कोरोना के डर से अंधेरी हो गईं रमजान पर जगमाने वाली मोहम्मद अली रोड की तंग गलियां

कोरोना के डर से अंधेरी हो गईं रमजान पर जगमाने वाली मोहम्मद अली रोड की तंग गलियां
मुंबई की मोहम्मद अली रोड पर इस बार रमजान के महीने में थी सन्नाटा पसरा हुआ है.(फाइल फोटो)

रमजान के पाक महीने में भिंडी बाजार, जावेरी बाजार और मांडवानी में हर दिन 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2020, 12:01 PM IST
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नई दिल्ली. दुआओं और बरकतों के महीने रमजान (Ramadan) में सड़कों पर पसरा सन्नाटा कोरोना (Corona) की दहशत को साफ बयां कर रहा है. किसी ने आज से पहले सोचा भी नहीं था कि रमजान के महीने में चकाचौंध रहने वाले मुंबई की मोहम्मद अली रोड (Mohammed Ali Road) इस कदर खामोश हो जाएगी. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) में इबादत के इस खास महीने में हर कोई अपने कमरों में कैद है और बस एक ही दुआ कर रहा है कि देश जल्द से जल्द कोरोना से मुक्त हो जाए.

मोहम्मद अली रोड पर इस खास महीने में लजीज पकवानों की महक गैर मुस्लिमों को भी इन तंग गलियों में ले आती है. हर साल जश्न के माहौल में डूबा रहने वाला यह मुस्लिम इलाका आज एक इंसान को देखने को तरस रहा है. कोरोना के डारावने अंधेरे ने यहां की सड़कों पर लगने वाली रंगीन रोशनी और चमकीली झालरों को भी बंद कर दिया है. एक अनुमान के मुता​बिक मुंबई को कोरोना के कारण हर दिन करीब 200 करोड़ का नुकसान हो रहा है.

मुस्लिम इकॉनमी के जानकारी और हलाल अथॉरिटी बोर्ड के महासचिव दानिश रियाज़ बताते हैं कि रमजान के पाक महीने में भिंडी बाजार, जावेरी बाजार और मांडवानी में हर दिन 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. इन इलाकों में रिटेल की लगभग सभी दुकाने मुसलमानों की ही हैं. इसमें इत्र और कपड़े से लेकर मेवा और मिठाई तक को कारोबार किया जाता है. रमजान के महीने में यहां पर अरब देशों के व्यापारी आया करते हैं. हालात ये हो जाते हैं कि होटलों में कमरे कम पड़ जाते हैं और यहां का बिजनेस हर दिन नए रिकॉर्ड बनाता है.



दिन रात लोगों से गुलजार रहने वाला यह इलाका इस बार सन्नाटे में कहीं गुम सा हो गया है. यहां पर रहने वाले बताते हैं कि इफ्तार के बाद यहां पर बड़ी तादाद में लोग खाने के लिए निकलते हैं. यही कारण है कि मोहम्मद अली रोड को 'इफ्तार पैराडाइज' भी कहा जाता है. यहां हर दिन ऐसे लोग पहुंचते हैं जो सालों से एक दूसरे से नहीं मिले होते. लॉकडाउन की वजह से रमज़ान के महीने का वो सामाजिक-सांस्कृतिक तानाबाना पूरी तरह टूट गया है.
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जामा मस्जिद का इलाका भी हुआ खामोश
रमजान का पाक महीना 25 अप्रैल से शुरू हो गया है. रमजान के दिनों में जामा मस्जिद के आसपास चहल-पहल रहा करती थी लेकिन इस बार यहां की रौनक भी कहीं गायब हो गई है. दूर-दूर से लोग यहां आते थे और लजीज खाने का लुत्फ उठाया करते थे. हालांकि इस बार लॉकडाउन की वजह से इस पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है.

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