IMA Jewels Fraud: उलेमा के सहारे मंसूर खान ने मुस्लिमों से ही 2000 करोड़ रुपए ठग लिए

पोंजी स्कीम के जरिए 2000 करोड़ का घोटाला करने वाले मोहम्मद मंसूर खान की हैं 4 बीवि‍यां. ऐसी है फर्जी सुसाइड की कहानी गढ़ लोगों को ठगने वाले मंसूर खान की पूरी कहानी...

News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 11:24 PM IST
IMA Jewels Fraud: उलेमा के सहारे मंसूर खान ने मुस्लिमों से ही 2000 करोड़ रुपए ठग लिए
मंसूर खान 2 हजार करोड़ रुपये के पोंजी स्कीम मामले में अपनी चौथी पत्नी के साथ दुबई भाग गया है (फाइल फोटो)
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Updated: June 19, 2019, 11:24 PM IST
कर्नाटक की पोंजी स्कीम आईएमए फ्रॉड केस का मास्टरमाइंड मंसूर खान 2 हजार करोड़ रुपये के पोंजी स्कीम मामले में अपनी चौथी पत्नी के साथ दुबई भाग गया है. अब उसकी तीसरी पत्नी के पास से 44 करोड़ रुपये की ज्वैलरी जब्त की गई है.

हजारों लोगों को धोखा देने वाले मंसूर खान का इतिहास बड़ा रोचक है. उसकी जमीन से आसमान तक पहुंचे की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. वह कितना फिल्मी होगा, इसी से अंदाजा लगाइए कि उसने दुबई भागने से पहले आत्महत्या का वीडियो जारी किया था ताकि लोग उसकी खोज न करें.

यूं शुरु हुआ था मोहम्मद मंसूर खान का सफर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंसूर खान 1950 में तमिलनाडु से बेंगलुरु आ गया था. 18 साल की उम्र में उसने तय किया कि वह कॉलेज न जाकर कोई काम करेगा. ऐसे में उसने सेल्स रिप्रजेंटेटिव का काम शुरू किया. कुछ दिन काम करने के बाद उसे अहसास हो गया कि पढ़ाई करने से उसे फायदा हो सकता है. इसलिए उसने दोबारा पढ़ाई शुरू की और बेंगलुरू यूनिवर्सिटी से बी.कॉम की डिग्री ली.

दुबई जाकर सीखीं सोने के बिजनेस की बारीकियां
इसके बाद भी जब उसे कोई अच्छी जॉब नहीं मिली तो वह साल 1990 के बाद दुबई चला गया और वहां अपने एक संबंधी के साथ ज्वैलरी का बिजनेस शुरू किया. यहीं पर उसने अपने एक रिश्तेदार के साथ ज्वैलरी का बिजनेस शुरू कर दिया. दुबई में ही उसने सोने के बिजनेस की बारीकियां भी सीखीं. मंसूर जब वहां से वापस आया तो उसने चेन्नई में ज्वैलरी डिजाइन के कोर्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया.

2006 में खोला पहला बिजनेस
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अब मंसूर खान के सितारे चमकने वाले थे. उसने इसके बाद हीरा इस्लामिक बिजनेस ग्रुप ज्वाइन किया. जिसका मालिक नौहेरा शेख था. हालांकि यह ग्रुप अपनी गलत प्रैक्टिसेज के चलते विवादों में घिरा रहता था. यही वो जगह थी जहां पर मंसूर ने पोंजी स्कीम से पैसा कमाने का ढंग सीखा और हलाल इंवेस्टमेंट को इस बिजनेस का चेहरा बनाया. उसने जाना कि कैसे सस्ते में सोना खरीदकर महंगे दामों में बेचा जा सकता है. इसके बाद उसने अपना खुद का पहला बिजनेस 2006 में IMA ज्वैल्स नाम से खोला.

कंपनी नहीं कर पाई कुछ खास तो बंद कर दिया
यहीं मंसूर खान ने एक फाइनेंशियल एडवाइजरी कंपनी भी खोली. इस दौरान वह शिवाजीनगर में रहता था और उसने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए उस इलाके के गैंगस्टर्स की मदद ली. इन गैंगस्टर्स में से एक इलियास ने मंसूर की कंपनी में 50 लाख रुपये का इंवेस्टमेंट भी किया. इस तरह से फाइनेंशियल एडवाइजरी कंपनी की औपचारिक शुरुआत हो गई.

लेकिन अभी भी मंसूर को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा था. न ही लोगों के बीच उसकी प्रतिष्ठा अच्छी थी, पैसे में उसने 2008 में अपनी कंपनी भंग कर दी.

उलेमाओं को ठगने में कामयाब रहा मंसूर
फिर दिसंबर, 2013 में मंसूर खान ने धार्मिक नेताओं से संपर्क साधा और एक नया काम शुरू किया. यह था एक इन्वेस्टमेंट प्लान. इसमें भी मंसूर ने एक करोड़ के इन्वेस्टमेंट का जुगाड़ कर लिया. यह इन्वेस्टमेंट किया था मंसूर के नजदीकी नासिर हुसैन ने. इसके साथ ही उसकी मॉनिटरी एडवाइजरी कंपनी शुरू हो गई.

इस काम के लिए उसने कर्नाटक में बेंगलुरू और अन्य जिले के उलेमाओं से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उसकी कंपनी 2006 से चल रही है. यह बात झूठी थी लेकिन वह उलेमाओं को ठगने में कामयाब रहा.

इन्वेस्टर्स को दिखाए बड़े-बड़े सपने
उसने उलेमाओं से यह वादा किया कि वह उन्हें इन्वेस्टमेंट का दस गुना वापस करेगा. उसने यह भी कहा कि कंपनी को जितना फायदा होगा, वह उसका 70% इन्वेस्टर्स को देगा. उसने कहा था कि सिर्फ 15% कंपनी के खर्चे के लिए और 10% चैरिटी के लिए निकाला जाएगा. उसने अपने लिए केवल 5% मुनाफा रखने की बात कही थी.

इन फायदों के अलावा उसने उलेमाओं से स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोलने की बात भी कही थी. ऐसे में उलेमा उस पर भरोसा करते रहे. 2015 में उसकी कंपनी IMA के पास 10 हजार से ज्यादा इंवेस्टर्स थे. इसके बाद उसने जयनगर में IMA ज्वैल्स नाम से एक शोरूम खोला. यहां वह अपने इन्वेस्टर्स को सोना खरीदने पर 20 से 50% तक डिस्काउंट देता था.

इस्लाम के नियमों का हवाला देकर करवाया इन्वेस्टमेंट
मंसूर, मुस्लिमों को अपनी कंपनी में हलाल इन्वेस्टमेंट का विकल्प देता था. दरअसल शरिया कानून में ब्याज हराम होता है. ऐसे में वह उन्हें हलाल तरीके से इन्वेस्टमेंट करने का तरीका बताता था. यह तरीका था कि लोग वस्तुओं के व्यापार में पैसा लगाएं और उससे जो भी फायदा हो, उसे सभी में बांटा जाए. उसने लोगों को बताया कि यह इस्लामिक कानून के हिसाब से सही होगा. इसी तरकीब को उसने हलाल इन्वेस्टमेंट नाम दिया था.

उलेमाओं के संपर्क से बड़े नेताओं को कंपनी के कार्यक्रमों में बुलाता था मंसूर (फाइल फोटो)


फिर शुरू हुईं मुश्किलें
2016 से 2018 के बीच उसने इसी कंपनी के अंतर्गत कई सारे स्कूल, सुपर मार्केट की चेन, मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सोने का व्यापार और कंस्ट्रक्शन कंपनी खड़ी कर दीं.  अप्रैल 2017 में इनकम टैक्स ने मंसूर की इन गतिविधियों को पकड़ा. इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मंसूर की अन्य संदिग्ध संपत्तियों की जांच शुरू की और कई संपत्तियों को सीज भी किया. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने यह भी पाया कि 2015-16 तक मंसूर ने इनकम टैक्स भी फाइल नहीं किया था.

उलेमाओं से लेकर मंत्रियों तक से साधे संबंध और इन्वेस्टर्स को दिया धोखा
उसपर यह आरोप भी है कि उसने तीन बड़े उलेमाओं का भी इस काम में सहयोग लिया था क्योंकि वे उसकी कंपनियों के कार्यक्रमों में बड़े नेताओं को आसानी से बुला देते थे. उसपर यह आरोप भी है कि मंसूर ने बेंगलुरू के एक बड़े नेता के कई चुनाव अभियानों के लिए काम किया और सरकार में भी कई लोगों से उसके अच्छे संबंध थे. तीन सालों तक मंसूर की यह धोखाधड़ी आराम से चलती रही. लेकिन मुसीबत तब खड़ी हुई जब कर्नाटक की सरकार ने 2015 में उसकी कंपनी के पोंजी स्कीम चलाने की बात कही. हालांकि इसके पुख्ता सबूत नहीं मिले और उसे क्लीन चिट मिल गई.

जांच आगे बढ़ी तो अचानक बंद कर दी कंपनी
इस पर राजस्व विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस क्लीन चिट के पीछे एक कैबिनेट मंत्री का हाथ था. जब 2018 में कुछ इन्वेस्टर्स के मंथली डिविडेंट्स रुके तो यह कंपनी फिर से RBI की नज़रों में आई. इसी दौरान राजस्व विभाग ने भी कंपनी में नवंबर, 2018 में एक फ्रॉड एक्टिविटी का केस पकड़ा.

इन सब जांचों के बीच इस साल 10 जून को कंपनी अचानक बंद कर दी गई. मंसूर खान ने अपने इंवेस्टर्स के लिए एक ऑडियो क्लिप छोड़ी और गायब हो गया. उसने क्लिप में कहा था कि वह सुसाइड कर रहा है. लेकिन 13 जून को पता चला कि वह अपनी चौथी बीवी और दो बच्चों के साथ दुबई भाग गया है.

बीवियों के घर पर छापा मारने के बाद सामने आए सबूत
10 जून के बाद SIT ने उसकी तीसरी बीवी के घर छापा मारा था. यहां से डेढ़ किलो सोना, ढाई लाख कैश और कुछ डॉक्यूमेंट्स मिले थे. कुल मिले सामान की कीमत 33 करोड़ रुपये बताई गई थी. तीसरी पत्नी ने SIT को मंसूर का एक लैपटॉप भी दिया, जिससे उसके बारे में कई जानकारियां पता चलीं.

इसके बाद जब पुलिस इस सोमवार IMA ज्वैल्स के शोरूम पहुंची तो पूरा शोरूम खाली था. शोरूम से 90% गहने गायब थे. SIT ने शक जताया है कि मंसूर खान ने 8 जून को फरार होते हुए ज्वैलरी भी साथ ही रख ली थी. फिर भी कहा गया है कि बाकी बची ज्वैलरी का मूल्यांकन होगा. एक अनुमान है कि इसका दाम भी करीब 20 करोड़ होगा. शोरूम की जांच के लिए पुलिस को भेजा गया था.

एक आंकड़े के अनुसार ऐसी फर्जी स्कीम में पिछले एक दशक में 1.25 लाख भारतीय अपना पैसा गंवा चुके हैं.

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First published: June 19, 2019, 7:56 PM IST
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