Assembly Banner 2021

पटना साहिब लोकसभा नतीजे: हैट्रिक नहीं लगा पाए शत्रुघ्न, खेल चुके हैं ऐसी सियासी पारी

शत्रुघ्न सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा

पटना साहिब लोकसभा नतीजे ( Patna Sahib Election Result): शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha)

  • Share this:
बिहार के पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के लिए मायूसी की खबर आई. कांग्रेस उम्मीदवार और बॉलीवुड सुपरस्टार रहे शत्रुघ्न सिन्हा इस सीट पर चुनाव हार गए हैं. 23 मई को जारी मतगणना में इस सीट का नतीजा आ चुका है और भाजपा उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद ने भाजपा की साख कायम रखी है. नतीजे कह रहे हैं कि प्रसाद 62.5 फीसदी वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि सिन्हा को केवल 32 फीसदी ही वोट मिले. प्रसाद को कुल 354265 वोट हासिल हुए जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सिन्हा को 181389 वोट मिले. इस सीट पर किसी अन्य प्रत्याशी को पांच अंकों की संख्या में वोट नसीब नहीं हुए.

पटना साहिब सीट पर इस बार मुकाबला कायस्थ जाति के दो उम्मीदवारों के बीच रहा. एक केंद्र सरकार में मंत्री हैं तो दूसरे बीजेपी से असंतुष्ट होकर कांग्रेस में शामिल होने वाले बॉलीवुड सुपरस्टार. 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी. 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शत्रुघ्न सिन्हा को इस सीट पर प्रत्याशी बनाकर भेजा था. शत्रुघ्न दोनों ही बार यहां से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे.

शुरुआती समय में ही राजनीति में आए ‘शत्रु’
जहां दूसरे एक्टर्स अपने करियर के आखिर में राजनीति में आने की सोचते हैं, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा इसमें अपवाद हैं. उन्होंने करियर की शुरुआती दिनों में ही राजनीति में आने का मन बना लिया था. चाहे दोस्त हो या दुश्मन, दिलचस्प बात है कि शत्रुघ्न सिन्हा हमेशा विनिंग क्लब में ही रहे.1992 में बीजेपी में शामिल होने से पहले शत्रुघ्न सिन्हा राजनीतिक कार्यक्रमों में शिरकत करने लगे थे. वह स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण के आंदोलनों में भी रहे और इंदिरा गांधी के कार्यक्रमों में रहे मौजूदगी दर्ज कराई. सिन्हा कई मौकों पर स्वीकार कर चुके हैं कि जय प्रकाश नारायण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए काफी प्रेरित किया. जेपी नारायण के आंदोलन के दिनों में शत्रुघ्न सिन्हा बिहारी बाबू के रूप में युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए थे.
जय प्रकाश आंदोलन


जेपी नारायण के अनुयायी होने के नाते शत्रुघ्न सिन्हा छात्र आंदोलन में नेता के तौर पर उभरे नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं को संपर्क में भी आए. ये दोनों आज बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं.

बीजेपी में शत्रुघ्न सिन्हा लालकृष्ण आडवाणी के करीबी माने जाते रहे. वे कई बार खुद भी कह चुके हैं कि राजनीति में वे आडवाणी जी के कारण ही आएं. आडवाणी का स्नेह-दुलार भी कई बार उनके प्रति दिखा. सबसे पहले इसकी झलक दिखी वर्ष 1991 में जब लालकृष्ण आडवाणी की जीती हुई सीट से शत्रुघ्न सिन्हा पहली बार चुनावी मैदान में उतरे.

राजेश खन्ना के खिलाफ लड़ा चुनाव
शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक सफर साल 1992 में शुरू हुआ. जब वह नई दिल्ली सीट से कांग्रेस के राजेश खन्ना के खिलाफ खड़े हुए. हालांकि, शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव हार गए लेकिन पार्टी में उनकी जगह समय के साथ खास होती चली गई.

शत्रुघ्न सिन्हा 1996-2008 तक दो बार राज्यसभा सांसद रहे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 2003 में जब मंत्रिमंडल विस्तार किया, तो शत्रुघ्न सिन्हा को स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री और जहाजरानी मंत्री बनाया. साल 2009 में पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा ने पहली बार चुनाव जीता. साल 2014 में भी शत्रुघ्न सिन्हा ने 55 फीसदी वोट पाकर जीत दर्ज की, लेकिन मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से वह बीजेपी से नाराज हो गए. तब से लेकर आज तक नाराज शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के खिलाफ लगातार बयानबाजी करते रहे हैं.​
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज