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सुप्रीम कोर्ट से उद्धव गुट को झटका, असली शिवसेना कौन? अब चुनाव आयोग ले सकेगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट में असली शिवसेना संबंधी मामले को लेकर उद्धव गुट को झटका लगा है.

सुप्रीम कोर्ट में असली शिवसेना संबंधी मामले को लेकर उद्धव गुट को झटका लगा है.

असली शिवसेना कौन है, शिंदे गुट की इस याचिका पर चुनाव आयोग फ़ैसला ले सकेगा. चुनाव आयोग के फ़ैसला लेने पर सुप्रीम कोर्ट ( ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

असली शिवसेना कौन है, इस पर चुनाव आयोग ले सकेगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उद्धव गुट की याचिका को किया खारिज
शिंदे गुट की याचिका पर राष्‍ट्रीय चुनाव आयोग करेगा फ़ैसला

नई दिल्‍ली. असली शिवसेना (Shiv Sena) कौन है, शिंदे गुट की इस याचिका पर चुनाव आयोग फ़ैसला ले सकेगा. चुनाव आयोग के फ़ैसला लेने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ (Constitution Bench) ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने उद्धव गुट की अर्ज़ी को ख़ारिज करते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया है. उद्धव गुट ने चुनाव आयोग के फ़ैसला लेने पर रोक लगाने का अनुरोध किया था. उच्चतम न्यायालय की एक संविधान पीठ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निर्वाचन आयोग को ‘असली’ शिवसेना को लेकर शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे के दावे पर निर्णय लेने से रोकने का अनुरोध किया गया था.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग अपना फैसला दे सकता है, यह झटके का सवाल नहीं है. उन्होंने कहा कि अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मामला जारी रहेगा. हालांकि इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने गत 23 अगस्त को शिवसेना और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से दाखिल उन याचिकाओं को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेज दिया था, जिनमें दलबदल, विलय और अयोग्यता से जुड़े कई संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं. इसने निर्वाचन आयोग से शिंदे खेमे की याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं करने के लिए कहा था जिसमें कहा गया था कि उसे ‘असली’ शिवसेना माना जाए और पार्टी का चुनाव चिह्न दिया जाए.

याचिकाएं संविधान की 10वीं अनुसूची से जुड़े कई अहम संवैधानिक मुद्दों को उठाती हैं

पीठ ने कहा था कि याचिकाएं संविधान की 10वीं अनुसूची से जुड़े कई अहम संवैधानिक मुद्दों को उठाती हैं, जिनमें अयोग्यता, अध्यक्ष एवं राज्यपाल की शक्तियां और न्यायिक समीक्षा शामिल है. संविधान की 10वीं अनुसूची में निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के उनके राजनीतिक दलों से दलबदल की रोकथाम का प्रावधान है और इसमें दलबदल के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं. ठाकरे खेमे ने पहले कहा था कि शिंदे के प्रति निष्ठा रखने वाले पार्टी विधायक किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय करके ही संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से खुद को बचा सकते हैं. शिंदे खेमे ने दलील दी थी कि दलबदल रोधी कानून उस नेता के लिए कोई आधार नहीं है जिसने अपनी ही पार्टी का विश्वास खो दिया है.

Tags: Shiv sena, Supreme Court

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