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'सामना' के जरिए शिवसेना का केंद्र पर हमला, कहा- ईडी, सीबीआई को सीमा पर भेजो!

इसी साल सितंबर महीने में तीन कृषि बिलों को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी है. (सांकेतिक तस्वीर)
इसी साल सितंबर महीने में तीन कृषि बिलों को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी है. (सांकेतिक तस्वीर)

सामना के लेख में बताया गया है कि ब्रिटिशों के खिलाफ उनके द्वारा किया गया साराबंदी आंदोलन और बारडोली सत्याग्रह निर्णायक साबित हुआ. लेकिन दिल्ली की सीमा पर और देश की सीमा पर जो कुछ चल रहा है, उसके कारण फौलादी पुरुष की प्रतिमा की आंखें भी नम हो गई होंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 11:22 PM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानून के विरोध में किसान सड़क पर उतर आए हैं. किसानों के इस तरह किए जा रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए शिवसेना के मुखपत्र सामना में लेख के जरिए केंद्र सरकार पर हमला किया गया है. सामना के लेख में बताया गया है कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, जिनकी अतिभव्य फौलादी प्रतिमा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात में स्थापित की है. ब्रिटिशों के खिलाफ उनके द्वारा किया गया साराबंदी आंदोलन और बारडोली सत्याग्रह निर्णायक साबित हुआ. किसानों का आंदोलन खड़ा करके उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी को नाकों चने चबवा दिए.लेकिन दिल्ली की सीमा पर और देश की सीमा पर जो कुछ चल रहा है, उसके कारण फौलादी पुरुष की प्रतिमा की आंखें भी नम हो गई होंगी.

चीन के सैनिक जिस समय लद्दाख सीमा में घुस आए हैं, उसी समय पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली की सीमा पर रोक दिया गया है. सिर्फ रोक ही नहीं दिया गया है, बल्कि उन पर बल प्रयोग और साम, दाम, दंड, भेद का भी प्रयोग किया जा रहा है. केंद्र सरकार के नए कृषि कानून के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान आंदोलन कर रहे हैं.किसानों को दिल्ली के रामलीला मैदान जाना है. लेकिन केंद्र ने लाठी चार्ज और ठंडे पानी के फव्वारे फेंकने के अलावा आंसू गैस के गोले फेंककर उन्हें रोकने का प्रयास किया है.

कड़ाके की ठंड में अल-सुबह किसानों पर ठंडे पानी के फव्वारे छोड़ना अमानवीयता है. फिर भी किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. किसान इतने आक्रामक और जिद्दी कभी नहीं हुए थे. अब किसान सुन नहीं रहे और केंद्र सरकार के विरोध में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ हंगामा कर रहे हैं. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बेतुका बयान दिया है कि किसानों के आंदोलन में खालिस्तानवादी घुस गए हैं मतलब किसानों का आंदोलन देशद्रोही है.हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनकड ने तो ऐसा दावा किया कि किसानों के आंदोलन में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा दिया गया.अउन्होंने ऐसी क्लिप भी जारी की.
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भाजपा एक बार फिर खालिस्तान का मामला कुरेद रही
भारतीय जनता पार्टी का कदम देश के माहौल को बिगाड़ने वाला ही नहीं, बल्कि अराजकता को निमंत्रण देने वाला भी है.खालिस्तान का मुद्दा समाप्त हो चुका है.उस अंधे युग से बाहर निकलने के लिए इंदिरा गांधी और जनरल अरुण कुमार वैद्य ने अपने प्राणों की आहुति दे दी. लेकिन खालिस्तान का मामला भाजपा वाले आज फिर से कुरेद रहे हैं और उसकी चिंगारी भड़का कर पंजाब में अपनी राजनीति शुरू करना चाहते हैं. पंजाब की ये चिंगारी फिर से भड़क उठी तो यह देश को भारी पड़ेगा.

किसानों पर दंगे के मुकदमे दाखिल किए गए हैं
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पाकिस्तान जिंदाबाद, स्वतंत्रता और आजादी के नारे दिए जाने के जब सबूत सामने आए, तब उसमें ये आरोप झूठे साबित हुए. अपने ही लोगों का मेकअप करके वहां घुसाना और ऐसे कृत्य करवाना, इससे देश की एकता, शांति और अखंडता ध्वस्त होती रहती है. किसान दिल्ली की सीमा पर रुके हुए हैं और वे अपनी मांगों को लेकर लड़ रहे हैं. वे पंजाब के हैं इसलिए उन्हें देशद्रोही और खालिस्तानवादी साबित करने का विचार मानसिक दरिद्रता का लक्षण है. किसानों पर दंगे के मुकदमे दाखिल किए गए हैं. उन पर हत्या और हत्या का प्रयास जैसे आरोप लगाए गए हैं.

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किसानों को दिल्ली में घुसने नहीं दिया जा रहा पर चीन सरहद पार कर चुका है
इसी दौरान एक वृद्ध अन्नदाता किसान पर लाठी चलाकर उन्हें रक्तरंजित करती एक तस्वीर प्रकाशित हुई है.वह देखकर सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा अमदाबाद में सच में आंसू बहा रही होगी.वे भी सरदार ही थे. सिख बंधुओं को भी ‘सरदार’ कहा जाता है.सरदारों पर तब भी अन्याय हुआ और आज भी अन्याय हो रहा है. यहां अपने ही किसानों को दिल्ली में नहीं घुसने दिया जा रहा और वहां सीमा पर चीन के सैनिक हमारी हद में घुस आए और ताल ठोंककर बैठे हैं. किसानों पर जो फव्वारे मारे जा रहे हैं या आंसू गैस के गोले फेंककर किसानों को मारा जा रहा है. ऐसा बल प्रयोग लद्दाख या जम्मू-कश्मीर में नहीं होता, इस पर आश्चर्य होता है.

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सीमा में घुसी चीनी सेना को हटाने की खबर क​ब मिलेगी
चीन को माकूल जवाब देने के लिए लद्दाख के पैंगांग क्षेत्र में अब मरीन कमांडो तैनात कर दिए गए हैं. उसके पहले गरुड़ सेना और पैरा स्पेशल फोर्स भी है. अब उनके साथ मरीन कमांडो की तैनाती किए जाने से सैन्य कार्रवाई को मजबूती मिलने वाली है, यह सब हम साल भर से सुनते आ रहे हैं. लेकिन घुसी हुई सेना को बल प्रयोग करके हटानेवाले शौर्य की खबर देशवासियों को अब तक सुनने को नहीं मिल पाई है. श्रीनगर और कश्मीर घाटी में जवानों की शहादत हो रही है. गत महीने भर में महाराष्ट्र के 11 सुपुत्र देश के लिए बलिदान हो गए. देश के लिए बलिदान देना व त्याग करना छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र की परंपरा ही है. सत्ताधीश ऐसे कितने बलिदान देनेवाले हैं?

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राजनीतिक विरोधियों पर हावी होना चाहती है बीजेपी
महाराष्ट्र सहित देशभर में राजनीतिक विरोधियों पर हावी होने के लिए भाजपा सरकार हर प्रकार के हथकंडे अपना रही है. फिर वही ताकत देश के दुश्मनों से लड़ते समय क्यों नहीं दिखती? लद्दाख और कश्मीर के दुश्मनों से हमारी सेना लड़ रही है. लेकिन उनके साथ सरकार को अपनी ईडी और सीबीआई जैसी यंत्रणा को भी चीन और पाकिस्तान के विरोध में खड़ा करना चाहिए, नहीं तो आजकल देश के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई की जांच को हथियार के रूप में प्रयोग किया ही जा रहा है. ऐसे में इन यंत्रणाओं को चीन और पाकिस्तान की भी सुपारी देने में कोई हर्ज नहीं है. हो सकता है इससे चीन और पाकिस्तान घुटने टेककर शरण आ जाए. इससे लद्दाख में घुसे हुए चीनी शरणागत आएंगे और पाक भी ‘पीओके’ छोड़कर भाग जाएंगे.
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