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शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में स्मृति ईरानी, क्या नंदीग्राम बनेगी 2019 की अमेठी?

नंदीग्राम से शुवेंदु अधिकारी ने भरा पर्चा.

नंदीग्राम से शुवेंदु अधिकारी ने भरा पर्चा.

West Bengal Election: शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट (Nandigram Seat) से उतरने का फैसला किया है. यहां उनका मुकाबला सीएम ममता बनर्जी से होगा. इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि यहां अमेठी वाला इतिहास दोहराया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 3:46 PM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में इस बार सबकी नजरें नंदीग्राम में लगी हुई है. नंदीग्राम सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प है, एक ओर इस सीट से राज्य की मुखिया ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) हैं तो दूसरी तरह टीएमसी से बीजेपी में शामिल और एक वक्त ममता बनर्जी के सिपहसालार रहे शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) हैं. मुकाबला कड़ा होने के आसार है. लेकिन नामांकन के वक़्त स्मृति ईरानी का होना अपने आप में कई बातों की ओर ध्यान दिलाता है. क्या विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम, लोकसभा की अमेठी (Amethi) साबित तो नहीं होने वाली है.

देश मे अमेठी लोकसभा को गांधी नेहरू परिवार के गढ़ के तौर पर जाना जाता था. कहा जाता था कि इस लोकसभा से कांग्रेस और खास तौर पर गांधी-नेहरू परिवार को चुनाव में हराना आसान नही था.

अमेठी का राजनीतिक इतिहास
अमेठी लोकसभा सीट का निर्माण 1967 में किया गया था. यह सीट तभी से कांग्रेस का गढ़ रही है और 2019 से पहले कांग्रेस केवल 2 बार ही यहां से हारी है. आपातकाल के बाद हुए 1977 लोकसभा चुनाव और 1998 चुनाव में पार्टी को यहां से हार का मुंह देखना पड़ा था. अगर अमेठी से गांधी परिवार के संबंध की बात करें तो सबसे पहले 1980 लोकसभा चुनाव में राहुल के चाचा संजय गांधी इस सीट से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की.
उनकी मौत के बाद राजीव गांधी यहां से सांसद बने. राजीव गांधी यहां से 4 बार सांसद बने. उनकी मौत के बाद 1999 में सोनिया गांधी ने यहां से चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की. 2004 और 2009 में राहुल गांधी इस सीट से चुनाव लड़े और आसान जीत दर्ज की.



लेकिन 2014 में फ़िज़ा बदल गयी. बीजेपी ने इस सीट से ही कांग्रेस के बड़े नेता और गांधी परिवार के राहुल गांधी को पटखनी देने की रणनीति बनाई और राहुल गांधी के सामने बीजेपी के तेज तरार नेता स्मृति ईरानी को चुनाव लड़ाया. 2014 में ज्यादा वक्त नहीं मिलने की वजह से स्मृति ईरानी को हार का सामना करना पड़ा. लेकिन स्मृति ईरानी ने अमेठी को अपना घर बना लिया, लगातार इस क्षेत्र में वे काम करती रहीं. 2019 में बीजेपी ने एक बार फिर स्मृति ईरानी पर विश्वास जताया. फिर परिणाम क्या है सबके सामने है. कांग्रेस का अभेद्य कीला माना जाने वाले अमेठी में राहुल गांधी को स्मृति ईरानी ने जबरदस्त शिकस्त दी.

अमेठी से स्मृति ईरानी की जीत बीजेपी के लिए एक बड़ा प्रतीक बन गया है. यही वजह है कि नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकरी के नामांकन के वक़्त स्मृति ईरानी को पार्टी ने विशेष तौर पर भेजा. बीजेपी की रणनीति साफ है कि ममता बनर्जी को टीएमसी के गढ़ और उनकी प्रयोगशाला में ही उन्हें मात दी जाए.

बीजेपी की बड़ी रणनीति
2013 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने के बाद से बीजेपी ने अपने चुनावी नीति और रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं. कई रणनीतियों के अलावा बीजेपी ने एक रणनीति ये भी बनाई की विपक्ष के बड़े और कद्दावर नेता को उनकी ही ज़मीन में ढेर किया जाए यानी हराया जाए. यही वजह है कि 2013 से लेकर अब तक बीजेपी विपक्ष के बड़े नेताओं को किसी तरह का वॉकओवर ना देते हुए उसके सामने ऐसे चुनौती पेश की, जिससे ना केवल वे नेता अपने क्षेत्र में उलझ कर रह गए और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा.

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दिग्गजों को उनके घर में पटखनी देने का रिकॉर्ड

1. ज्योतिरादित्य सिंधिया
अमेठी तो केवल एक उदाहरण मात्र है. बीजेपी के कृष्णपाल सिंह ने ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके परंपरागत गुना सीट से एक लाख 25 हज़ार वोटों से शिकस्त दी.

2. डिंपल यादव
देश के बड़े सियासी कुनबे मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव को कन्नौज से 2019 में बीजेपी के उम्मीदवार सुब्रत पाठक ने हरा दिया. कन्नौज लोहिया की परंपरागत सीट मानी जाती थी. कन्नौज वो सीट है, जहां से समाजवाद की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले राम मनोहर लोहिया ने 1967 में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. मुलायम सिंह यादव साल 1999 में इस सीट से सांसद का चुनाव लड़े.

3. मीसा भारती
2019 लोकसभा चुनाव में लालू यादव परिवार की साख़ नहीं बचा पाईं थीं लालू यादव की बेटी मीसा भारती. मीसा भारती को पाटलिपुत्र सीट पर बीजेपी उम्मीदवार उनके ही सगे चाचा राम कृपाल यादव से 39 हज़ार वोटों से शिकस्त दी थी.

4. चौधरी अजीत सिंह
2019 के लोकसभा चुनाव में एक बड़ी हार हुई थी, चौधरी विरासत के चौधरी अजित सिंह की. राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख चौधरी अजित सिंह को बीजेपी उम्मीदवार संजय बालियान ने मुज़्जफ़्फरनगर सीट से हरा दिया था.

5. दुष्यंत चौटाला
देश के सबसे युवा सांसद का रिकॉर्ड दर्ज करने वाले दुष्यंत चौटाला को 2019 लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. हरियाणा की हिसार सीट से दुष्यंत चौटाला को बीजेपी उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह ने तीन लाख से ज़्यादा वोटों से हराया था.
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