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यौन उत्पीड़न मामला: पूर्व CM चांडी बोले, लोगों को बदनाम करने की कोशिश नहीं होगी सफल

मीडिया के एक धड़े में खबर आई कि केरल पुलिस की अपराध शाखा ने कहा है कि कथित अपराध में कोई साक्ष्य नहीं मिला है.

मीडिया के एक धड़े में खबर आई कि केरल पुलिस की अपराध शाखा ने कहा है कि कथित अपराध में कोई साक्ष्य नहीं मिला है.

Kerala Latest news: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने ट्वीट किया, ‘‘लोगों को बदनाम करने और सरकार गिराने के चाहे कितने भी अनैतिक तरीके इस्तेमाल किए जाएं, सच्चाई अंतत: सामने आ जाती है. राजनीतिक मंशा वाले मामलों का भंडाफोड़ हो गया है और महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग सच्चाई जानते हैं.’’

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2021, 2:00 AM IST
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कोच्चि. यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) मामले में जांच का सामना कर रहे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओम्मन चांडी ( Kerala Former CM Omman Chandy) ने कहा है कि लोगों को बदनाम करने के चाहे कितने भी अनैतिक तरीके अपनाए जाएं और सरकारों को गिराने के प्रयास किए जाएं लेकिन सच्चाई अंतत: सामने आ जाएगी.

मीडिया के एक धड़े में खबर आई कि केरल पुलिस की अपराध शाखा ने कहा है कि कथित अपराध में कोई साक्ष्य नहीं मिला है. सौर घोटाले की प्रमुख महिला आरोपी द्वारा उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच अपराध शाखा कर रही है.

ट्वीट कर कही ये बात...
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने ट्वीट किया, ‘‘लोगों को बदनाम करने और सरकार गिराने के चाहे कितने भी अनैतिक तरीके इस्तेमाल किए जाएं, सच्चाई अंतत: सामने आ जाती है. राजनीतिक मंशा वाले मामलों का भंडाफोड़ हो गया है और महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग सच्चाई जानते हैं.’’ अपराध शाखा ने कथित तौर पर कहा है कि घटना की कथित तारीख पर तत्कालीन मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर पीड़िता या आरोपी की मौजूदगी का कोई साक्ष्य नहीं मिला है.
क्या था मामला?


महिला ने आरोप लगाया था कि ओमन चांडी, कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस सांसद हीबी इडन और अडूर प्रकाश व पूर्व मंत्री एपी अनिल कुमार ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. तब पूर्व कांग्रेस नेता एपी अब्दुल्लाकट्टी का नाम भी आरोपियों में शामिल था जिन्होंने बाद में बीजेपी जॉइन कर ली. महिला ने पहले केरल कांग्रेस (एम) के नेता जोस एम मणि का नाम भी लिया था जो हाल ही में एलडीए में शामिल हो गए लेकिन फिलहाल उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं हुआ.

केरल के गृह विभाग ने एक गजेट नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें कहा गया कि सरकार ने 2016, 2018 और 2019 में दर्ज होने वाले पांचों मामलों की जांच को सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया था.
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