भारत-चीन तनाव के बीच लेह में शुरू हो रहा है सिंधु दर्शन महोत्सव

लेह से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शे मनला में सिंधु नदी के किनारे पर यह महोत्सव हर साल मनाया जाता है (सांकेतिक तस्वीर)
लेह से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शे मनला में सिंधु नदी के किनारे पर यह महोत्सव हर साल मनाया जाता है (सांकेतिक तस्वीर)

India-China Standoff: संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन ही इंद्रेश कुमार सिंधु दर्शन यात्रा समिति (Sindhu Darshan Yatra Samiti) के स्वयंसेवकों के संग लेह शहर स्थित बौद्ध संकर गोम्पा मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:33 PM IST
  • Share this:
लेह. लद्दाख (Ladakh) में भारत-चीन बॉर्डर (India-China Border) पर तनाव के बीच कल से लेह (Leh) लद्दाख में सिंधु दर्शन महोत्सव (Sindhu Darshan Mahotsav) शुरू होने जा रहा है. सिंधु दर्शन महोत्सव कल से शुरू होकर 5 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला है. संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन ही इंद्रेश कुमार सिंधु दर्शन यात्रा समिति (Sindhu Darshan Yatra Samiti) के स्वयंसेवकों के संग लेह शहर स्थित बौद्ध संकर गोम्पा मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे. इसके अलावा लेह लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय सैनिकों का उत्साह और मनोबल बढ़ाने हेतु इंद्रेश कुमार के नेतृत्व में मिठाईया भी बांटी जाएगी.

भारतीय विशेष सीमा बल (Indian Special Border Force) शहीद सैनिक नइमा तेजजिंन को लेह लद्दाख में संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार और सिंधु दर्शन महोत्सव स्वयंसेवक श्रृद्धांजलि भी देंगे. कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemoic) की वजह से इस बार सिंधु दर्शन महोत्सव को बहुत सीमित दायरे में आयोजित किया जा रहा है. इस बार केवल भारत के विभिन्न राज्यों से केवल 130 भारतीय नागरिक, लेह स्थित सिंधु नदी में स्नान और पूजा करेंगे.

ये भी पढ़ें- बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी-जोशी सहित सभी बरी, BJP ऐसे उठाएगी फैसले का फायदा



क्या है सिंधु दर्शन महोत्सव
लेह से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शे मनला में सिंधु नदी के किनारे पर यह महोत्सव हर साल मनाया जाता है. सिंधु दर्शन महोत्सव के नाम से प्रसिद्ध इस आयोजन में देश भर से सैकड़ों पर्यटक आते हैं. इस महोत्सव में अनेक प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इनमें संगीतमय कार्यक्रम, नृत्य की प्रस्तुति और कला प्रदर्शनियों का आयोजन होता है. भारत के अलग अलग राज्यो के कई कलाकार अपने-अपने रंग के कार्यक्रम पेश यहां करते हैं. यह सिंघे खबाब्स महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है.

गुरु पूर्णिमा के दिन आरंभ होता है गुरु पूर्णिमा
इस महोत्सव को मनाने का मकसद सिंधु नदी पर सभी का ध्यान केंद्रित करना तथा देश की एकता एवं सौहार्द के प्रतीक के रूप में इस नदी का प्रचार-प्रसार करना है. आमतौर पर यह महोत्सव गुरु पूर्णिमा के दिन आरंभ होता है और तीन दिनों तक चलता है. पहले दिन, स्वागत समारोह आयोजित किया जाता है. इस मौके पर लामा नदी के किनारे विशेष प्रार्थना करते हैं. उस रात को बॉन फायर किया जाता है. दूसरे दिन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है. इसमें स्थानीय कला और शिल्प को करीब से देखने-समझने का अवसर मिलता है. कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुति देते हैं. इसके बाद पूजा का आयोजन किया जाता है.



इस महोत्सव की शुरुआत 1997 में लालकृष्ण आडवाणी ने की थी, तब से अब तक हर साल यहां यह महोत्सव मनाया जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज