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कोरोना वायरस से लड़ाई के बीच कर्नाटक-केरल बॉर्डर बंद करने पर छिड़ी बहस के पीछे वजह क्या है?

D P Satish | News18Hindi
Updated: April 6, 2020, 6:12 PM IST
कोरोना वायरस से लड़ाई के बीच कर्नाटक-केरल बॉर्डर बंद करने पर छिड़ी बहस के पीछे वजह क्या है?
कोरोना वायरस के मरीज को एंबुलेंस से निकालते स्वास्थ्य कर्मी (सांकेतिक तस्वीर)

इसकी वजह बताई गई थी कि कासरगोड, जो कि केरल (Kerala) का सबसे उत्तरी जिला है, कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रसार का हॉटस्पॉट बना हुआ और अगर वहां से लोगों को कितनी भी इमरजेंसी की हालत में कर्नाटक (Karnataka) में घुसने दिया गया तो बॉर्डर से सटे इलाकों में कोविड-19 फैल सकता है.

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बेंगलुरु. खतरनाक कोरोना वायरस (Coronavirus) दो पड़ोसी राज्यों- कर्नाटक (Karnataka) और केरल (Kerala) के संबंधों पर अनपेक्षित असर डालता नजर आ रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन (Lockdown) घोषित होने के तुरंत बाद ही कर्नाटक ने केरल के साथ लगने वाली अपनी सीमाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया था.इन दो राज्यों के बीच लोगों की किसी भी तरह की आवाजाही को रोक दिया गया था.

इसकी वजह बताई गई थी कि कासरगोड, जो केरल (Kerala) का सबसे उत्तरी जिला है, कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट (Hotspot) बना हुआ है और अगर वहां से लोगों को कितनी भी इमरजेंसी में कर्नाटक में घुसने दिया गया तो कर्नाटक (Karnataka) के सीमावर्ती जिलों मंगलौर, कोडागू और मैसूर में कोविड-19 का प्रसार हो सकता है.

केरल हाईकोर्ट ने रोका तो कर्नाटक ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
केरल को राज्य से जोड़ने वाली सभी 23 सड़कों को कर्नाटक सरकार ने बंद कर दिया था. यहां तक एंबुलेंस को भी कर्नाटक में नहीं घुसने दिया जा रहा था. इसे लेकर केरल में खासा कोहराम मचा और केरल ने इसे अभूतपूर्व वैश्विक स्वास्थ्य त्रासदी (Global Health Crisis) के बीच अपने उत्तरी पड़ोसी का 'अमानवीय कार्य' भी कहा. लेकिन केरल हाई कोर्ट के एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी वाहनों को अनुमति दिए जाने के आदेश के बाद भी कर्नाटक टस से मस नहीं हुआ.



केंद्र सरकार के आदेश का हवाला देते हुए कर्नाटक ने घोषणा की कि वह राज्य के बॉर्डर बंद रखने के फैसले को बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेगा. सत्ताधारी बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस फैसले का बचाव किया और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के लिए केरल का मजाक भी उड़ाया.



सूत्रों और विश्लेषकोंं के मुताबिक बीजेपी-वामपंथी राजनीति इसकी वजह
कई अंदरूनी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसकी पीछे असली मुद्दा कोरोना के केरल से कर्नाटक आने का डर नहीं है. उनका तर्क है कि बीजेपी, केरल की पिनराई विजयन (P Vijayan) सरकार की बहुचर्चित वायरस से लड़ाई को बेनकाब करना चाहती है.

जैसा कि सभी को पता है कि केरल की कोरोना वायरस के खिलाफ सिस्टमैटिक तरीके से लड़ी गई लड़ाई के चलते वामपंथी सरकार की काफी तारीफ हुई थी. केरल के लोगों ने बीजेपी के शासन वाले राज्यों, खासकर उत्तर भारत के राज्यों, उसमें भी योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के उत्तरप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का मजाक उड़ाया था.

कर्नाटक में 163 जबकि केरल में 256 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित
बता दें कि कर्नाटक में 12 और लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि होने के साथ ही राज्य में इस महामारी के मामले बढ़कर 163 हो गए हैं. वहीं केरल में भी आज कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) के आठ नए मामले सामने आए हैं. केरल में सामने आए इन नए मामलों में से चार लोग ऐेसे हैं जो हाल ही में दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इसके अलावा प्रदेश में छह लोगों को ठीक होने पर अस्पताल से छुट्टी भी मिली है.

प्रदेश सरकार (State Government) ने कहा कि इन नए मामलों के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 256 हो गई है.

इस बीच पुलिस (Police) ने राज्य में बंद का उल्लंघन करने के सिलसिले में लोगों के खिलाफ 2,221 मामले दर्ज कर 2,250 लोगों को गिरफ्तार किया है. विभाग ने 1,567 वाहनों को जब्त भी किया है.

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First published: April 6, 2020, 5:57 PM IST
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