Assembly Banner 2021

शिवसेना ने उठाया बेलगाम में मराठी भाषी लोगों के प्रताड़ित होने का मामला

शिवसेना ने भाजपा और महाराष्ट्र के कुछ अधिकारियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया

शिवसेना ने भाजपा और महाराष्ट्र के कुछ अधिकारियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया

शिवसेना ने कहा है कि यदि बेलगाम में मराठी भाषियों पर अत्‍याचार नहीं रुकते हैं तो केंद्र सरकार को उसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए. अपने मुखमत्र सामना में पार्टी ने आरोप लगाया है कि बेलगाम में हाल ही में कन्नड़ समर्थक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मराठी भाषा बोलने वालों को पीटा, दुकानों पर मराठी भाषा में लगे बोर्ड हटा दिए और मराठी समर्थक लोगों को सोशल मीडिया पर भी निशाना बनाया जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 16, 2021, 5:47 PM IST
  • Share this:
मुंबई. शिवसेना ने मंगलवार को बेलगाम में कन्नड़ समर्थक संगठनों के मराठी भाषी लोगों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए उसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की मांग की. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में आरोप लगाया कि बेलगाम में हाल ही में कन्नड़ समर्थक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मराठी भाषा बोलने वालों को पीटा, दुकानों पर मराठी भाषा में लगे बोर्ड हटा दिए और मराठी समर्थक लोगों को सोशल मीडिया पर भी निशाना बनाया जा रहा है.

उसने दावा किया कि कर्नाटक की पुलिस भी मराठी लोगों को परेशान कर रही है. उसने कहा, ‘‘अगर अत्याचार नहीं रुकने वाला, तो केंद्र को बेलगाम को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर देना चाहिए.’’ महाराष्ट्र का कहना है कि बेलगाम, कारवार और निपानी सहित कर्नाटक के कई क्षेत्रों की अधिकतर आबादी मराठी बोलती है.

ये भी पढ़ें :- बंगाल चुनाव में नहीं उतरेगी शिवसेना, TMC को समर्थन दे ममता बनर्जी को बताया 'असली शेरनी'



दोनों राज्यों के बीच बेलगाम और अन्य सीमावर्ती इलाकों को लेकर विवाद से जुड़ा मामला कई वर्ष से उच्चतम न्यायालय में लंबित है. मुखपत्र ‘सामना’ के सम्पादकीय में महाराष्ट्र में भाजपा के नेता देवेन्द्र फडणवीस से यह मामला केन्द्र और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का अनुरोध भी किया गया.
ये भी पढ़ें :- कंगना रनौत पहुंचीं SC, कहा- शिवसेना से जान का खतरा, केस को हिमाचल ट्रांसफर करें

संपादकीय में कहा कि मराठी लोग मध्य प्रदेश के इंदौर और गुजरात के वडोदरा में भी हैं, लेकिन वहां स्थानीय लोगों से उनका कभी कोई विवाद नहीं हुआ. उसने कहा कि महाराष्ट्र में भी कई वर्षों से विभिन्न भाषाएं बोलने वाले लोग रहते है और मराठी लोगों ने उनके साथ कभी दुर्व्यवहार नहीं किया.

शिवसेना ने आरोप लगाया, ‘‘ कर्नाटक में भाजपा सरकार जिस तरह से स्थानीय लोगों द्वारा मराठी समुदाय पर किए जा रहे अत्याचार के मामले से निपट रही है, उससे लगता है कि वह असामाजिक तत्वों को बढ़ावा दे रही है.’’ सामना के संपादकीय में कहा गया कि सीमा विवाद के मामले उच्चतम न्यायालय में लंबित होने के दौरान मराठी बोलने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार ‘‘गैरकानूनी’’ है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज