संकट में सिद्धू का सियासी करियर! SC में 30 साल पुराने रोड रेज केस की सुनवाई शुरू

ये घटना 27 दिसंबर 1988 की है. कार पार्किंग को लेकर सिद्धू की गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ कहासुनी हो गई. कहा-सुनी हाथापाई में बदल गई.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: March 21, 2018, 11:29 AM IST
संकट में सिद्धू का सियासी करियर! SC में 30 साल पुराने रोड रेज केस की सुनवाई शुरू
नवजोत सिंह सिद्धू (फाइल फोटो)
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: March 21, 2018, 11:29 AM IST
नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ 30 साल पुराने रोड रेज केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. अमृतसर से तीन बार सांसद रह चुके सिद्धू फिलहाल पंजाब सरकार में मंत्री हैं और इस मामले में कोर्ट का फैसला क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू का राजनीतिक करियर की दिशा तय कर सकता है.

जस्टिस जे चेल्मेश्वर और संजय कौल की पीठ इस केस की सुनवाई कर रही है. वहीं सिद्धू के वकील ने दलील दी है कि वो निर्दोष हैं.

क्या था मामला ?
ये घटना 27 दिसंबर 1988 की है. कार पार्किंग को लेकर सिद्धू की गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग के साथ कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई. गुरनाम सिंह के साथ उनका भांजा भी था. भांजे के मुताबिक, सिद्धू ने गुरनाम को घुटना मारकर सड़क पर गिरा दिया. इसके तुरंत बाद ही गुरनाम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इससे पहले ही वो दम तोड़ चुके थे. सिद्धू के साथ उस उक्त उनका दोस्त रुपिंदर सिंह संधू भी था.

कोर्ट में कब क्या हुआ?
- सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज गया. सेशन कोर्ट में केस चला. पंजाब सरकार और पीड़ित परिवार की तरफ से मामला दर्ज करवाया गया.

- साल 1999 में सेशन कोर्ट से सिद्धू को राहत मिली और केस को खत्म कर दिया गया. कोर्ट का कहना था कि आरोपी के खिलाफ पक्के सबूत नहीं हैं और ऐसे में सिर्फ शक के आधार पर केस नहीं चलाया जा सकता, जबकि मौके पर मौजूद गुरनाम के भांजे ने सिद्धू और उनके दोस्त के खिलफ गवाही दी थी. बावजूद इसके, सिद्धू और संधू को केस से बरी कर दिया गया.
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-एक बार फिर साल 2002 में राज्य सरकार ने सिद्धू के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की.

- साल 2004 में सिद्धू ने पॉलिटिक्स में एंट्री ली और अमृतसर से बीजेपी सांसद चुने गए.

- दिसंबर 2006 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू और उनके दोस्त को दोषी माना. सिद्धू और संधू को 3-3 साल की सज़ा सुनाई गई. एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा. सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 10 जनवरी 2007 तक का समय दिया गया. सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई और 11 जनवरी को चंडीगढ़ कोर्ट में सिद्धू और उसके दोस्त ने सरेंडर कर दिया. अगले दिन यानी 12 जनवरी को सिद्धू और उनके दोस्त को ज़मानत मिल गई.

-सुप्रीम कोर्ट में सिद्धू ने फिर से अर्जी लगाई और उनकी सज़ा पर रोक लग गई.

-बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अब वित्त मंत्री अरुण जेटली और वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने उस उक्त सिद्धू का केस लड़ा था.

-इस बीच पीड़ित का बेटा और एक घायल गवाह भी सिद्धू की सजा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. पूर्व सॉलिसिटर जनरल रणजीत कुमार और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा दोनों की ओर से बहस करने के लिए तैयार हैं, जो चाहते हैं कि सिद्धू की सजा बढ़नी चाहिए.

फिलहाल ये देखना है कि क्या पंजाब सरकार किसी वरिष्ठ वकील को सिद्धू को बचाने के लिए भेजती है या नहीं. सिद्धू इस समय राज्य सरकार में मंत्री हैं. अगर सिद्धू की सजा को बरकरार रखा रखा जाता है तो वो चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगे. ये देखते हुए कि जस्टिस जे चेल्मेश्वर 22 जून को रिटायर हो जाएंगे ऐसे में ये फैसला जल्दी आ सकता है.

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First published: March 21, 2018, 10:52 AM IST
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