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Haryana Election Result 2019: जिस नेता को कांग्रेस ने कर दिया था दरकिनार, अब सरकार बनाने के लिए उस पर टिकी हैं निगाहें

कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी हरियाणा में अशोक तंवर को आगे बढ़ा रहे थे और बीएस हुड्डा अपना समय काट रहे थे.

कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी हरियाणा में अशोक तंवर को आगे बढ़ा रहे थे और बीएस हुड्डा अपना समय काट रहे थे.

Haryana Election Result 2019: कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने पूर्व सीएम और पार्टी के कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (BS Hooda) और उनके बेटे दीपेंद्र (Deepender Hooda) के बजाय अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को तरजीह दी. इस वजह से हुड्डा राहुल गांधी से नाराज भी चल रहे थे. बावजूद इसके उन्‍होंने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanaka Gandhi) से अपने संबंध ठीक रखे. राहुल गांधी के नेतृत्‍व में उन्‍हें हरियाणा की राजनीति में किनारे कर दिया गया था. अब कांग्रेस को उम्‍मीद है कि सिर्फ बीएस हुडा ही हरियाणा में पार्टी की सरकार बना सकते हैं.

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    पल्‍लवी घोष

    नई दिल्‍ली. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Elections 2019) की आज हुई मतगणना (Counting) के नतीजे एग्जिट पोल्‍स के नतीजों से काफी अलग हैं. ज्‍यादातर एग्जिट पोल्‍स हरियाणा में बीजेपी (BJP) की सत्‍ता में वापसी का अनुमान लगा रहे थे. वहीं, मतगणना के अब तक के रुझानों के मुताबिक, कांग्रेस (Congress) राज्‍य में बीजेपी को तगड़ी चुनौती पेश कर रही है. अब तक के रुझानों के मुताबिक, बीजेपी 38, कांग्रेस 31, जननायक जनता पार्टी (JJP) 11, इनेलो 2 और अन्‍य 8 सीटों पर आगे चल रहे हैं. बीजेपी अब भी बहुमत (Mandate) से दूर है. वहीं, सत्‍ता की चाभी दुष्‍यंत चौटाला की जेजेपी के हाथों में नजर आ रही है. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी ने हरियाणा सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की कवायद तेज कर दी है.

    राहुल गांधी ने हरियाणा में युवा नेताओं को आगे बढ़ाया था
    राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जब कांग्रेस के अध्‍यक्ष थे तब उन्‍होंने युवा नेताओं को आगे बढ़ाया. ऐसे में वरिष्‍ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा (BS Hooda) राज्‍य की सियासत में दरकिनार हो गए. अब कांग्रेस को उम्‍मीद है कि सिर्फ हुड्डा ही हरियाणा में पार्टी की सरकार बना सकते हैं. चुनाव कार्यक्रम (Election Schedule) की घोषणा के कुछ दिन बाद हुड्डा दिल्‍ली की एक कॉफी शॉप में बैठे थे. वो अपने एक पार्टी नेता से लगातार फोन पर बात कर रहे थे. इसी बीच जब कुछ लोगों ने उनसे सेल्‍फी (Selfie) के लिए कहा तो उन्‍होंने मुस्‍कराते हुए उनके साथ तस्‍वीरें खिचवाईं. इसी दौरान उन्‍होंने News 18 की पत्रकार पल्‍लवी घोष (Pallavi Ghosh) को पहचान लिया और कहा, 'आप हरियाणा के भावी मुख्‍यमंत्री (CM) की तस्‍वीर खींच रही हैं.'

    हुड्डा ने कुछ महीने पहले ही सोनिया गांधी को दी थी चुनौती
    अब ऐसा लग रहा है कि मतगणना का अंत त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) के साथ होगा. ऐसे में स्‍पष्‍ट है कि हरियाणा में हुड्डा फैक्‍टर (Hooda Factor) लौट आया है. दो बार मुख्‍यमंत्री रहे 72 वर्षीय भूपेंद्र सिंह हुड्डा को यह अच्‍छी तरह से पता था कि यह उनकी आखिरी लड़ाई है. दरअसल, राहुल गांधी हरियाणा में उनकी जगह अशोक तंवर (Ashok Tanwar) को आगे बढ़ा रहे थे और हुड्डा अपना समय काट रहे थे. यहां तक कि कुछ महीने पहले रोहतक (Rohtak) की एक रैली में हुड्डा ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को खुली चुनौती देते हुए कहा था, 'मेरे कार्यकर्ता तय करेंगे कि मुझे कांग्रेस के साथ रहना चाहिए या कुछ और करना चाहिए.' ये सब ठीक उसी समय हुआ जब सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष (Interim President) बनाई गईं.

    कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को अहसास था कि भूपेंद्र हुड्डा की आवाज को न तो दबाया जा सकता है और न ही उसे नजरअंदाज किया जा सकता है.


    सोनिया को था अहसास, दबाई नहीं जा सकती हुड्डा की आवाज
    सोनिया गांधी को अहसास था कि हुड्डा की आवाज को न तो दबाया जा सकता है और न ही नजरअंदाज किया जा सकता है. एक सच्‍चे जाट की तरह हुड्डा ने अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए डटकर लड़ाई लड़ी. हालांकि, वह लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) में सोनीपत (Sonipat) संसदीय क्षेत्र से हार गए थे. कांग्रेस रोहतक संसदीय क्षेत्र से सभी आम चुनाव जीती थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में दीपेंदर हुड्डा (Deepender Hooda) इस सीट पर बीजेपी के अरविंद कुमार शर्मा (Arvind Kumar Sharma) से हार गए. यही नहीं कांग्रेस लगातार दूसरे लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी सीटों पर भी हार गई थी.

    हुड्डा ने चुनाव से पहले ही जीत ली थी आधी जंग
    एक तरफ कांग्रेस को बीजेपी से चुनौती मिल रही थी, तो दूसरी ओर पार्टी अंदरूनी कलह का सामना कर रही थी. विधानसभा चुनाव से ठीक एक महीने पहले सितंबर में कांग्रेस ने अशोक तंवर की जगह पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा (Kumari Selja) को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्‍यक्ष बनाकर विवाद को खत्‍म कर दिया. पार्टी ने हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता भी नियुक्‍त कर दिया. साथ ही उन्‍हें चुनाव प्रबंधन समि‍ति (Election Management Committee) का मुखिया भी बनाया गया. इस तरह हुड्डा ने आधी जंग जीत ली थी. वह अकसर चिंतित रहते थे कि उनकी पार्टी का हरियाणा में क्‍या होगा. वह हुड्डा परिवार के बजाय अशोक तंवर को आगे बढ़ाने के कारण राहुल गांधी से खासे नाराज थे. असल में सोनिया गांधी की वापसी पर उन्‍होंने राहत की सांस ली थी.

    हरियाणा में फिलहाल दोराहे पर खड़ी है कांग्रेस
    मतगणना के अब तक रुझानों और नतीजों के मुताबिक, हरियाणा में कांग्रेस इस समय दोराहे पर खड़ी है. ऐसे में पार्टी को उम्‍मीद है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही इकलौते नेता हैं, जो अपने पुराने संबंधों (Old Relations) का इस्‍तेमाल कर हरियाणा में कांग्रेस सरकार बना सकते हैं. दोस्‍तों के दोस्‍त हुड्डा हमेशा अपने साथियों से संपर्क में रहते हैं. वह अकसर कहते रहे हैं कि कोई नहीं जानता, कौन-कब-किस काम आ जाए. हुड्डा के पुनर्जन्‍म के साथ कांग्रेस को भी नया जीवन मिल गया है. राजनीतिक पंडितों का भी कहना है कि हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा ही कांग्रेस की नैया पार लगा सकते हैं.

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