CPEC के भविष्य को लेकर चीन-पाकिस्तान में बढ़ रही है बेचैनी: रिपोर्ट

CPEC प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ी है. (सांकेतिक तस्वीर)

CPEC प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ी है. (सांकेतिक तस्वीर)

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि CPEC प्रोजेक्ट पर हुई हालिया बैठक में चीन (China) की तरफ से फंडिंग को लेकर पाकिस्तान (Pakistan) को निराशा हाथ लगी है. पाकिस्तान CPEC के दूसरे चरण में कुछ और प्रोजेक्ट को भी शामिल करना चाहता था. लेकिन चीनी अधिकारियों की तरफ से किसी भी तरह की फंडिंग का वादा करने से इंकार कर दिया गया है.

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नई दिल्ली. चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (China-Pakistan Economic Corridor-CPEC) प्रोजेक्ट की धीमी प्रगति के बीच दोनों देशों में बेचैनी और असहजता के संकेत दिखाई दे रहे हैं. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रोजेक्ट पर हुई हालिया बैठक में चीन (China) की तरफ से फंडिंग को लेकर पाकिस्तान (Pakistan) को निराशा हाथ लगी है.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय पब्लिकेशन के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान CPEC के दूसरे चरण में कुछ और प्रोजेक्ट को भी शामिल करना चाहता था. लेकिन चीनी अधिकारियों की तरफ से किसी भी तरह की फंडिंग का वादा करने से इंकार कर दिया गया है.

इसके अलावा पाकिस्तान रियायती दर पर अन्य लोन भी पा सकने में नाकाम रहा है. पाकिस्तान चाहता था कि उसे रियायती दर के हिसाब से 1 प्रतिशत ब्याज पर लोन मिले लेकिन चीन की तरफ से इसके लिए भी इंकार कर दिया गया. दरअसल चीन चाहता है कि वो पाकिस्तान को रेल प्रोजेक्ट के लिए कॉमर्शियल और रियायती दोनों का मिक्स लोन दे. और इसके लिए चीन पाकिस्तान से कोई बड़ी गारंटी भी चाहता है. रिपोर्ट कहती है कि प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान और चीन के बीच असहजता साफ जाहिर हुई. संभवत: चीन में भी पाकिस्तान को लेकर भरोसा कम हुआ है.

CPEC के तहत कई प्रोजेक्ट अधर में लटके
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में चीन के कई ऐसे प्रोजेक्ट जो अभी अधर में लटके हुए हैं. इन प्रोजेक्ट्स की वैल्यू करीब 1200 करोड़ अमेरिकी डॉलर बताई गई है. ढेर सारे प्रचार के बावजूद भी शायद ही कोई बड़ा चीनी निवेशक है जो CPEC के तहत बने स्पेशल इकोनॉमिक जोन में निवेश करना चाहता है. अब पाकिस्तान द्वारा CPEC को हर परेशानी का समाधान बताने वाले नैरेटिव की बुरी हालत हो रही है.

दोनों देशों की एजेंसियों के बीच नहीं है तालमेल

प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी होने के अलावा एक अन्य परेशानी यह भी है कि दोनों देशों की एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल नहीं है. अब पाकिस्तान में यह धारणा फैल रही है कि देश को वास्तविकता में CPEC से कोई फायदा नहीं हुआ. हाल में पाकिस्तान की CPEC पर सीनेट की स्पेशल कमेटी ने यह कह कर सबको हैरान कर दिया है कि देश के पास इतने बड़े प्रोजेक्ट को मैनेज करने की क्षमता ही नहीं है. कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि देश की प्लानिंग मिनिस्ट्री के पास इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई विजन ही नहीं है.



2015 में चीन ने की थी घोषणा

याद दिला दें कि 2015 में चीन ने 4600 करोड़ अमेरिकी डॉलर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी. इस प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान के भीतर चीन अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. इस प्रोजेक्ट के जरिए पाकिस्तान के दक्षिणी हिस्से में स्थित ग्वादर बंदरगाह से चीन के जिनजियांग इलाके तक को सीधा जोड़ा जाना है. प्रोजेक्ट के तहत सड़कें, रेल प्रोजेक्ट और तेल पाइपलाइन विकसित किए जा रहे हैं. इसके तहत चीन का लक्ष्य पाकिस्तान के अलावा पश्चिमी एशिया से कनेक्टिविटी बेहतर करना है.

भारत इस प्रोजेक्ट का विरोध करता रहा है क्योंकि यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित बाल्टिस्तान से होकर गुजरेगा. इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में पाकिस्तान का विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान भी शामिल है.
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