कोरोना बॉम्ब पर बैठा है बंगाल! विस्फोट से बचने के लिए चुनाव के बाद करने होंगे ये 5 उपाय

वैक्सिनेशन के मामले में पश्चिम बंगाल तेजी से बढ़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- AP)

वैक्सिनेशन के मामले में पश्चिम बंगाल तेजी से बढ़ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- AP)

Coronavirus in West Bengal: चिकित्सा व्यवस्थाओं की कमी के साथ-साथ कई राज्यों में नए मरीजों की संख्या में इजाफा जारी है. ऐसे में राज्य को महाराष्ट्र (Maharashtra) और दिल्ली जैसे प्रभावित राज्यों से अनुभव लेकर इन 5 क्षेत्रों में काम करना होगा.

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  • Last Updated: April 28, 2021, 10:16 PM IST
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कोलकाता. चुनावी दौर से गुजर रहे पश्चिम बंगाल (West Bengal) में नया कोरोना वायरस संकट दस्तक दे रहा है. मंगलवार को राज्य में एक्टिव केस का आकंड़ा 1 लाख के आंकड़े को पार कर गया है. खास बात है कि यह आंकड़ा महज 10 दिनों में ही दोगुना हो गया है. वहीं, विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) का आखिरी चरण का मतदान बाकी है. 8वें दौर का मतदान 29 अप्रैल गुरुवार को होना है. 2 मई को नतीजों की घोषणा होगी.

अब मौजूदा हालात से एक बात तो साफ है कि 2 मई को जो भी जीतेगा, उसे कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए युद्ध स्तर पर काम करना होगा. देश के कई राज्य कोरोना वायरस के हालात काफी बिगड़ गए हैं. चिकित्सा व्यवस्थाओं की कमी के साथ-साथ कई राज्यों में नए मरीजों की संख्या में इजाफा जारी है. ऐसे में राज्य को महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे प्रभावित राज्यों से अनुभव लेकर इन 5 क्षेत्रों में काम करना होगा.

1- कोलकाता में लॉकडाउन

नॉर्थ 24 परगना, हावड़ा और हुगली जैसे शहरी इलाकों से संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. ये सभी राज्य की राजधानी कोलकाता के नजदीक हैं. फिलहाल कोलकाता में करीब 24 हजार एक्टिव मामले हैं, लेकिन आखिरी चरण के चुनाव के चलते यहां लॉकडाउन नहीं है. यहां पॉजिटिविटी रेट भी 40 प्रतिशत के करीब है. इससे संकेत मिलते हैं कि यहां लॉकडाउन के जरिए लोगों की गतिविधियों पर लगाम लगाने की जरूरत है.
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2- टेस्टिंग में आए रफ्तार



पश्चिम बंगाल में अभी करीब 50 हजार सैंपल रोज जांचे जा रहे हैं. चिंता की बात यहां यह है कि राज्य में पहली लहर में जुलाई में 4 हजार डेली केस की तुलना में अब रोज 4 गुना यानि 16 हजार संक्रमित मिल रहे हैं. लेकिन टेस्टिंग की संख्या लगभग वही है. राज्य को कोविड-19 की असल हालात जानने के लिए टेस्टिंग क्षमता को 1 लाख तक ले जाना होगा. यहां एक अच्छी बात यह है कि ज्यादातर जांचें RT-PCR ही हैं.

3- ऑक्सीजन और ICU की व्यवस्था

कोलकाता में जमीनी हालात इसलिए खराब हैं, क्योंकि राज्य को DRDO और केंद्रीय पुलिस बलों की मदद से ज्यादा ऑक्सीजन और ICU बिस्तर तैयार करने की जरूरत है. राज्य सरकार के अनुसार, यहां 140 अस्पतालों हैं, जिनमें 12 हजार 352 बिस्तर कोविड मरीजों के लिए हैं. इनमें से केवल 43 फीसदी ही भरे हुए हैं. वहीं, पूरे राज्य में केवल 1838 बिस्तर ही ICU या हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) हैं. बीते साल से बिस्तरों की संख्या कम हो गई है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 3 मई तक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है. अदालत ने सरकार से ऑक्सीजन और बिस्तर की कमी को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी मांगी है.

4- ज्यादा ऑक्सीजन के लिए व्यवस्था

राज्य सरकार कह रही है कि पश्चिम बंगाल में पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई मौजूद है और 105 अस्पतालों में समर्पित सप्लाई मौजूद है. हालांकि, दिल्ली से मिला अनुभव बताता है कि एक बार मरीजों का बढ़ना शुरू होगा, तो ऑक्सीजन की कमी होने में समय नहीं लगेगा. सरकार ने कहा है कि राज्य में 55 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाएंगे, लेकिन ऑक्सीजन टैंकर्स की व्यवस्था करने की जरूरत है. अगर राज्य को अन्य राज्यों से खाली ऑक्सीजन टैंकर भरना है, तो पश्चिम बंगाल के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस का अनुरोध और भारतीय वायुसेना के साथ काम करना होगा. पश्चिम झारखंड और ओडिशा जैसे बंगाल के पड़ोसी राज्यों में भी पर्याप्त ऑक्सीजन प्लांट हैं.

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5- मिशन मोड में करना होगा टीकाकरण

वैक्सिनेशन के मामले में पश्चिम बंगाल तेजी से बढ़ रहा है. यहां टीकाकरण का आंकड़ा 1 करोड़ को पार कर गया है. हालांकि, 1 मई से शुरू हो रहे नए चरण के मद्देनजर राज्य को अपने प्रयासों को और तेज करना होगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि 100 करोड़ रुपये नए टीकाकरण के लिए अलग रखे गए हैं, लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की तरफ से जारी कीमतों को देखें, तो शायद यह रकम नाकाफी साबित होगी. राज्य सरकार को यह बताना चाहिए कि उन्होंने 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को टीका लगाने के लिए कितनी वैक्सीन के ऑर्डर दिए हैं और वे कब तक राज्य को मिलेंगे. भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने लोगों से मुफ्त टीकाकरण का वादा किया है.
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