सिंघु बॉर्डर: लंबे आंदोलन के लिए तैयार किसान, रुकने के लिए बढ़ाईं कई सुविधाएं

सिंघु बॉर्डर पर किसान ने रुकने के लिए बढ़ाई सुविधाएं. (फाइल फोटो)

सिंघु बॉर्डर पर किसान ने रुकने के लिए बढ़ाई सुविधाएं. (फाइल फोटो)

26 जनवरी के बाद कुछ कमजोर पड़े आंदोलन (Protest) में एक बार फिर जान आ गई है. अब किसानों ने लंबे समय तक रुकने के लिए कई तरह की सुविधाएं (Facilities) बना ली हैं. आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए किसान कम्यूनिकेशन (Communication) और रहने की सुविधा बेहतर (Infrastructure) कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 12, 2021, 1:51 AM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर किसान लंबी लड़ाई के मूड में हैं. 26 जनवरी के बाद कुछ कमजोर पड़े आंदोलन में एक बार फिर जान आ गई है. अब किसानों ने लंबे समय तक रुकने के लिए कई तरह की सुविधाएं (Facilities) बना ली हैं. आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए किसान कम्यूनिकेशन (Communication) और रहने की सुविधा बेहतर (Infrastructure) कर रहे हैं.

इससे पहले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त मोर्चा की तरफ से साफ किया जा चुका है कि जब तक मोदी सरकार नए कानून वापस नहीं ले लेती, तब तक विरोध जारी रहेगा. सुरक्षा इंतजाम और बाहरी लोगों को अलग रखने के लिए 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा मेन स्टेज के पीछे कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है जिससे हर गतिविधि पर निगाह रखी जा सके. गौरतलब है कि 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद संयुक्त मोर्चा को बैकफुट पर आना पड़ा था. हालांकि किसान नेताओं की तरफ से बार-बार हिंसा की जांच की बात कही जाती रही है.

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टिकरी बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने गांव बसा लिया
इसी बीच टिकरी बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने गांव बसा लिया है. गांव की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे आसामाजिक तत्वों पर निगरानी के लिए लगवाए गए हैं. वहीं, लंगर स्थल के साथ ही एक सुंदर पार्क भी बनाया गया है. पार्क में बेंच और चारपाई पर किसान आपसी चर्चा करते हैं.

किसानों ने अपनी ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर Wi-Fi कनेक्शन लगवा रखे हैं, जिससे अब इंटरनेट बंद होने की स्थिति में भी किसानों को सूचनाएं भेजने में परेशानी नहीं आएगी. किसानों का कहना है कि कृषि कानून धीरे-धीरे न केवल मंडियां खत्म कर देंगे, बल्कि एमएसपी भी ख़त्म कर देंगे. किसानों ने कहा कि वो अपना घर बार छोड़कर आएं हैं. खेती और जमीन बचाने आये हैं.
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