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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केसः सभी 22 आरोपी बरी, जज ने कहा- 'मैं दुखी हूं'

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केसः सभी 22 आरोपी बरी, जज ने कहा- 'मैं दुखी हूं'

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने से हुई है, लेकिन गोली 22 आरोपियों में से किसने गोली चलाई थी ये साबित नहीं होता.

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने से हुई है, लेकिन गोली 22 आरोपियों में से किसने गोली चलाई थी ये साबित नहीं होता.

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने से हुई है, लेकिन गोली 22 आरोपियों में से किसने गोली चलाई थी ये साबित नहीं होता.

    मुंबई की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई द्वारा दिए गए सबूतों से ये साबित नहीं होता है कि सोहराबुद्दीन शेख उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति की हत्या किसी साजिश के तहत हुई थी.

    फैसले में जज एसजे शर्मा ने कहा कि, 'सरकारी मशीनरी ने काफी कोशिश की. 210 गवाहों को कोर्ट के सामने पेश किया गया लेकिन संतोषजनक सबूत सामने नहीं आ सके. उन्होंने कहा कि वो इस मामले में असहाय हैं और कोर्ट सोहराबुद्दीन और प्रजापति के परिवार वालों के लिए दुखी है. लेकिन कोर्ट कोई भी फैसला सिर्फ सबूतों के आधार पर ही दे सकता है.'

    सोहराबुद्दीन के परिवार के वकील वहाब खान ने कहा कि कोर्ट ने स्वीकार किया है कि शोहराबुद्दीन को गोली लगी थी लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि 22 आरोपियों में से किसने गोली चलाई थी. कोर्ट ने 210 गवाहों से पूछताछ की जिसमें 92 गवाह पलट गए.

    इससे पहले कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 38 में से 16 लोगों को बरी कर दिया था जिनमें गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात के पूर्व पुलिस प्रमुख पीसी पांडेय और गुजरात के पूर्व सीनियर पुलिस अधिकारी डीजी वंज़ारा शामिल हैं.

    बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन की वंजारा सहित चार अन्य पुलिस अधिकारियों को बरी करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था. गुजरात पुलिस ने बताया कि सोहराबुद्दीन को 2005 में मारा गया क्योंकि वो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारना चाहता था.

    सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने से हुई है, लेकिन गोली 22 आरोपियों में से किसने गोली चलाई थी ये साबित नहीं हुआ. इस मामले में 21 पुलिसवाले आरोपी थे, जबकि एक आरोपी अहमदाबाद के अरहान फार्म का मालिक था. आरोप था कि कौसर बी को मारने से पहले अरहान फार्म में ही रखा गया था. आइए एक नजर डालते हैं उन 22 आरोपियों के नामों पर जो 13 साल बाद इस मामले से बरी हुए हैं.



    1. एम एल परमार- गुजरात एटीएस के डीएसपी.
    2. एन एच ढाबी- गुजरात एटीएस के इंस्पेक्टर.
    3. बालकृष्ण चौबे- घटना के वक्त गुजरात पुलिस के सब इंस्पेक्टर थे, अब इंस्पेक्टर हैं.
    4. अब्दुल रहमान- पुलिस इंस्पेक्टर, राजस्थान पुलिस
    5. हिमांशू सिंह राजावत- सब इंस्पेक्टर, राजस्थान पुलिस
    6. श्याम सिंह चरण- सब इंस्पेक्टर, राजस्थान पुलिस
    7. अजय कुमार परमार- पुलिस इंस्पेक्टर, गुजरात पुलिस
    8. संताराम शर्मा- पुलिस कॉन्स्टेबल, गुजरात पुलिस
    9. नरेश चौहान- पुलिस इंस्पेक्टर, गुजरात पुलिस
    10. विजय कुमार राठौड़- इंस्पेक्टर, गुजरात पुलिस
    11. घटामानेनी श्रीनिवास राव- सब इंस्पेक्टर, आंध्र प्रदेश पुलिस
    12 आशीष पांड्या- सब इंस्पेक्टर, गुजरात पुलिस
    13. नारायण सिंह चौहान- एएसआई, राजस्थान पुलिस
    14. युद्धवीर सिंह चौहान- पुलिस कॉन्स्टेबल, राजस्थान पुलिस
    15. करतार सिंह जाट- पुलिस कॉन्स्टेबल, राजस्थान पुलिस
    16. जीतूसिंह सोलंकी- कॉन्स्टेबल, गुजरात पुलिस
    17. कांजीभाई कुच्ची- कॉन्स्टेबल, गुजरात पुलिस
    18. विनोद कुमार- कॉन्स्टेबल, गुजरात पुलिस
    19. किरणसिंह चौहान- हेड कॉन्स्टेबल, गुजरात पुलिस
    20. करण सिंह सिसोदिया-  कॉन्स्टेबल, गुजरात पुलिस
    21. रमनभाई पटेल- डीएसपी गुजरात पुलिस
    22. राजेंद्र कुमार जीरावाला- अरहान फार्म का मालिक

    Tags: Ahmedabad, Encounter, Fake Encounter Case, Gujarat, Rajasthan police

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