शाहरूख की फैन थीं शीला दीक्षित, इतनी बार देखी DDLJ कि घरवाले हो गए थे परेशान

उनकी बेटी लतिका दीक्षित सईद ने बताया कि वो शाहरूख खान की बहुत बड़ी फैन थीं. शाहरूख का अभिनय उन्हें बेहद पसंद था.

News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 6:20 PM IST
शाहरूख की फैन थीं शीला दीक्षित, इतनी बार देखी DDLJ कि घरवाले हो गए थे परेशान
शीला दीक्षित को फिल्में देखना काफी पसंद था.
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Updated: July 20, 2019, 6:20 PM IST
दिल्‍ली की पूर्व CM शीला दीक्षित को पढ़ने के अलावा फ़िल्में देखने का भी बहुत शौक था. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', कई बार देखी थीं. उनकी बेटी लतिका दीक्षित सईद ने बताया कि वो शाहरूख खान की बहुत बड़ी फैन थीं. शाहरूख का अभिनय उन्हें बेहद पसंद था. लतिका ने बताया, उन्होंने 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', इतनी बार देखी थी कि हम लोग परेशान हो गए थे.

शीला को फिल्में देखना काफी पसंद था. पहले वो भारतीय सुपर स्‍टर दिलीप कुमार और राजेश खन्ना की बड़ी फैन थीं. लोक संगीत के क्षेत्र में उनकी खास दिलचस्पी थी. शायद ही कोई दिन ऐसा बीतता था, जब वो बिना संगीत सुने बिस्तर पर जाती थीं. लतिका ने बताया कि एक महिला के तौर पर वो अंदर से बेहद मजबूत थीं.

बस में मिला शादी का प्रपोजल
शीला ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया है कि उनके पति विनोद ने डीटीसी की बस में ही उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था. जब वो फाइनल ईयर का एग्जाम देने वाले थे तब एक दिन पहले 10 नंबर की बस में चांदनी चौक के पास विनोद ने शीला को बताया था कि वो अपनी मां को बताने जा रहे हैं कि उन्होंने लड़की चुन ली है, जिससे वो शादी करेंगे. शीला ने तब विनोद से कहा था कि क्या तुमने उस लड़की से दिल की बात पूछी है? तब विनोद ने कहा था कि नहीं, लेकिन वो लड़की बस में मेरी सीट के आगे बैठी है.

शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर
1. पंजाब के कपूरथला में जन्मी शीला दीक्षित की शादी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से हुई. पंजाबी से ब्राह्मण बनीं शीला दीक्षित ने ससुर के राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला.

2. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में पहली बार शीला दीक्षित कन्नौज से लड़कर संसद तक पहुंची. गांधी परिवार की करीबी होने के नाते उन्हें राजीव गांधी के सरकार में संसदीय कार्य राज्यमंत्री और पीएमओ में मंत्री बनने का मौका मिला.
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3. 1998 में सोनिया गांधी के राजनीति में आने बाद शीला दीक्षित को भी दुबारा राजनीति में सक्रिय होने का मौका मिला. सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली की बांगडोर सौंपी. जिसके बाद शीला दीक्षित ने पलट कर नहीं देखा. केंद्र में जाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की लेकिन दिल्ली में शीला दीक्षित ही सत्ता में रहीं.

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First published: July 20, 2019, 6:02 PM IST
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