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बेटे को जिताने के चक्कर में फंस न जाएं सिद्धारमैया!

बेटे को जिताने के चक्कर में फंस न जाएं सिद्धारमैया!

सिद्धारमैया (फाइल फोटो)

सिद्धारमैया (फाइल फोटो)

कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं के मुताबिक यहां के लोग सिद्धारमैया से खुश नहीं है. कहा जा रहा है कि वो अपने बेटे को जीताने के चक्कर में फंस गए हैं.

    डीपी सतीश

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पिछले पांच दिनों से अपने गृह नगर मैसूर के दौरे पर थे. दौरे के आखिरी दिन उन्होंने चामुंडेश्वरी निर्वाचन क्षेत्र में कई गांवों का दौरा किया. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वो अपनी पुरानी सीट चामुंडेश्वरी से चुनाव लड़ने वाले हैं. सिद्धारमैया पिछली बार वरुणा से जीते थे लेकिन इस बार यहां से उनका बेटा डॉक्टर यथेन्द्र चुनाव लड़ने वाले हैं. चामुंडेश्वरी क्षेत्र के लोग सिद्धारमैया की उम्मीदवारी पर चुप हैं. यहां के कुछ लोग कह रहे हैं कि सिद्धारमैया ने उनके गांव के लिए कुछ खास नहीं किया.

    सिद्धारमैया ने लोगों को ये दलील दी कि यहां के मौजूदा जेडीएस विधायक जीटी देवगौड़ा की ये गलती है कि इस क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ है. लेकिन यहां के आमलोगों ने उन्हें ये कहते हुए चुप करा दिया कि मुख्यमंत्री होने के नाते वो विकास कार्य के लिए फंड जारी कर सकते थे.

    कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं के मुताबिक, यहां के लोग सिद्धारमैया से खुश नहीं है. कहा जा रहा है कि वो अपने बेटे को जिताने के चक्कर में फंस गए हैं. वो ये नहीं चाहते हैं कि उनके बेटे को जीतने में कोई दिक्कत हो. वरुणा सीट पर सिद्धारमैया की जीत पक्की थी. लेकिन चामुंडेश्वरी सीट पर लड़ने का फैसला कर उन्होंने जोखिम उठा लिया है.

    चामुंडेश्वरी से सिद्धारमैया को 1983 से 2008 के बीच अब तक पांच बार जीत मिली है. पहली बार उन्हें एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत मिली थी. दूसरी बार जनता पार्टी से, तीसरी बार जनता दल से, चौथी बार उन्हें जेडीएस से और पिछली बार उन्हें कांग्रेस के टिकट पर जीत मिली थी. निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन के बाद सिद्धारमैया रणनीति के तहत वरुणा सीट से चुनाव लड़ने लगे. यहां कांग्रेस की टिकट पर उन्हें दो बार जीत मिली चामुंडेश्वरी के मौजूदा विधायक जीटी देवगौड़ा मैसूर जिले में एक ताकतवर नेता हैं. पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा अपने कभी शिष्य रहे सिद्धारमैया को हराने के लिए लगातार खास रणनीति पर काम कर रहे हैं.

    न्यूज 18 से बात करते हुए गौड़ा ने कहा "सिद्धारमैया सत्ता के नशे में डूबे है. वो अभिमानी हैं. वो मेरी पार्टी को गाली दे रहे रहे हैं. चामुंडेश्वरी के मतदाता ये बर्दाश्त नहीं करेंगे. वो उन्हें जरूर हराएंगे.''

    बीजेपी इस सीट पर ज्यादा मजबूत नहीं है उन्हें एक अच्छे उम्मीदवार की तलाश है जो सिद्धारमैया को चुनौती दे सके. चामुंडेश्वरी के कांग्रेसी कार्यकर्ता ये आरोप लगा रहे हैं कि सिद्धारमैया को हराने के लिए जेडीएस के साथ बीजेपी ने डील की है. मुख्यमंत्री ने खुद कहा है कि चामुंडेश्वरी में उन्हें हारने के लिए बीजेपी ने जेडीएस से हाथ मिला लिया है.

    चामुंडेश्वरी में 72,000 वोक्कालिंगा और 30,000 लिंगायत के वोट हैं. पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के एक लाख से ज्यादा वोट हैं. सिद्धारमैया को सभी जातियों और धर्मों से वोट मिलने का पूरा भरोसा है. उन्होंने न्यूज़ 18 को बताया कि बीजेपी की जाति की राजनीति यहां काम नहीं करेगी क्योंकि मतदाताता उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं न कि कुरुबा या ओबीसी के रूप में.

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता एच विश्वनाथ जो इन दिनों जेडीएस में है उनका मानना है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए इस बार चुनौती आसान नहीं होगी.

    एक और वरिष्ठ दलित नेता वी श्रीनिवास प्रसाद जो हाल ही में सिद्धारमैया के साथ झड़प के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे उन्होंने कहा '' ने इस बार मैंने उन्हें हराने की कसम खाई है. सिद्धारमैया ने मुझे अपमानित करके सभी दलितों का अपमान किया है. हम उन्हें सबक सिखाना होगा."

    सिद्धारमैया इस बार अपनी जीत के लिए सेंटिमेंटल कार्ड भी खेल रहे हैं. वो लोगों को कह रहे हैं कि उनका ये आखिरी चुनाव है ऐसे में लोग उनका समर्थन करें.

    Tags: Karnataka assembly election

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