छात्र नेता से संसद तक का सफर, कैसे लद्दाख का ये सांसद रातों-रात बन गया हीरो?

जामयांग शेरिंग (Jamyang Tsering Namgyal) ने संसद तक के सफर में लंबा रास्ता तय किया है. राजनीति के मैदान में उन्होंने पहला कदम जम्मू में रखा. वे यहां ऑल लद्दाख स्टूडेंट एसोसिेएशन (ALSA) के नेता थे.

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 2:31 PM IST
छात्र नेता से संसद तक का सफर, कैसे लद्दाख का ये सांसद रातों-रात बन गया हीरो?
34 साल के जामयांग शेरिंग पहली बार संसद पहुंचे हैं.
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Updated: August 9, 2019, 2:31 PM IST
(आदित्य शर्मा)
लोकसभा (Loksabha) में 6 अगस्त को आर्टिकल 370 (Article 370) पर बहस चल रही थी. हर सांसद बारी-बारी से इस पर अपनी बात रख रहे थे. लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के युवा नेता और लद्दाख के सांसद जामयांग शेरिंग (Jamyang Tsering Namgyal) ने अपने शानदार भाषण से हर किसी का दिल जीत लिया. पलक झपकते ही सोशल मीडिया पर जामयांग शेरिंग छा गए. हर कोई उनके भाषण की तारीफ कर रहा था.

जीत लिया दिल
34 साल के जामयांग शेरिंग पहली बार संसद पहुंचे हैं. जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के मुद्दे पर वो सरकार के पक्ष में अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने लोकसभा सदस्यों से कहा, ''आज एक ऐतिहासिक दिन है... सुनने के लिए धैर्य रखें.'' उनकी बातों पर लोकसभा में बैठे प्रधानमंत्री मोदी से लेकर हर किसी ने तालियां बजाई. लोकसभा में धमाकेदार भाषण देने वाले जामयांग शेरिंग ट्विटर पर ट्रेंड होने लगे.

राजनीतिक सफर
जामयांग शेरिंग ने संसद तक के सफर में लंबा रास्ता तय किया है. राजनीति के मैदान में उन्होंने पहला कदम जम्मू में रखा. वे यहां ऑल लद्दाख स्टूडेंट एसोसिेएशन (ALSA) के नेता थे. बाद में वो लेह में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चे से जुड़े.

उन्होंने न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए कहा, ''हमने लद्दाख के स्टूडेंट की काफी मदद की. उन दिनों मुझे नहीं पता था कि मेरी कभी पार्लियामेंट में एंट्री होगी.''
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सभा को संबोधित करते हुए जामयांग शेरिंग


जम्मू से ग्रेजुएशन करने के बाद वो लेह में बीजेपी के दफ्तर में काम करने लगे. उन्होंने कहा, ''मैं पार्टी के अलग-अलग नेताओं के लिए चिट्ठियां लिखा करता था. इसके अलावा प्रेस रीलीज़ भी ड्राफ्ट करता था. ''

राजनीति में उन्हें सबसे बड़ा ब्रेक उस वक्त मिला जब वो लद्दाख के पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग के चुनावी प्रचार के दौरान मीडिया सेकरेट्री बनाया गया. इसके बाद वो LADHC में कॉउंसिलर बने. फिर वो यहां चेयरपर्सन बने और बाद में उन्हें बीजेपी ने जिले का प्रभारी बनाया.

बुद्धिज्म फॉलो करते हैं शेरिंग
जामयांग सेरिंग नामग्याल का जन्म 4 अगस्त 1985 को लद्दाख के माथो गांव में हुआ. जामयांग का परिवार बुद्धिज्म को मानता है. उनके पिता का नाम स्टैनजिन दोर्जी और माता का नाम ईशे पुतित है. जामयांग जम्मू में उस वक्त काफी चर्चा में आए थे, जब वो जम्मू यूनिवर्सिटी के कामयाब स्टूडेंट लीडर बने. वो लद्दाख के छात्र संगठन ऑल लद्दाख स्टूडेंट एसोसिएशन के 2011-12 में अध्यक्ष रहे.

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First published: August 9, 2019, 1:14 PM IST
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