चीन से विवाद के बीच लद्दाख में LAC पर गिर रहा तापमान, सैनिकों के लिए स्‍मार्ट कैंप तैयार

एलएसी पर ऊंची चोटियों पर तैनात हैं भारतीय जवान.
एलएसी पर ऊंची चोटियों पर तैनात हैं भारतीय जवान.

पूर्वी लद्दाख (Ladakh) में पहली बार ऊंची चोटियों पर भी भारतीय सैनिक तैनात हैं. वहां तापमान अभी से -20 डिग्री तक गिर गया और आने वाले दिनों में ये और गिरेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 17, 2020, 6:12 PM IST
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नई दिल्‍ली. वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पारा लगातार गिर रहा है और ठंड में अपनी पकड़ को बनाए रखने के लिए भारतीय सैनिकों की तैनाती रोटेशन के तहत की जा रही है. उंची चोटियों पर सैनिकों को 12 से 15 दिन में बदला जा रहा है तो वहीं लद्दाख में तैनात सेना के जवानों के लिए स्मार्ट कैंप भी तैयार हो गए हैं.

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच गर्मियों में शुरू हुआ विवाद अब सर्दियों तक पहुंच चुका है. नवंबर का दूसरा हफ्ता खत्म होने को है और लद्दाख में पारा माइनस में पहुंच चुका है. गलवान, पैंगोंग और दक्षिणी पैंगोंग के इलाकों की ऊंची चोटियों पर तापमान -20 से -25 तक गिर गया है और इस इलाके में विंड चिल फ़ैक्टर से तापमान 5 से 10 डिग्री और गिर जाता है. नवंबर के बाद तो इस सैक्टर में 40 फ़िट तक बर्फ पड़ जाती है. ऐसे में भारतीय सेना को अपनी जमीन पर कब्ज़ा जमाए रखने के लिए हमेशा तैनात रखा जा रहा है.

चूंकि ठंड ज़्यादा है ऐसे में किसी सैनिक का उन इलाके में ज़्यादा समय तक तैनात रहना शारीरिक तौर पर काफी कठिन है जिसके लिए सेना ने रोटेशन तैनाती के तहत न सिर्फ अपने पोस्ट पर पकड़ मज़बूत की जा रही है और मौसम के असर से सैनिकों को सुरक्षित भी रखा जा रहा है. जानकारी के मुताबिक़ फिलहाल चोटियों पर सैनिकों को 12 से 15 दिन में बदला जा रहा है. ऐसा नहीं है कि इतनी उंचाई और ठंड में भारतीय सेना तैनात नहीं है, सियाचिन में भारतीय सेना -40 से -60 डिग्री के तापमान में भी तैनात है. जहां रोटेशन के तहत सैनिकों को 90 दिन यानी तीन महीने तक तैनात रखा जाता है. 90 दिन पूरे होने के बाद दूसरे सैनिक उनकी जगह ले लेते हैं.



लेकिन पूर्वी लद्दाख में पहली बार ऊंची चोटियों पर भी भारतीय सैनिक तैनात हैं जहां तापमान अभी से -20 डिग्री तक गिर गया और आने वाले दिनों में ये और गिरेगा. फिलहाल भारतीय सैनिक पूर्वी लद्दाख यानि पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर ठाकुंग से लेकर रेज़ांग दर्रे तक पर तैनात है. इनमें से ब्लैक टॉप. मुखपरी, रेज़ाग ला, रेचिन ला जैसी चोटियों पर 29 से लेकर 31 अगस्त तक कब्ज़ा किया गया था.
सामरिक तौर पर ये सारे इलाके इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन पर कब्ज़े के चलते चीन बैकफ़ुट पर चला गया और यही वजह है कि वो बार बार बैठक में पैंगोंग से दक्षिण इलाके को पहले ख़ाली करने की रट लगाए रहता है. भारत और चीन के बीच जारी तनाव के चलते भारत में चीन की तैनाती के हिसाब से अपनी तैनाती की है जिसे मिरर डिप्लायमेंट कहा जाता है. तकरीबन 50000 भारतीय सैनिक इस वक़्त लद्दाख में तैनात हैं. एक बड़े अभियान के तहत राशन, केरोसिन हीटर, खास कपड़े, टेंट्स और दवाइयों को पूरी सर्दी के लिए जमा कर लिया गया है.

बेहद ठंडे मौसम में सैनिकों के इस्तेमाल के लिए खास कपड़ों के 11000 सेट हाल ही में अमेरिका से लिए गए हैं. वहीं ऊंचाई और सुपर हाई अधिक ऊंचाई में तैनात सैनिकों के लिए गरम रहने वाले टेंट और साथ साथ लद्दाख में तैनात सभी सैनिकों के लिए स्मार्ट कैंप तैयार कर लिए गए हैं. जिनमें बिजली, पानी, कमरे को गर्म रखने वाले हीटर, स्वच्छता और स्वास्‍थ्‍य संबंधी सभी ज़रूरतों को पूरा कर लिया गया है. ऊंचाई वाले स्‍थानों पर तैनात सैनिकों को तैनाती से पहले एक तयशुदा प्रक्रिया से गुजारा जाता है. इस कहते हैं एक्लमटाइजेशन प्रोसेस, जो कि तीन स्टेज में बाटे गए हैं. स्टेज 1 यानी 9 से 12 हजार फीट पर तैनाती से पहले सैनिक को उसी वातावरण में 6 दिन तक एक्लमटाइज़ेशन किया जाता है, उसके बाद स्टेज 2 शुरू होता है जो कि 12 से 15 हज़ार फीट की ऊंचाई पर तैनाती से पहले चार दिन के एक्लमटाइजेशन किया जाता है और 15 हज़ार से उपर की उचाई जिसे स्टेज 1 कहा जाता है उसके लिए 4 दिन या फिर हर 1000 फीट पर दो दिन का एक्लमटाइज़ेशन किया जाता है.

ये स्टेज इसलिए पार किए जाते हैं क्योंकि जैसे जैसे ऊंचाई बढ़ती है ऑक्सीजन कम होने लगती है और सर्दी भी बहुत होती है तो ऐसे में शरीर को उसी वातावरण में गुज़ारा जाता है जिससे जवानों का शरीर उसका आदी हो जाए और जानलेवा बीमारी जैसे HIGH ALTITUDE PULMONARY EDEMA यानि HAPE से निपटने को तैयार हो सकें. बहरहाल अभी तो पोस्ट तक पहुंचने वाले रास्ते खुले हुए हैं जिससे फिलहाल एडम सपोर्ट में कोई परेशानी नहीं लेकिन जैसे ही बर्फबारी के चलते ऊपर चोटियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा तब मुश्किलें बढ़नी तय हैं.
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