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'CAA को लेकर बहुत झूठ और अफवाहें फैलाई गई', जानें शरजील इमाम मामले में कोर्ट ने क्या कहा

'CAA को लेकर बहुत झूठ और अफवाहें फैलाई गई', जानें शरजील इमाम मामले में कोर्ट ने क्या कहा

शरजील इमाम को बिहार के जहानाबाद से साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था.(फाइल फोटो)

शरजील इमाम को बिहार के जहानाबाद से साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था.(फाइल फोटो)

Sharjeel Imam Case: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने ये भी कहा कि आरोपी शरजील इमाम ने देश के राष्ट्रपिता के ख़िलाफ़ भी बात बोली और ऐसा प्रतीत होता है कि वो लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को लेकर भी संशय में था. उसके भाषण हिंसा फैलाने के उद्देश्य से दिए गए लगते थे और उनसे समाज में नफ़रत फैलाने का उद्देश्य लगता है. जज ने ये भी कहा कि आरोपी इमाम ने चिकन नैक को ब्लॉकेज करने की बात की थी, जैसे वो ये बताना चाह रहा हो कि वो ज़मीन मुस्लिमों से सम्बन्ध रखती हो और उसका बयान उसके इरादों को दर्शाता है.

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नई दिल्ली. दिल्ली (Delhi) की कोर्ट ने सोमवार को शरजील इमाम (Sharjeel Imam) को कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था. साथ ही कोर्ट ने इमाम के खिलाफ देशद्रोह (Sedition) के आरोप तय किए थे. मामले में अदालत की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि नागरिकता संशोधन कानून यानि CAA को लेकर बहुत ‘अफवाहें’ फैलाई गई हैं. इमाम को बिहार (Bihar) के जहानाबाद से साल 2020 में गिरफ्तार किया गया था.

दिल्ली की कोर्ट ने कहा, ‘CAA एक विशेष वर्ग के लोगों को नागरिकता देने की दिशा में सकारात्मक कदम था और इससे किसी की भी नागरिकता लेने की कोई बात नहीं थी, हालांकि, इसे लेकर बहुत से झूठ और अफ़वाहें उड़ाई गई कि ये एक समुदाय के ख़िलाफ़ है.’ कोर्ट ने 1947 के भारत पाकिस्तान विभाजन का हवाला देते हुए कहा कि CAA का उद्देश्य धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों को नागरिकता देने का था. जज ने कहा कि उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर विशेष समझौता हुआ था. भारत ने तो ईमानदारी से उसे निभाया लेकिन पाकिस्तान ने नहीं.

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने ये भी कहा कि आरोपी शरजील इमाम ने देश के राष्ट्रपिता के ख़िलाफ़ भी बात बोली और ऐसा प्रतीत होता है कि वो लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को लेकर भी संशय में था. उसके भाषण हिंसा फैलाने के उद्देश्य से दिए गए लगते थे और उनसे समाज में नफ़रत फैलाने का उद्देश्य लगता है. जज ने ये भी कहा कि आरोपी इमाम ने चिकन नैक को ब्लॉकेज करने की बात की थी, जैसे वो ये बताना चाह रहा हो कि वो ज़मीन मुस्लिमों से सम्बन्ध रखती हो और उसका बयान उसके इरादों को दर्शाता है.

भाषा के अनुसार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने आदेश में कहा था, ‘मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा- 124 (राजद्रोह), धारा-153ए (दो अलग समूहों में धर्म के आधार पर विद्वेष को बढ़ावा देना), धारा-153बी (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ अभिकथन), धारा-505 (सार्वजनिक अशांति के लिए बयान), गैरकानूनी गतिविधि (निषेध) अधिनियम (यूएपीए) की धारा-13 (गैरकानूनी गतिविधि के लिए सजा) के तहत आरोप तय किया जाता है. अलग आदेश के तौर पर देखें, नियमित जमानत के लिए शरजील इमाम द्वारा दी गई अर्जी खारिज की जाती है.’

Tags: CAA, Sharjeel Imam

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