शिवसेना ने मुखपत्र 'सामना' में जम्मू-कश्मीर के हालात पर उठाए सवाल, कहा- कंगना को दिखानी चाहिए नाराजगी

उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)

'सामना' (Saamna) में प्रकाशित संपादकीय में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) के बयान की निंदा की है. गौरतलब है कि श्रीनगर के लाल चौक (Lal Chowk) पर तिरंगा (Tricolor) फहराने के चलते पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. शिवसेना ने केंद्र पर भी सवालिया निशान लगाए.

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  • Last Updated: October 28, 2020, 4:58 PM IST
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मुंबई. खुद को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के भाजपा कार्यकर्ता बता रहे तीन युवकों ने सोमवार को श्रीनगर के लाल चौक पर जब तिरंगा फहराने की कोशिश की तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया था. इसपर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए सवाल उठाए हैं. इसके अलावा शिवसेना ने इशारों-इशारों में एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) पर भी निशाना साधा है.

'आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या बदला'
शिवसेना ने बुधवार को सवाल किया कि अनुच्छेद-370 (Article-370) के ज्यादातर प्रावधान निरस्त किए जाने के बावजूद श्रीनगर के लाल चौक पर कुछ युवकों को राष्ट्रीय ध्वज फहराने से क्यों रोका गया? शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में पूछा कि अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में क्या बदलाव आया है? पार्टी ने साथ ही कहा कि ‘हिन्दुत्व का मतलब राष्ट्रवाद है.’

कंगना रनौत को बताया नकली मर्दानी
शिवसेना (Shivsena) के मुखपत्र ने अभिनेत्री कंगना रनौत का नाम लिए बिना लिखा, ‘नकली मर्दानी जिसने मुंबई को पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर कहा, उसको केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा मुहैया कराई गई, जबकि जो युवक कश्मीर में तिरंगा फहरा रहे थे, उन्हें पुलिस अपने साथ ले गई.’ सामना ने लिखा, ‘देश जानना चाहता है कि युवा क्यों लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहरा सकते हैं? इसका मतलब है कि कश्मीर में हालात नहीं सुधरे हैं.’



संपादकीय में कहा गया कि मुंबई में तिरंगा फहराया जाता है, इसका मतलब है कि यह ‘पाकिस्तान नहीं है.’ साथ ही लिखा, ‘तिरंगे का अपमान वहां होता है जहां पर पाकिस्तानी हस्तक्षेप है.’



'कंगना को यहां दिखानी चाहिए नाराजगी'
सामना ने कंगना का नाम लिए बिना कहा कि कश्मीर में तिरंगा नहीं फहराने देने पर अभिनेत्री को अपनी नाराजगी जाहिर करनी चाहिए. कंगना ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से की थी, जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया था.

महबूबा के बयान की निंदा
संपादकीय में दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश में अनुच्छेद-370 को बहाल करने के लिए चीन की मदद लेने की बात कही थी. ‘सामना’ ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के बयान की भी निंदा की. मुखपत्र ने कहा, ‘यह देशद्रोह है.’ हालांकि, नेशनल कांफ्रेस ने सोमवार को कहा था कि पार्टी अध्यक्ष ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है.

शिवसेना ने दावा किया कि अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान निरस्त किए जाने के करीब एक साल बाद भी कश्मीर में एक रुपये का निवेश नहीं आया और बेरोजगार युवक एक बार फिर हथियार उठा रहे हैं और स्थानीय नेता उन्हें भ्रमित कर रहे हैं.
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