• Home
  • »
  • News
  • »
  • nation
  • »
  • OPINION: मुफ्ती का गढ़ अनंतनाग क्यों मना रहा PDP-BJP के 'ब्रेकअप' का जश्न?

OPINION: मुफ्ती का गढ़ अनंतनाग क्यों मना रहा PDP-BJP के 'ब्रेकअप' का जश्न?

महबूबा मुफ्ती (फाइल)

महबूबा मुफ्ती (फाइल)

मुफ्ती मोहम्मद सईद से लेकर महबूबा मुफ्ती तक अनंतनाग पीडीपी का गढ़ रहा है. लेकिन पीडीपी-बीजेपी के 'तलाक' के बाद यहां कई लोग जश्न मानते दिखे....

  • Share this:
    जम्मू-कश्मीर में तीन साल तक सरकार चलाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के रास्ते जुदा हो गए. बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. राज्य में फिलहाल राज्यपाल शासन लागू है. महबूबा सरकार गिरने के बाद जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात और राजनीतिक हलचल पर अपना नज़रिया रख रहे हैं फ्रीलांस जर्नलिस्ट आकाश हसन...

    मुफ्ती मोहम्मद सईद से लेकर महबूबा मुफ्ती तक अनंतनाग पीडीपी का गढ़ रहा है. पीडीपी-बीजेपी के 'तलाक' का जश्न मानने यहां युवा भारी मात्रा में जुटे थे. ये लड़के मोबाइल पर महबूबा मुफ्ती का एक पैरोडी वीडियो देख रहे थे. महबूबा मुफ्ती की हालत को देखकर ये लड़के ठहाके लगाकर हंसने लगे. इस मॉर्फ्ड वीडियो में दिल टूटने को लेकर बॉलीवुड का एक मशहूर गाना भी बज रहा था.

    ये घटना अनंतनाग के फतेहपुरा के नंदेसक्रिप्ट गांव की है. पीडीपी संस्थापक और महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद का इस इलाके से खास नाता रहा है. सईद ने यहां से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की थी. मुफ्ती मोहम्मद सईद अनंतनाग से दो बार विधायक चुने गए थे. दोनों ही बार उन्हें फतेहपुरा से अपार समर्थन मिला था.

    OPINION: लोकसभा के रण में छत्रपों के साथ की कोशिश में राहुल, पर राह में मुश्किलें अनेक

    पीडीपी के ज्यादातर कोर वोटर्स फतेहपुरा गांव के हैं. लेकिन, पीडीपी-बीजेपी की 'दोस्ती' टूटने के बाद यहां के लोगों ने खूब जश्न मनाया. महबूबा सरकार गिरने के बाद अनंतनाग में एक राहत की स्थिति देखी गई, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यहां महबूबा सरकार गिरने की खुशी कुछ ऐसी थी जैसे कोई बुरा सपना खत्म हुआ हो और लोगों ने नई सुबह देखी.


    गांव के निवासी भट (50) लंबे वक्त से पीडीपी के समर्थक और वोटर रहे हैं. पूरा नाम नहीं छापने की शर्त पर उन्होंने बताया, "जब मुफ्ती मोहम्मद सईद 2002 में सीएम थे, हम सभी राहत की सांस लेते थे. तब इकवान (नागरिक सेना) कैंप हुआ करता था. लेकिन, महबूबा मुफ्ती के सीएम बनने के बाद चीजें बदल गई. इकवान कैंप हटा दिया गया."

    2014 के चुनाव अभियान का जिक्र करते हुए भट बताते हैं, "मुफ्ती मोहम्मद सईद अक्सर कहते थे कि भगवा ब्रिगेड भारत को साफ कर रहा है. मुझे इसबार बहुमत दीजिए, तभी मैं कश्मीर समस्या के समाधान के साथ आ पाऊंगा."

    भट के मुताबिक, "चुनाव के नतीजे आने के बाद पीडीपी ने सभी चीजों को दरकिनार कर उसी भगवा ब्रिगेड से दोस्ती कर ली, जिसके खिलाफ उन्होंने लोगों को आगाह किया था."तब मुफ्ती के तर्क का जिक्र करते हुए भट ने बताया, "हम तब श्रीनगर गए और मुफ्ती को बताया कि लोग आपके फैसले का मजाक बना रहे हैं. मुफ्ती का जवाब था कि वक्त बताएगा कि मैं सही हूं. तब तक इंतजार करना चाहिए."


    जनवरी 2016 में मुफ्ती का इंतकाल हो गया. इसके 10 महीने बाद फिर से नॉर्थ पोल और साउथ पोल एक हुए. अपनी पिता की मौत के सहानुभूति के बल पर महबूबा मुफ्ती ने अनंतनाग उपचुनाव बड़ी आसानी से जीत लिया. फिर सीएम बनीं.

    इसी बीच कश्मीर में हिंसक घटनाएं ज्यादा हुईं, जो लगातार बढ़ रही हैं. 8 जुलाई 2016 में अनंतनाग के बमदूरा गांव में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी का एनकाउंटर हुआ. इसके बाद कुछ ही दिनों के अंदर इलाके में कई लोगों की हत्या हुई, जबकि कई लोग जख्मी भी हुए.

    जल्द ही पीडीपी-नेशनल कॉ़न्फ्रेंस के बीच तल्खियां भी सामने आने लगी. भट कहते हैं, "बेगुनाह लोगों की हत्या के बाद मैंने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. गांव में प्रो-फ्रीडम रैलियां निकाली गईं. जिसके बाद पुलिस ने छापा मारा. आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लोगों को मारा-पीटा गया. हम अब तक इन चीजों से उबर नहीं पाए हैं."

    फतेहपुरा ने इसके पहले कभी पीडीपी-बीजेपी के खिलाफ नागरिकों का विरोध नहीं देखा था. लेकिन, हाल में चीजें तेजी से बदली हैं. एक महीने पहले फतेहपुरा के एक युवक ने बंदूक थाम ली. वह अच्छे-खासे संपन्न परिवार से संबंधित था. लेकिन, उसकी गर्भवती पत्नी ने उसे छोड़ दिया था.


    कश्मीर में बीते दो सालों में कुल 200 स्थानीय आतंकी मारे गए हैं. इनमें से ज्यादातर साउथ कश्मीर के रहने वाले थे, जिसमें अनंतनाग भी शामिल है. मौजूदा वक्त में माना जा रहा है कि 100 से ज्यादा स्थानीय आतंकी साउथ कश्मीर में सक्रिय हैं.

    इसलिए कश्मीर के हालात और खराब हुए हैं. अनंतनाग में उपचुनाव कई महीनों से अटके पड़े हैं. हिंसक घटनाओं के कारण चुनाव आयोग को इलेक्शन रद्द करना पड़ा. इलेक्शन रद्द करते हुए चुनाव आयोग ने अनंतनाग की हालात को भयानक करार दिया था. बीजेपी ने जब पीडीपी से समर्थन वापस लिया, तो अनंतनाग में आतिशबाजी हुई. कई गांवों में मिठाइयां बांटी गई. जश्न मनाया गया.

    पुलवामा में गवर्नंमेट डिग्री कॉलेज के छात्र सलीम अहमद बताते हैं, "हामारे लिए पीडीपी और आरएसएस में कोई अंतर नहीं है. हम नफरत की जिंदगी जी रहे हैं. दुर्भाग्य का विषय है कि एक छात्र के तौर पर हम स्कूल या कॉलेज में महफूज नहीं हैं."

    सलीम आगे कहते हैं, "पिछले साल हमारे कॉलेज में सेना के जवान घुस आए थे. पिछले साल हिंसक घटनाओं के बाद कॉलेज करीब एक महीने तक बंद रहा था."

    शोपियां में कारोबारी शफीक अहमद डार कहते हैं, "पीडीपी-बीजेपी की 'दोस्ती' के बाद अजीब सी खुशी है. महबूबा मुफ्ती एक आदर्शवादी दुनिया में जी रही थीं. अल्लाह उन्हें कभी माफ नहीं करेगी. देखिए घाटी में कितने लोग मारे गए हैं. महबूबा सरकार में सारी हिप्पोक्रेसी (पाखंड) अपनी हदें तोड़ चुका था."


    वहीं, अनंतनाग में साइकोलॉजी की स्टूडेंट मिर आसमा कहती हैं, "पीडीपी ने ये साबित कर दिया कि उसका सारा फोकस सत्ता हासिल करने में था. पीडीपी को साल 2016 में ही इस्तीफा दे देना चाहिए था, जब 100 नागरिकों की हत्या हुई थी. लेकिन, उसने बीजेपी के साथ 'दोस्ती' कायम रखने का फैसला लिया. उसकी का नतीजा है कि पीडीपी ने हमेशा के लिए सबकुछ खो दिया.

    (लेखक फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन