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2014 के बाद फीकी पड़ी बीजेपी में शाहनवाज हुसैन की चमक! केंद्र में भी नहीं मिला पद, बिहार में भी खाली हाथ

बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन (फाइल फोटो- न्यूज18 हिंदी)

बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन (फाइल फोटो- न्यूज18 हिंदी)

Shahnawaz Hussain: बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने अपने राजनीतिक जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं लेकिन 2014 के बाद से पार्टी में उनकी चमक फीकी पड़ती जा रही है. पिछले साल बिहार में नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनना भी उनके लिए समझौते जैसे था लेकिन बिहार में हुई राजनीतिक उठापटक के बाद ये मंत्री पद भी चला गया, साथ ही 17 अगस्त को बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति से भी उन्हें बाहर कर दिया गया. यानी एक के बाद एक उन्हें दो बड़े झटके लगे जिससे उनके राजनीतिक जीवन पर संकट मंडराने लगा है.

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नई दिल्ली: अटल-आडवाणी युग में बीजेपी के अल्पसंख्यक चेहरे के तौर पहचाने जाने वाले सैयद शाहनवाज हुसैन महज 32 साल की उम्र में लोकसभा चुनाव जीतकर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सबसे युवा मंत्री बन गए थे. 1999 के आम चुनाव में उन्होंने बिहार की मुस्लिम बहुल सीट किशन गंज से अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता. शाहनवाज हुसैन ने अपने राजनीतिक जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं लेकिन 2014 के बाद से पार्टी में उनकी चमक फीकी पड़ती जा रही है.

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनना भी उनके लिए समझौते जैसे था लेकिन बिहार में हुई राजनीतिक उठापटक के बाद ये मंत्री पद भी चला गया, साथ ही 17 अगस्त को बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति से भी उन्हें बाहर कर दिया गया. यानी एक के बाद एक उन्हें दो बड़े झटके लगे जिससे उनके राजनीतिक जीवन पर संकट मंडराने लगा है.

2014 के लोकसभा चुनाव में शाहनवाज हुसैन भागलपुर से चुनाव हार गए. इसके बाद 2019 में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया. हालांकि 2014 में शाहनवाज हुसैन को बीजेपी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया और इस पद वे 2021 तक रहे. पूर्व केंद्रीय मंत्री को भाजपा ने 2015 में बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था. क्योंकि हुसैन के लिए यह एक डिमोशन की तरह था. क्योंकि अब तक एक कैबिनेट मंत्री रहे व्यक्ति को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा जा रहा है.

केंद्र से बिहार लौटे, लेकिन फिर हाथ लगी निराशा

2014 में जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो कई वरिष्ठ नेताओं ने आडवाणी खेमे से अपनी वफादारी बदल ली. हालांकि हुसैन ने पाला नहीं बदला. पार्टी सूत्रों ने कहा, वे इस समूह के आंतरिक दायरे में जगह बनाने में नाकामयाब रहे और यही उनके राजनीतिक ग्राफ में पतन का कारण माना जाता है. जिसके कारण वह तरक्की नहीं कर पाए, जिसकी उन्हें उम्मीद थी.

सैयद शाहनवाज हुसैन राष्ट्रीय राजनीति से बिहार की सियासत में आने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन अंत में उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा, वे आखिरकार 2021 में बिहार सरकार में मंत्री पद ग्रहण करने के लिए तैयार हो गए. फिर उन्हें एमएलसी बनाया गया और बिहार में उद्योग मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई, जहां भाजपा नीतीश कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) के साथ गठबंधन में थी.

जब सुशील मोदी को केंद्र में लाया गया और भाजपा बिहार में अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही थी, तो हुसैन को राज्य में ले जाना एक चतुर कदम की तरह लग रहा था. क्योंकि पार्टी को बिहार में मजबूत करने के लिए ‘राष्ट्रीय कद’ के नेता की जरूरत थी. हुसैन को गठबंधन सरकार में मंत्री बनाकर मुसलमानों तक एक संदेश भेजा था.

17 साल से जिस समिति में थे, उसमें भी नहीं मिली जगह

लेकिन राजनीतिक दुर्भाग्य ने शाहनवाज हुसैन का साथ यहां भी नहीं छोड़ा और नीतीश कुमार ने बीजेपी से अलग होकर आरजेडी से हाथ मिला लिया. इस गठबंधन के टूटने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में शाहनवाज हुसैन ने कहा कि, “जब मैंने दिल्ली से उड़ान भरी, तो मैं एक मंत्री था और जब मैं यहां उतरा, तो मंत्री नहीं था. हुसैन राज्य में निवेश लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे जिससे रोजगार सृजन हो सकता था.

वहीं 17 अगस्त को शाहनवाज हुसैन केंद्रीय चुनाव समिति से भी हटा दिए गए, जिसमें अब प्रधान मंत्री सहित 15 सदस्य हैं . वह इस समिति में एकमात्र अल्पसंख्यक चेहरा थे लेकिन पार्टी ने पंजाब को देखते हुए एक सिख नेता इकबाल सिंह लालपुरा इस समिति में शामिल किया. शाहनवाज हुसैन 17 सालों से इस समिति में थे. 2019 में वह उस समिति का हिस्सा थे जिसने उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए टिकट से वंचित कर दिया था. पार्टी सूत्रों ने कहा कि शाहनवाज हुसैन को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस बारे में बताया था जिसमें इस बार समिति में नए लोगों’ को शामिल किया था.

बहरहाल ऐसी भी चर्चा है कि नीतीश कुमार से अलग होने के बाद भाजपा बिहार में शाहनवाज हुसैन को लेकर बड़ा दांव खेल सकती है. नीतीश कुमार पर विश्वासघात करने का आरोप लगाने वाली भाजपा को राज्य में 2025 के विधानसभा चुनावों में अपने दम पर जीत का भरोसा है.

Tags: Bihar BJP, Syed shahnawaz hussain

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