कठुआ केस: आरोपियों के वकील ने महिला जांचकर्ता को लेकर कहा- औरत है, कितना दिमाग होगा उसमें

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि ये पूरी जांच मनगढ़ंत है क्योंकि अपने मन मुताबिक नतीजे के लिए गवाहों को प्रताड़ित किया गया है.

News18.com
Updated: April 17, 2018, 11:05 PM IST
कठुआ केस: आरोपियों के वकील ने महिला जांचकर्ता को लेकर कहा- औरत है, कितना दिमाग होगा उसमें
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि ये पूरी जांच मनगढ़ंत है क्योंकि अपने मन मुताबिक नतीजे के लिए गवाहों को प्रताड़ित किया गया है.
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Updated: April 17, 2018, 11:05 PM IST
जम्मू कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के गैंगरेप और हत्या के मामले में आरोपियों के वकील ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए विवादित बयान दिया. उन्होंने कि यह सारी जांच एक महिला अधिकारी की अगुवाई में हुई है और केस की जांच करना उनकी समझ से बाहर की बात है.

वकील अंकुर शर्मा इस मामले के आठ में से पांच आरोपियों के वकील के तौर पर पेश हुए. उन्होंने न्यूज़ 18 से कहा कि जांच अधिकारी महिला हैं, नई हैं और उन्हें किसी ने मिसगाइड कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार जांच के लिए गठित एसआईटी की एकमात्र महिला अधिकारी श्वेतांबरी शर्मा को इससे पहले भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था.

बचाव पक्ष के वकील अंकुर शर्मा ने मंगलवार को कहा, 'श्वेतांबरी क्या है, लड़की है. उसका कितना ही दिमाग होगा. वह नई अधिकारी है, किसी ने उन्हें झूठे सबूत दिखाकर विश्वास दिला दिया कि घटना इस तरह से हुई है.' उन्होंने आगे कहा कि पुलिस अधिकारी और ब्यूरोक्रेट्स सिर्फ कठपुतलियां हैं. अगर उन्हें इतनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ा तो उन्होंने पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसके बारे में बताया क्यों नहीं.

शर्मा ने कहा कि ये पूरी जांच मनगढ़ंत है, क्योंकि अपने मन मुताबिक नतीजे के लिए गवाहों को प्रताड़ित किया गया है. उन्होंने बताया कि करीब 40 से 50 लोगों ने कहा कि उनसे क्राइम ब्रांच द्वारा इसलिए प्रताड़ित किया गया वो जैसा क्राइम ब्रांच के अधिकारी चाहते हैं वैसा बयान दे दें.

गवाहों को प्रताड़ित करने वाली बात को सिद्ध करने के लिए अंकुर शर्मा ने आगे बताया कि क्राइम ब्रांच का कहना था कि आरोपी विशाल जंगोत्रा ने अपना फोन मेरठ में तीन दोस्तों को दे दिया, ताकि उसकी लोकेशन का पता न लग सके. क्राइम ब्रांच की टीम ने ये भी कहा कि जब विशाल कठुआ में था तो ये दोस्त ही उसकी अटेंडेंस भी लगाते थे. लेकिन मजिस्ट्रेट के तीनों लड़कों ने बताया कि स्टेटमेंट बदलने के लिए कैसे उन्हें 10 से 15 दिनों तक टॉर्चर किया गया. लड़कों ने ये भी कहा कि विशाल परीक्षा में शामिल होने के लिए मेरठ में था और लोहड़ी के दिन हम साथ ही थे. साथ ही उन्होंने उस एटीएम का डिटेल भी दिया जहां से उसने पैसे निकाले थे ताकि सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से साबित हो सके कि वारदात के समय विशाल मेरठ में ही मौजूद था.

10 जनवरी को आठ साल की बच्ची जम्मू के कठुआ ज़िले के हीरानगर के रासना गांव से गायब हो गई थी. बाद में बच्ची 17 जनवरी को मृत पाई गई. इस मामले छानबीन के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दाखिल की गई चार्जशीट में कहा गया कि इस घटना को अंजाम देने के पीछे वहां से बकरवाल समुदाय के लोगों को भगाना था. ताकि वो डर जाएं और वहां से भाग जाएं. इस चार्जशीट में रासना गांव के देवीस्थान के सेवादार को मुख्य दोषी बताया गया है. चार्जशीट में कहा गया है कि सेवादार संजी राम के साथ इस घटना में पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया, सुरेंद्र वर्मा, उसका मित्र परवेश उर्फ मन्नू, व विशाल जंगोत्रा शामिल था.

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