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जिस लखबीर की सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या उसके गांव में पसरा सन्नाटा, परिवार चाहता है निष्पक्ष जांच

जिस लखबीर की सिंघु बॉर्डर पर हुई हत्या उसके गांव में पसरा सन्नाटा, परिवार चाहता है निष्पक्ष जांच

लखबीर सिंह के परिवार के सदस्य. (तस्वीर-ANI)

लखबीर सिंह के परिवार के सदस्य. (तस्वीर-ANI)

सिंघु बॉर्डर पर निहंगों के एक समूह ने 35 वर्षीय दलित लखबीर की धार्मिक ग्रंथ के कथित अपमान के आरोप में हत्या कर दी थी. घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद भी चीमा कलां गांव में किसी बड़े नेता या वीवीआई ने यात्रा नहीं की.

    (स्वाति भान)
    चंडीगढ़.
    पंजाब के तरन तारन जिले के चीमा कलां गांव (Cheema Kalan Village) में इस वक्त सन्नाटा पसरा हुआ है. सिंघु बॉर्डर पर जिस लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) की नृशंस हत्या हुई वो इसी गांव का रहने वाला था. सिंघु बॉर्डर पर निहंगों के एक समूह ने 35 वर्षीय दलित लखबीर की धार्मिक ग्रंथ के कथित अपमान के आरोप में हत्या कर दी थी. घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद भी चीमा कलां गांव में किसी बड़े नेता या वीवीआई ने यात्रा नहीं की. दलित नेता चंद्र शेखर आजाद को छोड़कर सामान्य तौर पर नेताओं ने अब तक गांव से दूरी ही बना रखी है.

    धार्मिक मुद्दे के महत्व को समझते हुए राजनीतिक पार्टियां दलित लखबीर का मुद्दा उठाने से बच रही हैं. राज्य में बस कुछ ही महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस बीच बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने लखबीर के परिवार को 50 लाख मुआवजा देने की मांग की है. मायावती का ये ट्वीट राज्य बीएसपी यूनिट ने पंजाबी में अनुवाद कर शेयर किया था लेकिन ट्रोल होने के बाद इसे डिलीट कर दिया गया. इससे समझा जा सकता है कि राज्य में धार्मिक मुद्दा कितना अहम है!

    खुद मुख्यमंत्री ने मुद्दे से दूरी बना रखी है
    हालांकि पंजाब सरकार की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. पंजाब के नए दलित मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने न इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और न ही गांव की यात्रा की.

    लखबीर कथित तौर पर ड्रग्स का नशा करता था. कुछ साल पहले वो अपनी पत्नी और तीन बच्चियों से अलग हो चुका था और अपनी बहन के साथ रहता था. गांव के मुखिया सोनू चीमा हैरत जाहिर करते हैं कि आखिर लखबीर सिंघु बॉर्डर कैसे पहुंच गया. वो कहते हैं-हमें जानकारी नहीं है कि वो सिंघु बॉर्डर कब पहुंच गया. कौन उसे वहां लेकर गया? हालांकि गांव में उसकी छवि एक नशेड़ी व्यक्ति की थी लेकिन वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता था. नशे की लत के कारण वो लोगों से अक्सर उधार मांगा करता था.

    निष्पक्ष जांच की उम्मीद
    हालांकि धर्मग्रंथ के अपमान का आरोप अब भी सिद्ध नहीं हुआ है. लेकिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी ने कहा है कि वो लखबीर का अंतिम संस्कार सिख रीति रिवाज से नहीं होने देंगे. गांव वालों को लखबीर पर लगे आरोपों में भरोसा नहीं है. वो जानते हैं कि कोई बड़ा नेता गांव में नहीं पहुंचेगा लेकिन कम से कम एजेंसियों को जांच निष्पक्ष रूप से करनी चाहिए.

    (ये स्टोरी यहां क्लिक कर पूरी पढ़ी जा सकती है.)

    Tags: Delhi Singhu Border, Singhu Border

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