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राफेल डील के ऐलान से पहले पीएम मोदी ने नहीं ली थी कैबिनेट पैनल की मंजूरी

News18.com
Updated: October 11, 2018, 7:33 AM IST
राफेल डील के ऐलान से पहले पीएम मोदी ने नहीं ली थी कैबिनेट पैनल की मंजूरी
निर्मला सीतारमण की फाइल फोटो

सीएनएन न्यूज़18 को दिए एक इंटरव्यू में सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राफेल जेट्स के लिए एक समझौते पर बातचीत की केवल रुचि ज़ाहिर की थी और इसके लिए सीसीएस की रज़ामंदी की ज़रूरत नहीं थी.

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  • Last Updated: October 11, 2018, 7:33 AM IST
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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अप्रैल 2015 में हुए फ्रांस दौरे से पहले उन्हें 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए को सुरक्षा पर गठित कैबिनेट समूह (सीसीएस) से मंजूरी नहीं मिली थी.

सीएनएन न्यूज़18 को दिए एक इंटरव्यू में सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राफेल जेट्स के लिए एक समझौते पर बातचीत की केवल रुचि ज़ाहिर की थी और इसके लिए सीसीएस की रज़ामंदी की ज़रूरत नहीं थी. उन्होंने दावा किया कि बातचीत के स्तर पर सीसीएस की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं थी. यह केवल तभी जरूरी है, जब आप एक समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहते हों.

सीतारमण ने कहा, 'हमने पूरी तरह से प्रक्रिया का पालन किया. 16 महीने की बातचीत के बाद कैबिनेट के पास एक मसौदा ले जाया गया, सीसीएस ने इसे मंजूरी दी, जिसके बाद फ्रांसीसी सरकार के हस्ताक्षर के लिए इसे आगे बढ़ाया गया, जो सितंबर 2016 में हुआ था. इन 16 महीनों में बातचीत में कीमत, संख्या और बाकी उससे संबंधित चीजों को जोड़ा गया.

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पीएम मोदी की राफेल जेट खरीद की घोषणा के लगभग 16 महीने बाद सीसीएस ने अगस्त 2016 में 58,000 करोड़ रुपये की राफेल डील को मंज़ूरी दे दी.

सीतारमण का बयान उस दिन आया जब सुप्रीम कोर्ट इस सौदे से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया पर केंद्र से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने केंद्र से 29 अक्टूबर तक एक सीलबंद लिफाफे में सौदे की पूरी प्रक्रिया का विवरण मांगा है.

कांग्रेस इस सौदे के पूरे ब्योरे की मांग कर रही है, जिसमें उपकरण और हथियारों की लागत भी शामिल है, पार्टी का आरोप है कि उनकी सरकार में ये डील मोदी सरकार द्वारा हस्ताक्षरित डील से काफी सस्ती थी.कई मौकों पर, कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पूछा भी है कि प्रधानमंत्री ने जब अप्रैल 2015 में पेरिस की यात्रा के दौरान जेट की खरीद के बारे में घोषणा की थी तब सीसीएस की मंजूरी ली थी या नहीं.

सीतारमण ने कहा कि देश के बनने के बाद शुरुआती करीब 30 वर्षों के लिए सत्ता में रहने के बाद भी कांग्रेस को अभी तक स्पष्ट नहीं है कि किस अवसर के लिए कौन सी प्रक्रिया का पालन करना है. प्रधानमंत्री को किसी बात में दिलचस्पी दिखाने के लिए भी सीसीएस की मंज़ूरी की ज़रूरत है? चलिए कांग्रेस पार्टी. मुझे यकीन है कि आप बारे में ज़्यादा जानते हैं.

 

 

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First published: October 10, 2018, 10:58 PM IST
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