CCD बोर्ड मेंबर ने किया खुलासा, आयकर विभाग के इस कदम से दुखी थे सिद्धार्थ

आयकर विभाग ने बताया है कि सिद्धार्थ को माइंडट्री को बेचने से 3,200 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन उन्होंने इस डील पर बनने वाले मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) के 300 करोड़ टैक्स में से सिर्फ 46 करोड़ ही चुकाए थे.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 6:55 PM IST
CCD बोर्ड मेंबर ने किया खुलासा, आयकर विभाग के इस कदम से दुखी थे सिद्धार्थ
भारत की सबसे बड़ी कॉफी चेन 'कैफे कॉफी डे' के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ अचानक से लापता हो गए हैं (फाइल फोटो)
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Updated: July 30, 2019, 6:55 PM IST
भारत की सबसे बड़ी कॉफी रेस्तरा चेन 'कैफे कॉफी डे' के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ, जिनके पास एशिया की सबसे बड़ी कॉफी स्टेट भी है सोमवार सुबह से मंगलुरु से गायब हैं. इससे पहले की रात वह बेंगलुरु जाने के लिए मंगलुरु से रवाना हुए थे. सिद्धार्थ, जो कि एक बिजनेस ट्रिप के लिए सकलेशपुर के रास्ते में थे, उन्हें आखिरी बार नेत्रावती नदी पर बने उलाल पुल पर देखा गया था.

कथित तौर पर सिद्धार्थ के लिखे एक पत्र में उन्होंने लिखा है कि वो अपनी भरपूर कोशिशों के बावजूद ठीक फायदा देने वाला बिजनेस मॉडल बनाने में असफल रहे हैं. यह पत्र उन्होंने कंपनी के बोर्ड मेंबर्स और अपनी सीसीडी फैमिली के नाम लिखा था. इस पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि मैं यह भी कहना चाहूंगा कि मैंने इसे सब कुछ दिया. मैं बहुत दुखी हूं कि मैंने अपने सारे लोगों को नीचा देखने को मजबूर किया, जिन्होंने मुझमें विश्वास जताया. मैंने लंबे वक्त तक लड़ता रहा लेकिन आज मैंने हार मान ली है कि मैं एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर की ओर से इससे ज्यादा दबाव नहीं झेल सकता, जो कि मुझे शेयर्स फिर से खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है..."

न्यूज18 के साथ बातचीत में नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बोर्ड के एक सदस्य ने इस पूरे मामले से जुड़ी जो बातें बताईं, वे ये हैं-

जो कुछ हुआ उसका पहले से कोई अंदेशा था?

उनकी ओर से इस तरह का कोई भी अंदेशा नहीं था. बल्कि अगर आप कैफे कॉफी डे इंटरप्राइज की असली बैलेंस सीट को देखें तो पाएंगे कि जबसे सिद्धार्थ ने माइंडट्री के शेयर्स बेचे, कर्जे का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है. (उन्होंने कंसल्टेंसी फर्म माइंडट्री में अपना पूरा 20% इक्विटी का हिस्सा इंजीनियरिंग और कंसल्टेंसी कंपनी लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड को पिछले साल 3,300 करोड़ रुपये में बेच दिया था). 2015 में बड़ा हिस्सा जो कि IPO में रहा, वह कर्जे को कम करने में चला गया था. धीरे-धीरे, इन माइंडट्री के शेयर्स को भी इसी में लगा दिया गया था.

अगर आप रेटिंग एजेंसियों की दी गई डीटेल्स पर ध्यान दें तो कुल 250 करोड़ के नॉन कनवर्टिबल डिबंचर्स (NCDs) हैं. एक ऐसी कंपनी जिसका EBIDTA (ब्याज, टैक्स, नुकसान और कर्ज हटाकर कमाई) 900 करोड़ हो, 250 करोड़ का कर्ज कोई बड़ी बात नहीं है.

क्या आपके ऊपर कोई बहुत बड़ा प्राइवेट कर्ज था?
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मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है कि क्या कंपनी के बाहर कोई दूसरे प्राइवेट लेन-देन किए गए थे या नहीं. हम केवल कंपनी की बैलेंस शीट के बारे में ही बात कर सकते हैं. चाहे यह कर्ज के मुकाबले पूंजी की बात ही क्यों न हो, जो इस मामले में कोई बड़ा मसला नहीं था. जो भी सिद्धार्थ ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर किया हो, उसके बारे में कोई नहीं जानता.

लेकिन वो आर्थिक प्रबंधन में अच्छे थे, ऐसे में यह दिन देखकर यकीन होना मुश्किल है...
वो आर्थिक प्रबंधन में बहुत अच्छे थे और सच्चे अर्थ में एक एंटरप्रेन्योर थे. उन्होंने बिजनेस खड़ा किया, वो बिजनेस को अच्छे से जानते थे. उनके जैसे एंटरप्रेन्योर किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खास होते हैं क्योंकि वो पूंजी पैदा करने और नौकरियां बढ़ाने में बड़ा रोल अदा करते हैं.

ऐसे में यह कैसे हुआ?
मैं भी आपकी ही तरह चकित हूं. जहां तक कॉफी डे इंटरप्राइज की बात है मैं कोई भी समस्या नहीं देखता हूं, लेकिन उसी वक्त, कुछ लेन-देन के खुलासे को लेकर कुछ परेशानियां हैं, क्योंकि इनकी लिस्टिंग जरूरी है. इसलिए जो भी इसके लिए जरूरी होगा, किया जाएगा.

हां, वे अपनी दूसरी इक्विटी कंपनी के साथ ही अपनी फ्लैगशिप चेन को बेचने के लिए कोका-कोला के साथ बातचीत भी कर रहे थे. लेकिन इन चीजों को लेकर केवल बातें चल रही थीं. जैसा कि मैंने कहा, माइंडट्री के निकलने ने कॉफी डे इंटरप्राइज के कर्ज के हिस्से को बहुत कम कर दिया था और इसे संभालने जा सकने वाले दायरे में ला दिया था.

इसे जांचने का सबसे अच्छा तरीका रेटिंग एजेंसियां हैं. उन्होंने अपने एकाउंट्स खंगाले, अपने जांचने के तरीकों से जांचा और वे दूसरी बाहरी एजेंसियों के मुकाबले ज्यादा मायने रखने वाले हैं क्योंकि वे बिना भेदभाव के काम करते हैं.

क्या उनकी पत्नी भी बोर्ड की सदस्य हैं?
हां उनकी पत्नी भी बोर्ड की सदस्य हैं.

और क्या उनके बेटे भी कंपनी के साथ हैं?
नहीं, मुझे इसकी जानकारी नहीं है. मैं उनके बेटे से पहले कुछेक बार मिला हूं लेकिन मुझे इसकी जानकारी नहीं कि वे कंपनी में किसी पद पर हैं या नहीं.

तो क्या सिद्धार्थ कंपनी चलाने में सबसे प्रमुख थे?
हां, सिद्धार्थ ही सब कुछ थे.

यह इनकम टैक्स अधिकारियों के शोषण वाली बात क्या हैं?
मेरी समझ में जब उन्हें इनकम टैक्स ने नोटिस भेजा, उन्होंने कहा कि वो इसे भर देंगे. जिसके बाद उन्होंने कहा कि वो हाईकोर्ट में कानून के अनुसार अपील करेंगे. उन्होंने यह लिखित में दिया कि वो अपने बाकी टैक्स को चुकाएंगे. लेकिन फिर भी अधिकारियों ने माइंडट्री के शेयर्स को रोक दिया. उस वक्त उन्होंने कहा, मेरे पास इतनी संपत्ति है, आप इतनी सारी चीजों को ब्लॉक कर सकते थे. केवल माइंडट्री ही क्यों, वह भी जब हम उसे बेचने ही वाले थे? मेरे हिसाब से यही मामला था.

बाद में, इनकम टैक्स के बड़े अधिकारियों ने इस मामले को क्लियर कर दिया था, क्योंकि सिद्धार्थ ने लिखित में दिया था, जो भी आयकर अधिकारी कह रहे हैं मैं उसका एक-एक पैसा चुका दूंगा, यहां तक कि जो हमारे कंपनी के ऑडिटर्स मानते हैं कि हमें नहीं चुकाना है, वह भी. हम वह चुका देंगे, उसके बाद हम इसके खिलाफ अपील करेंगे. सिद्धार्थ ऐसे आदमी नहीं थे जो अथॉरिटी को चकमा देते. वो हमेशा उनका सहयोग करते थे, वो कानून का पालन करते थे और फिर उसके खिलाफ अपील करते थे. जैसा कि दूसरे नागरिक करते हैं.

क्या जैसा यह मामला है, क्या यह लगता है कि उन्होंने सुसाइड किया होगा?
जब तक हमें कोई फीडबैक या आगे की जानकारी नहीं मिल जाती, इसे केवल एक शंका माना जा सकता है और मैं चाहूंगा कि यह गलत हो.

आयकर विभाग ने इस मामले में दिया है यह जवाब-
हालांकि इस बातचीत के बाद समाचार एजेंसी भाषा के साथ मंगलवार को हुई एक बातचीत में इनकम टैक्स के आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि आयकर विभाग ने इस मामले में बिल्कुल कानूनों के अनुसार काम किया था और उसमें आयकर अधिकारियों ने किसी प्रकार का शोषण नहीं किया था, जैसा कि पत्र में दावा किया गया है.

सूत्रों के मुताबिक सिद्धार्थ को माइंडट्री को बेचने से 3,200 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन उन्होंने इस डील पर बनने वाले मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) के 300 करोड़ टैक्स में से सिर्फ 46 करोड़ ही चुकाए थे. (भाषा के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें: लापता हुए वीजी सिद्धार्थ के बारे में 15 बातें
First published: July 30, 2019, 5:43 PM IST
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