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चाह कर भी सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म इतने कम समय में नहीं कर सकते सरकार की सभी गाइड लाइन फॉलो, जानें कितना समय लगेगा

कंपनियों को सिक्‍योर कंप्‍यूनिकेशन प्रोटोकाल का उल्‍लंघन करना पड़े सकता है

Social Media Guide line- साइबर एक्‍सपर्ट बताते हैं कि सरकार की सभी गाइड लाइन फॉलो करने के लिए सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म को समय चाहिए. क्‍योंकि तकनीकी रूप में काफी चेंजेस करने होंगे.

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नई दिल्‍ली. सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म (social media platform) चाहकर भी इतने कम समय में सरकार (government) की सभी गाइडलाइन फॉलो नहीं कर सकते हैं. इसके लिए कम से कम एक साल का समय चाहिए होगा. साइबर एक्‍सपर्ट (Cyber ​​Expert) बताते हैं कि सभी गाइड लाइन (guidelines) फॉलो करने के लिए तकनीकी (technical) रूप में भारी बदलाव की जरूरत पड़ेगी, जो कम समय में संभव नहीं हैं. लेकिन एक्‍सपर्ट ने यह जरूर कहा, जो तत्‍काल संभव हो सकता है, वो सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म को करना ही चाहिए.

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और सार्वजनिक नीति थिंक टैंक इंडिया फ्यूचर फाउंडेशन के संस्थापक कनिष्क गौर का कहना है कि सरकार की गाइड लाइन के अनुसार सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म को एंड टू एंड कंम्‍यूनिकेशन सुरक्षित रखना होगा, तभी वो बता पाएगा कि मैसेज कहां से जनरेट हुआ है. व्‍हाट्सएप के देशभर में करीब 50 करोड़ यूजर्स हैं. इतने लोगों का डाटा सुरक्षित रखना अपने आपमें चैलेंज है. इसके अलावा सरकार की सभी गाइड लाइन फॉलो करने के लिए सिक्‍योर कंप्‍यूनिकेशन प्रोटोकाल का उल्‍लंघन भी करना पड़ सकता है. इसलिए सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म को इसका विकल्‍प तलाशना होगा. करोड़ों लोगों का डाटा स्‍टोर करने के लिए इसी में समय लग जाएगा. इसके अलावा डाटा स्‍टोर होने के बाद कोई हैक न कर सके, यह भी सुनिश्चित करना होगा.

वहीं, मुंबई के साइबर सिक्‍योरटी कंसल्‍टेंट और वी4वेब साइबर सिक्‍योरिटी के फाउंडर रीतेश भाटिया भी मानते हैं कि सारे बदलाव‍ इतने कम समय में संभव नहीं हैं, इसके लिए कंपनियों को अलग मैकेनिज्‍म निकालना होगा. पूरा सेटअप स्‍थापित करना होगा. तकनीकी बदलाव इतनी जल्‍दी नहीं किए जा सकते हैं. लेकिन लोगों की प्राइवेसी के साथ-साथ देश की सुरक्षा भी जरूरी है. सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म में कुछ भी गलत चल रहा हो, तो उसकी शिकायत के लिए कंपनियों को एक डेडीकेटेड अधिकारी तैनात करना चाहिए. सरकार के ये निर्देश कंपनियां आसानी से पालन सकती हैं. रही बात लोगों की प्राइवेसी की, तो इसके लिए कंपनियों को समय देना चाहिए, जिससे वो विकल्‍प तलाश सकें.