कृषि विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर को पंजाब में चक्का जाम करेगा शिरोमणि अकाली दल

शिअद नेतृत्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित एक ज्ञापन पंजाब के राज्यपाल को सौंपेगा और इन विधेयकों को वापस लेने का अनुरोध करेगा. (फाइल फोटो)
शिअद नेतृत्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित एक ज्ञापन पंजाब के राज्यपाल को सौंपेगा और इन विधेयकों को वापस लेने का अनुरोध करेगा. (फाइल फोटो)

Farm Bills: कृषि विधेयक रविवार को राज्य सभा में विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच पारित हो गया. ये विधेयक पिछले सप्ताह गुरुवार को लोकसभा से पारित हुए थे. करीब 30 किसान संगठनों ने इन विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर को पूर्ण बंद का आह्वान किया है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 22, 2020, 11:33 PM IST
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चंडीगढ़. भाजपा (BJP) की पुरानी सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने मंगलवार को घोषणा की है कि वे संसद (Parliament) से पारित कृषि विधेयकों (Farm Bills) के खिलाफ 25 सितंबर को पंजाब (Punjab) में 'चक्का जाम' करेंगे. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हालांकि अकाली दल के फैसले को किसानों की भावनाओं का “शोषण” करने का एक और “बेशर्म प्रयास” करार देते हुए कहा कि संभवत: यह केंद्र सरकार के इशारे पर किसानों की लड़ाई को “नुकसान” पहुंचाने का एक प्रयास भी हो सकता है.

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020, रविवार को राज्य सभा में विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच पारित हो गया. ये विधेयक पिछले सप्ताह गुरुवार को लोकसभा से पारित हुए थे. राज्य सभा ने रविवार को आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दी. इसके अलावा किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं सुविधा) विधेयक 2020 तथा किसान (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता एवं कृषि सेवा विधेयक 2020 को भी मंजूरी प्रदान की.

इन विधेयकों को पिछले हफ्ते लोकसभा पारित कर चुकी है.



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तीन घंटे के लिए सड़क जाम करेंगे लोग
शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा, ' इन विधेयकों के खिलाफ पंजाब में 25 सितंबर को चक्का जाम (सड़क बंद) करने का निर्णय लिया गया है.' उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता, किसान और खेतिहर मजदूर राज्य में पूर्वाह्न 11 बजे से शांतिपूर्ण तरीके से तीन घंटे के लिए सड़क जाम करेंगे.

इससे पहले करीब 30 किसान संगठनों ने इन विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर को पूर्ण बंद का आह्वान किया है.

चीमा ने बताया कि पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल 26 सितंबर को राज्य में चार दिवसीय वृहद संपर्क कार्यक्रम शुरू करेंगे जिसमें वे पार्टी कार्यकर्ताओं को बताएंगे कि ये विधेयक कैसे किसान समुदाय पर नकारात्मक असर डालते हैं. उन्होंने कहा कि एक अक्टूबर को सुखबीर बादल बठिंडा में दमदमा साहिब से ‘किसान मार्च’ भी निकालेंगे.

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मार्च का नेतृत्व करेंगी हरसिमरत कौर बादल
चीमा ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल अमृतसर में अकाल तख्त से मार्च का नेतृत्व करेंगी जबकि पार्टी नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा और वह आनंदपुर साहिब में केशगढ़ साहिब से मार्च का नेतृत्व करेंगे. उन्होंने कहा कि यह मार्च मोहाली में खत्म होगा जिसके बाद शिअद नेतृत्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित एक ज्ञापन पंजाब के राज्यपाल को सौंपेगा और इन विधेयकों को वापस लेने का अनुरोध करेगा.

कृषि क्षेत्र के इन विधेयकों के विरोध में शिअद नेता हरसिमरत कौर बादल ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. वह केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं.

अमरिंदर सिंह ने शिअद से पूछा सवाल
वहीं मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने एक बयान में शिअद से पूछा, “आप दिल्ली जाकर भाजपा नेताओं और अन्य के घरों के बाहर चक्का जाम क्यों नहीं करते जिन्होंने बेशर्मी से पंजाब के किसानों के हितों को अपने निहित स्वार्थों के लिये बड़े कॉरपोरेट घरानों को बेच दिया.” उन्होंने शिअद को चुनौती दी कि अगर उसे वास्तव में किसानों की फिक्र है तो वह केंद्र सरकार से इस्तीफा देकर दिखाए.



उन्होंने शिअद प्रमुख सुखबीर बादल से पूछा, “ये दोहरे मापदंड क्यों है? आज आपकी कोर समिति ने क्यों भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को छोड़ने का फैसला नहीं किया.”
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