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दिल्ली हिंसा पर शिवसेना ने केंद्र को घेरा, कहा-इस पर किससे इस्तीफा मांगोगे ममता, उद्धव या जो बाइडन

संजय राउत ने कहा, अगर सरकार चाहती तो आजकी हिंसा रोक सकती थी.  (File pic)
संजय राउत ने कहा, अगर सरकार चाहती तो आजकी हिंसा रोक सकती थी. (File pic)

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि कानून लोगों के लिए बनाए जाते हैं, अगर लोग खुश नहीं हैं तो ये कानून किसके लिए है? आज हुई हिंसा का जिम्‍मेदार कौन है? उन्‍होंने कहा कि यदि कोई और सरकार होती तो उससे तुरंत इस्‍तीफा मांगा जाता, कानून व्‍यवस्‍था कौन देख रहा है? उन्‍होंने सत्‍तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए कहा कि अब ममता बैनर्जी या उद्धव ठाकरे का इस्‍तीफा मांगें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 26, 2021, 8:06 PM IST
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मुंबई. दिल्ली में किसानों के आंदोलन में हुई हिंसा पर अब राजनीतिक दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. शिवसेना ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा सरकार की विफलता है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि कानून लोगों के लिए बनाए जाते हैं, अगर लोग खुश नहीं हैं तो ये कानून किसके लिए हैं? आज हुई हिंसा का जिम्‍मेदार कौन है? उन्‍होंने कहा कि यदि कोई और सरकार होती तो उससे तुरंत इस्‍तीफा मांगा जाता, कानून व्‍यवस्‍था कौन देख रहा है? उन्‍होंने सत्‍तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए कहा कि अब ममता बनर्जी या उद्धव ठाकरे का इस्‍तीफा मांगें.

राउत ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'दिल्ली में कानून-व्यवस्था बाधित हो गई है. यह सरकार की विफलता है. इस अराजकता के लिए, दिल्ली में कदम उठाए गए. वो किससे इस्तीफा मांगेंगे? सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, शरद पवार या जो बाइडन? इस मामले पर इस्तीफा ... इस्तीफा दिया जाता है साहब ...'





शिवसेना सांसद संजय राउत ने मंगलवार को कहा है कि हम किसानों की मांग के साथ हैं और शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करते हैं, लेकिन दिल्‍ली में हुई हिंसा की निंदा करते हैं.' उन्‍होंने कहा कि यदि किसान नेताओं ने सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का वादा किया था तो उसे पूरा करना चाहिए था.' संजय राउत ने कहा, 'आज दिल्‍ली की सड़कों पर जो दृश्‍य देखने को मिला वह न तो आंदोलनकारियों को शोभा देता है और न ही सरकार को. दो महीनों से चला आ रहा किसानों का आंदोलन, लेकिन अचानक क्‍या हो गया? ऐसा आंदोलन तो विश्‍व में कहीं नहीं हुआ था. क्‍या सरकार इस दिन का इंतजार कर रही थी, क्‍या सरकार किसानों के सब्र का बांध टूटने का इंतजार कर रही थी?'
संजय राउत ने कहा कि मुंबई के आजाद मैदान पर प्रदेश भर के हजारों किसान आए थे, लेकिन माहौल खराब नहीं होने दिया गया. पर दिल्‍ली में शायद इमरजेंसी का माहौल बनाना चाहते हों. यही प्रयास पिछले साल शाहीन बाग में हुआ था. उन्‍होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद गिरी थी तब भी पुलिस को आश्‍वस्‍त किया था. उन्‍होंने कहा कि क्या सरकार इसी दिन का बेसब्री से इंतजार कर रही थी? संजय राउत ने अपने ट्विटर अकांउट के माध्‍यम से कहा कि सरकार ने आखिर तक लाखों किसानों की बात क्‍यों नहीं सुनी. ये किस टाइप का लोकतंत्र हमारे देश में पनप रहा है? ये लोकतंत्र नहीं है भाई... कुछ और ही चल रहा है.
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