जया के साथ खड़ी शिवसेना कभी उनके एक बयान पर हो गई थी आगबबूला, किया था बायकॉट

जया के साथ खड़ी शिवसेना कभी उनके एक बयान पर हो गई थी आगबबूला, किया था बायकॉट
जया बच्चन ने बिना नाम लिए कहा, 'फिल्म उद्योग में लगे हुए लोग सोशल मीडिया के जरिए भड़क रहे हैं. इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने वाले लोगों ने इसे गटर कहा है. मैं पूरी तरह से असहमत हूं. मुझे उम्मीद है कि सरकार ऐसे लोगों को इस तरह की भाषा का उपयोग नहीं करने के लिए कहेगी.' (स्क्रीनग्रैब, राज्यसभा)

यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि एक दौर ऐसा भी था जब शिवसेना (Shiv Sena) और जया आमने-सामने आ गये थे. 12 साल पहले जया बच्चन का उत्तर भारतीयों के हिंदी (Hindi) में बोलने की वकालत करने पर शिवसेना और मनसे (MNS) ने बहुत हो हल्ला किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 16, 2020, 4:16 PM IST
  • Share this:
मुंबई. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत के मामले में ड्रग्स (Drugs) का एंगल सामने आने के बाद से बॉलीवुड (Bollywood) ही नहीं राजनीति में भी एक भूचाल मचा हुआ है. मानसून सत्र के दौरान इसकी गूंज संसद (Parliament) में भी सुनी गई. राज्यसभा में इस मसले पर बोलते हुए जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग मनोरंजन जगत (Entertainment Industry) को गंदा कर रहे हैं. ये लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं. जया बच्चन के इस बयान पर महाराष्ट्र (Maharashtra) की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना (Shiv Sena) ने भी खुशी जताई है.

शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इस बयान के लिए जया बच्चन (Jaya Bachchan) की तारीफ की है और कहा है कि वे बेबाकी और सच बोलने के लिए चर्चित हैं. बयान को लेकर जया की खुलकर तारीफ की गई है और कहा गया है कि वे अपने राजनीतिक और सामाजिक विचारों (Political and Social Thoughts) को कभी छुपाकर नहीं रखतीं. महिलाओं (Women) पर अत्याचार के संदर्भ में उन्होंने संसद (Parliament) में भावुक होकर आवाज उठाई है. ऐसे समय में जब सिनेमा जगत (Bollywood) को बदनाम किया जा रहा है तो जया बच्चन सामने आई हैं.

वैसे यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि एक दौर ऐसा भी था जब शिवसेना (Shiv Sena) और जया आमने-सामने आ गये थे. 12 साल पहले जया बच्चन का उत्तर भारतीयों के हिंदी (Hindi) में बोलने की वकालत करने पर शिवसेना और मनसे (MNS) ने बहुत हो हल्ला किया था. मनसे के राज ठाकरे ने तो उन्हें 'गुड्डी बुड्ढी' तक बोला था. उस समय संजय राउत (Sanjay Raut) ने यह बयान दिया था कि महाराष्ट्र की जनता ऐसी भाषा को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी. मनसे और शिवसेना दोनों ने ही जया बच्चन से माफी मांगने के लिए कहा था.



मनसे की ओर से पूरे बच्चन परिवार की फिल्मों के लिए दिया गया था बायकॉट का आदेश
2008 में अभिषेक बच्चन की फिल्म 'द्रोण' के प्रोमो लॉन्चिंग के दौरान यह विवाद उभरा था. इस कार्यक्रम में जया शामिल थीं. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था, "हम यूपी के लोग हैं, हमें हिंदी में बात करनी चाहिए." इसे लेकर शिवसेना और मनसे ने कड़ी आपत्ति की थी. मनसे की ओर से बच्चन परिवार के सभी सदस्यों की फिल्मों का बायकॉट करने का ऐलान किया गया था. उन्होंने कहा था कि यह बायकॉट जया के माफी मांगने तक नहीं हटेगा.

राज ठाकरे ने उन्हें यूपी शिफ्ट होने की सलाह दी थी और एक मनसे कार्यकर्ता ने उनका फर्स्ट क्लास का टिकट भी कटवा दिया था. मनसे का कहना था कि महाराष्ट्र में रहने के लिए उन्हें मराठी सीखनी ही पड़ेगी. राज ठाकरे ने एक बयान में यह तक कह दिया था, "गुड्डी बुड्ढी हो गई लेकिन अक्ल नहीं आई." इसी दौरान अभिषेक के ऐड वाले बोर्ड और पोस्टर्स उखाड़े जाने लगे थे और उन पर कालिख पोती गई थी.

अमिताभ बच्चन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मांगी थी माफी
हालांकि इस बाबत जया से सवाल पूछे जाने पर उन्होंने भी तेवर कड़े करते हुए कहा था कि राज ठाकरे कौन हैं, मैं नहीं जानती. जया ने कहा था कि मैं सिर्फ एक ठाकरे को जानती हूं, वो बाल ठाकरे हैं. वो मेरे पिता के समान हैं और उनके बेटे उद्धव को भी जानती हूं, इसके अलावा मैं किसी और ठाकरे को नहीं जानती.

यह भी पढ़ें: रिया की बचपन की दोस्त निकलीं श्रुति मोदी, सुशांत ने दबाव में बनाया था मैनेजर

हालांकि जब यह विवाद ज्यादा बढ़ा तो पहले अमिताभ ने एक ब्लॉग लिख माफी मांगी थी. हालांकि इस माफी को मनसे से स्वीकार नहीं किया था, जिसके बाद अमिताभ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर माफी मांगी थी. तब राज ठाकरे ने यह कहते हुए माफी को स्वीकार कर लिया था कि अमिताभ बच्चन परिवार के हेड हैं. हालांकि फिर भी उन्होंने जया को निशाने पर लेते हुए उन्हें सलाह दी थी कि उन्हें सिर्फ लिखे संवाद ही पढ़ने चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज