल हो रहा है.

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