Kisan Andolan: कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रपति से मिलेंगे शरद पवार, खुद मंत्री रहते हुए कभी ऐसे ही रखे थे प्रस्ताव- रिपोर्ट

शरद पवार ने किसानों को दिया है समर्थन. (File Pic)

Farmer Protest: किसान कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार 9 दिसंबर को राष्ट्रपति से मुलाकात करने जा रहे हैं. इस बीच देश के कृषि मंत्री रहते हुए राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखी कुछ चिट्ठियों से उन्हीं पर सवाल खड़े हो गए हैं.

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    नई दिल्ली. कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन (Farmer Protest) को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) और उनकी पार्टी ने समर्थन दे दिया है. वह 9 दिसंबर को इस मुद्दे पर राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) से मुलाकात करने वाले हैं. इससे पहले जब वह कृषि मंत्री थे तो उस समय उनकी ओर से मुख्‍यमंत्रियों को लिखी गई चिट्ठियां सामने आई हैं.  समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि यूपीए सरकार में कृषि मंत्री रहते हुए पवार ने मुख्यमंत्रियों से उनके राज्यों में एपीएमसी कानून में संशोधन करने को कहा था, ताकि निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके.

    पवार द्वारा अनेक मुख्यमंत्रियों को लिखे कुछ पत्रों की विषयवस्तु साझा करते हुए सूत्रों ने दावा किया कि भाजपा नीत राजग सरकार ने कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) कानून में कुछ बदलाव किये हैं, जिनके लिए पवार ने केंद्रीय मंत्री रहते हुए प्रयास किये थे. पवार केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के प्रदर्शन को लेकर नौ दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर सकते हैं. राकांपा ने आठ दिसंबर को भारत बंद के किसानों के आह्वान का समर्थन किया है.

    सरकारी सूत्रों ने कहा कि पवार ने 2010 में दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लिखे पत्र में कहा था कि देश के ग्रामीण इलाके में विकास, रोजगार और आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि क्षेत्र को अच्छी तरह संचालित बाजारों की जरूरत होगी.

    राज्य एपीएमसी कानून में संशोधन की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने पत्र में लिखा, ‘इसके लिए शीत गृहों समेत विपणन ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी. इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है जिसके लिए एक उचित नियामक तथा नीतिगत माहौल चाहिए होगा.’

    इसी तर्ज पर उन्होंने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में खेतों से लेकर उपभोक्ताओं तक विपणन के ढांचे में निवेश की जरूरत पर जोर देते हुए कहा था कि निजी क्षेत्र को इस संबंध में अहम भूमिका निभानी होगी. (भाषा की रिपोर्ट लेटेस्ट अपडेट जोड़ते हुए)

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