शंकर सिंह वाघेला ने NCP के राष्ट्रीय महासचिव पद और सक्रिय सदस्यता से दिया इस्तीफा

शंकर सिंह वाघेला ने NCP के राष्ट्रीय महासचिव पद और सक्रिय सदस्यता से दिया इस्तीफा
वाघेला ने NCP से इस्तीफा दे दिया है (फाइल फोटो)

वाघेला ने हालिया राजनीतिक घटनाओं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और तालुका-जिले और राज्यों के पदाधिकारियों के पार्टी से असंतुष्ट होने को अपने इस्तीफे की वजह बताया है.

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नई दिल्ली. गुजरात के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला (Shankersinh Vaghela) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राष्ट्रीय महासचिव पद (National General Secretary) और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) और महासचिव प्रफुल्ल पटेल (Praful Patel) को लिखे एक पत्र में उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी दी. इस पत्र को उन्होंने ट्विटर (Twitter) पर पोस्ट कर, अपने इस्तीफे की सार्वजनिक घोषणा भी की.

वाघेला ने हालिया राजनीतिक घटनाओं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और तालुका-जिले और राज्यों के पदाधिकारियों के पार्टी से असंतुष्ट होने को अपने इस्तीफे की वजह बताया है. बता दें कि पिछले दिनों ऐसी रिपोर्ट सामने आईं थीं, जिसमें शंकर सिंह वाघेला को NCP से नाराज बताया गया था. कहा जा रहा था कि वे गुजरात में NCP अध्यक्ष के तौर पर जयंत पटेल उर्फ बोस्की की नियुक्ति के बाद से पार्टी से नाराज थे.

हालिया राजनीतिक बदलावों से पार्टी कार्यकर्ताओं मे निराशा, इसलिए दे रहा इस्तीफा: वाघेला 
वाघेला ने अपने पत्र में शरद पवार के प्रफुल्ल पटेल के साथ खुद अहमदाबाद आकर उन्हें NCP में शामिल करने के लिए शरद पवार को धन्यवाद दिया. उन्होंने लिखा कि उनके कार्यकाल के दौरान गुजरात के कई जिलों और तालुकों में NCP के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी मजबूत हुई. इसके आगे उन्होंने लिखा कि लेकिन मेरी अध्यक्षता में हुए बदलाव और हालिया राजनीतिक प्रगति के चलते पूरी पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और तालुका-जिले के नेताओं में निराशा भर गई है. उन्होंने अपने पत्र में इन्हीं उपर्युक्त वजहों से इस्तीफा देने की बात कही.





रोचक है वाघेला की राजनीतिक यात्रा, अब तक 5 पार्टियों में रह चुके हैं
वाघेला ने जनसंघ के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी. जब वह जनता पार्टी बनी तो भी वे उसके साथ थे. जनता पार्टी के टूटने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में एक वरिष्ठ नेता की हैसियत से पहचाने जाते थे. लेकिन 1996 में उन्होंने अपने रास्ते भारतीय जनता पार्टी से अलग कर लिए और 'राष्ट्रीय जनता पार्टी' की स्थापना की. इस दौरान वे 1996-97 में गुजरात के मुख्यमंत्री भी रहे. बाद में उन्होंने कांग्रेस (Congress) में अपनी पार्टी का विलय कर दिया. लेकिन 2017 में उन्होंने कांग्रेस भी छोड़ दी और विपक्ष के नेता के पद से भी इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने 'जन विकल्प मोर्चा' नाम से एक नई पार्टी बनाई. इस पार्टी के साथ ही उन्होंने 2017 के चुनावों में भाग लिया लेकिन उनकी पार्टी कोई भी सीट जीतने में असफल रही. जिसके बाद 2019 में वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हो गये थे.
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