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एल्गार परिषद मामला NIA के पास, उद्धव सरकार से खफा हुए शरद पवार

भाषा
Updated: February 14, 2020, 11:49 PM IST
एल्गार परिषद मामला NIA के पास, उद्धव सरकार से खफा हुए शरद पवार
शिवसेना ने महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़कर शरद पवार के साथ सरकार बनाई है.

शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा, 'मामले की जांच एनआईए (NIA) को सौंपकर केन्द्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया.'

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  • Last Updated: February 14, 2020, 11:49 PM IST
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कोल्हापुर. राकांपा प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने एल्गार परिषद मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस से लेकर एनआईए (NIA) को सौंपे जाने को लेकर उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार की शुक्रवार को आलोचना की. शरद पवार ने यहां पत्रकारों से कहा कि केन्द्र ने मामले की जांच पुणे पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपकर ठीक नहीं किया. क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है.

शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा, 'मामले की जांच एनआईए (NIA) को सौंपकर केन्द्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया.' बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) शिवसेना (Shiv sena) नीत महा विकास आघाड़ी (MVA) सरकार की सहयोगी है और इसके नेता अनिल देशमुख राज्य के गृहमंत्री हैं. बता दें कि शरद पवार इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठा चुके थे. शिवसेना के साथ सरकार बनने के बाद इसकी संभावना भी दिखने लगी थी, अचानक महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में यू टर्न ले लिया और पुणे की कोर्ट ने मामला एनआईए कोर्ट के सुपुर्द कर दिया.

पुणे कोर्ट ने एल्गार परिषद मामला एनआईए अदाल को सौंपा
एल्गार परिषद मामले की सुनवाई कर रही पुणे की एक अदालत ने शुक्रवार को एक आदेश पारित करते हुए यह मुकदमा मुंबई की विशेष एनआईए अदालत को हस्तांतरित कर दिया. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस आर नवंदर ने यह आदेश पारित किया. अदालत द्वारा आदेश पारित किए जाने से पहले अभियोजन पक्ष ने कहा कि उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका पर कोई आपत्ति नहीं है, जिसमें मामला हस्तांतरित किए जाने का अनुरोध किया गया है.

केंद्र ने पिछले महीने मामले की जांच पुणे पुलिस से एनआईए को हस्तांतरित कर दिया था और शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस सरकार ने इस कदम की आलोचना की थी. एनआईए ने जनवरी के आखिरी सप्ताह में अदालत से अनुरोध किया था. यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एलगार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है. पुलिस का दावा है कि इस वजह से अगले दिन जिले में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की.

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First published: February 14, 2020, 11:48 PM IST
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