यूपी चुनाव से पहले मायावती की मुश्किलें बढ़ीं, अखिलेश से मिले बागी विधायक, कुछ बनाना चाहते हैं अपनी पार्टी

2019 लोकसभा चुनाव में मायावती और अखिलेश यादव ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.

UP Politics Update: हाल ही में लालजी वर्मा और राम अचल राजभर को पार्टी से निकाले जाने के चलते पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. दोनों राजनेता राज्य की राजनीतिक की अति पिछड़ी जातियों के बड़े चेहरे थे.

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    लखनऊ. उत्तर प्रदेश में चुनाव से कुछ महीनों पहले ही मायावती के सामने सियासी संकट गहराता जा रहा है. खबर है कि बहुजन समाज पार्टी के करीब 12 बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को याचिका सौंपी है. इसमें उन्हें सदन में 'अलग पार्टी' की पहचान देने की मांग की है. सूत्रों ने जानकारी दी है कि सभी विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं होना चाहते हैं. बीते मंगलवार को ही करीब 9 विधायकों ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी.

    अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद ही बसपा में बगावत की अटकलें तेज हो गई थीं. सूत्रों ने कहा था कि नेता उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले ही दल बदलकर सपा में शामिल हो जाएंगे. सदन में बसपा के पास 18 विधायक थे. इनमें से 9 को बीते साल बर्खास्त कर दिया गया था. सूत्र बताते हैं कि इनमें से कुछ ने सपा का दामन थाम लिया था, लेकिन सभी यादव खेमे में शामिल नहीं हुए थे.

    हाल ही में लालजी वर्मा और राम अचल राजभर को पार्टी से निकाले जाने के चलते पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. दोनों राजनेता राज्य की राजनीतिक की अति पिछड़ी जातियों के बड़े चेहरे थे. इसके अलावा वे बसपा के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे. बीते साल पांच विधायक यादव के साथ हो लिए थे. इनमें असलम चौदरी, असलम रैनी, मुज्तबा सिद्दीकी, हकम लाल बिंद और गोविंद जाटव का नाम शामिल है.

    बसपा विधायक उमा शंकर सिंह ने आरोप लगाया था कि पार्टी से बगावत करने वाले पांच विधायकों को पैसों का 'लाभ' दिया जा रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसा दलित नेता रामजी गौतम को राज्यसभा में जान से रोकने के लिए किया गया था.

    सपा-बसपा में रिश्ते तल्ख
    2019 लोकसभा चुनाव में मायावती और अखिलेश यादव ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. उस दौरान राज्य में 15 सीटें गठबंधन के खाते में आई थीं. इनमें से बसपा को 10 सीटें मिली थीं. हालांकि, बाद में मायावती ने गठबंधन तोड़ दिया था. जिसके बाद दोनों नेताओं ने कहा था कि वे आगे कोई भी चुनाव साथ नहीं लड़ेंगे.

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