पूर्व दस्यु मलखान सिंह बोले 'मैं डकैत नहीं बागी, असली डकैतों को सत्ता से करूंगा बाहर'

मलखान सिंह (file photo)
मलखान सिंह (file photo)

चाचा शिवपाल यादव ने चंबल के डकैत रहे मलखान सिंह को तो भतीजे अखिलेश ने ददुआ के बेटे को दी है लोकसभा टिकट

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चाचा शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की ओर से यूपी की धौरहरा सीट पर पूर्व दस्यु मलखान सिंह को प्रत्याशी बनाया है तो भतीजे अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की टिकट पर ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट से चुनावी मैदान में उतार दिया है. दोनों सीटों पर पांचवें चरण में 6 मई को वोटिंग होगी. न्यूज18हिंदी से बातचीत में मलखान सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य चोरों और असली डकैतों को सत्ता से बाहर करना है. मैं डकैत नहीं बागी था.

मलखान सिंह वह अन्याय और महिला अस्मिता के मसलों को लेकर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने धौरहरा से 2009 में कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद के लिए चुनाव प्रचार किया था. वो बांदा से कांग्रेस की टिकट चाहते थे. इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और यूपी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर से मिले थे लेकिन टिकट नहीं मिली. फिर उन्होंने शिवपाल यादव की पार्टी से टिकट ले ली. पूछने पर कहते हैं कि मैं जरूर जीतूंगा और सारे चोर हारेंगे. (ये भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव 2019: पांचवें चरण में होगी बीजेपी, कांग्रेस की बड़ी परीक्षा, जीती सीटें बचाने की चुनौती!)

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मलखान सिंह चंबल के बड़े बागियों में गिने जाते थे. मध्य प्रदेश के रहन वाले मलखान का 70 के दशक में चंबल में सिक्का चलता था. अब चुनावी मैदान उतरकर नेताओं को धौरहरा में नेताओं को चुनौती दे रहे हैं. 1982 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने उन्होंने आत्मसमर्पण किया था. लोकसभा चुनाव के लिए दिए गए एफिडेविड के मुताबिक वे 76 साल के हो चुके हैं.
ये तो चाचा शिवपाल की पार्टी से टिकट पाने वाले मलखान सिंह की बात. अब जरा भतीजे अखिलेश यादव की पार्टी की बात करें. अखिलेश ने बीहड़ दस्यु ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट से टिकट दी है. वीर सिंह यूपी के चित्रकूट निवासी हैं. वीर सिंह चित्रकूट जिले की कर्वी सदर सीट से विधायक रह चुके हैं. इससे पहले वो साल 2000 में चित्रकूट जिला पंचायत का निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे. अब समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर उन पर विश्वास करते हुए लोकसभा की टिकट दे दी है.

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ददुआ ने तीन दशक तक बीहड़ में अपना साम्राज्य चलाया था. राजनीति में भी वो अपनी पकड़ बनाए हुए था. जुलाई 2007 में एसटीएफ ने मुठभेड़ में उसे मार दिया. इसके बाद उसका परिवार सक्रिय राजनीति में आया. उसके छोटे भाई बालकुमार 2009 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर सीट से सांसद बने. यही नहीं बालकुमार का बेटा राम सिंह पटेल 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रतापगढ़ जिले की पट्टी सीट से विधायक निर्वाचित हुआ.

राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई का कहना है कि आत्समर्पण के बाद मलखान सिंह ने खुद को सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाला बताया. उन्होंने चुनाव कई लड़े हैं लेकिन सफलता नहीं मिली. देखना ये है कि इस बार वे सफल होते हैं या नहीं. जबकि ददुआ के बेटे वीर सिंह पहले से ही राजनीति में सफल हैं.

 

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