Analysis। 25 नवंबर की तारीख और 2019 का 'अयोध्या कांड'

25 नवंबर को लेकर अयोध्या के लोग सकते में हैं. अगर स्थानीय लोगों की मानें, तो मंदिर बनाने के लिए इतनी भीड़ की जरूरत ही नहीं है. जब मंदिर बनाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट या संसद में ही होना है, तो अयोध्या में इतनी भीड़ क्यों?

News18Hindi
Updated: November 20, 2018, 3:30 PM IST
Analysis। 25 नवंबर की तारीख और 2019 का 'अयोध्या कांड'
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: November 20, 2018, 3:30 PM IST
(अनिल राय)

अयोध्या नगरी सज चुकी है. न भगवान राम की बारात के लिए और न ही उनकी राजगद्दी पर ताजपोशी के लिए. अगर आप पूछना चाहते हैं कि किसलिए, तो इसका जवाब शायद आप खुद समझते और जानते हैं. लाखों की तादात में श्रद्धालू अयोध्या में हैं. वैसे तो कार्तिक पूर्णिमा के पंचकोसी परिक्रमा के मौके पर हर साल लाखों भक्त यहां आते हैं लेकिन इस बार फिजा कुछ अलग ही है. कार्तिक पूर्णिमा के मेले से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि 25 नवंबर को राम की नगरी में क्या होगा?

दरअसल हार साल 6 दिसम्बर आते-आते अयोध्या की राजनीति का पारा चढ़ जाता है. लेकिन करीब आते 2019 के चुनावी साल के नाते इस बार हालात पहले से भी ज्यादा सरगर्म हैं. इस बार मंदिर निर्माण से ज्यादा जोर मंदिर निर्माण का श्रेय लेने की है और इसकी शुरुआत शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने की है. ठाकरे की 25 नवंबर को अयोध्या जाने और मंदिर पर बैठक करने की घोषणा के बाद वर्षों से राम मंदिर आंदोलन में अपने को सबसे आगे बताने वाला विश्व हिंदू परिषद पिछड़ता नजर आने लगा. इसके बाद आनन-फानन में 25 को ही अयोध्या में धर्म संसद बुलाने के ऐलान कर दिया गया.

मंदिर बनाने से ज्यादा, श्रेय की चिंता किस कदर है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शिवसेना के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थल रामकथा पार्क की अनुमति को भी रद्द कर दिया गया. हालांकि बाद में शिवसना को लक्ष्मण किला में कार्यक्रम करने की अनुमति दे दी गई, लेकिन शिवसेना का आरोप है कि सरकार उनके कार्यक्रम को फ्लॉप करना चाहती है.

दूसरी ओर विश्व हिन्दू परिषद अयोध्या के बड़ा भक्त महल में 2 लाख से ज्यादा लोगों को इकठ्ठा करने की योजना बना रहा है. कार्यक्रम की तैयारी के लिए विश्व हिन्दू परिषद नेता चंपक राय, संघ के सर कार्यवाह कृष्ण गोपाल, भैय्या जी जोशी समेत आरएसएस, बजरंग दल के सभी बड़े नेता अयोध्या पहुंच चुके हैं. विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता की मानें तो ये नेता 25 नवंबर को किसी भी घोषणा से पहले अयोध्या में संतों से मिलकर आम सहमित बनाने का प्रयास करेंगे.

शिवसेना ने भी अयोध्या की तैयारी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नारे हर हिन्दू की यहीं पुकार, पहले मंदिर फिर सरकार के साथ पार्टी के प्रवक्ता संजत राउत समेत शिवेसेना के एक दर्जन से ज्यादा नेताओं ने एक सप्ताह पहले से ही लखनऊ से अधोध्या तक डेरा डाल रखा है.

25 नवंबर को लेकर अयोध्या के लोग सकते में हैं. अगर स्थानीय लोगों की मानें, तो मंदिर बनाने के लिए इतनी भीड़ की जरूरत ही नहीं है. जब मंदिर बनाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट या संसद में ही होना है, तो अयोध्या में इतनी भीड़ क्यों?
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2019 के लोकसभा चुनाव में अब 6 महीने से कम का वक्त बचा है और जिस तरह से पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों में मंदिर मुद्दा उठा है, ऐसे में लोकसभा चुनाव मंदिर मुद्दे के आस-पास ही लड़ा जाएगा, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

साफ है कि ऐसे में हिन्दू वोट बैंक के बल पर राजनीति करने वाली शिवसेना किसी भी कीमत पर मंदिर आंदोलन में अपने को पिछड़ते हुए नहीं देख सकती और कुछ यही हाल भारतीय जनता पार्टी का है. बीजेपी भले ही पूरे मुद्दे पर खुलकर सामने न आए, लेकिन आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और पार्टी के कुछ चेहरों के सहारे वो किसी भी कीमत पर शिवसेना को इस मामले में आगे बढ़ने नहीं दे सकती.

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