सोनभद्र नरसंहार: पीड़ित परिवारों से मिलीं प्रियंका गांधी, कांग्रेस देगी 10-10 लाख की मदद

सोनभद्र नरसंहार के पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए अड़ी प्रियंका गांधी ने लिखा, 'मैं नरसंहार का दंश झेल रहे गरीब आदिवासियों से मिलने, उनकी व्यथा-कथा जानने आयी हूं.'

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 1:59 PM IST
सोनभद्र नरसंहार: पीड़ित परिवारों से मिलीं प्रियंका गांधी, कांग्रेस देगी 10-10 लाख की मदद
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठी हैं.
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Updated: July 22, 2019, 1:59 PM IST
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में मारे गए 10 लोगों के परिवार से मुलाकात की और कांग्रेस की तरफ से पीड़ित परिवारों को 10-10 रुपये की सहायता देने का ऐलान किया.

सोनभद्र नरसंहार के पीड़ितों से मिलने को लेकर अड़ी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को प्रशासन ने सोनभद्र जाने की इजाजत नहीं दी. इस बीच पीड़ित परिवारों की महिलाएं मिर्जापुर स्थित चुनार गेस्ट हाउस आकर कांग्रेस महासचिव से मिलीं. पीड़ित महिलाओं से मिलकर प्रियंका गांधी काफी भावुक हो गईं. उन्होंने महिलाओं के गले मिलकर ढांढस बंधाया. इस दौरान प्रियंका की आंखों से आंसू छलक आए.

पीड़ितों से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने कहा, 'मैं उनसे (सोनभद्र के पीड़ितों से) मिलीं और उनका हाल-चाल लिया. यहां आने का मेरा मकसद पूरा हो गया. कांग्रेस इस घटना में मारे गए लोगों के परिवार को 10-10 लाख की सहायता देगी.' इसके बाद प्रियंका गांधी मिर्जापुर से लौट आईं.


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प्रियंका गांधी ने आंचल से पोंछे पीड़ित महिलाओं के आंसू
इससे पहले प्रियंका गाधी ने साफ किया था कि जब तक वह पीड़ित परिवारों से मिल नहीं लेतीं, तब तक वापस नहीं जाएंगी. प्रियंका गांधी ने कहा, ' मैं कानून का उल्लंघन नहीं करना चाहती. मैंने प्रशासन को कहा है कि अगर सोनभद्र में धारा 144 लागू है तो वो किसी और जगह मुझे मिलवा सकते हैं. प्रियंका गांधी ने कहा कि वो पीड़ित परिवारों से मिर्जापुर या वाराणसी में भी मिल सकती हैं. उन्होंने कहा, 'एक बार पीड़ितों से मिल लूं फिर चली जाऊंगी, लेकिन उनसे मिले बिना कहीं नहीं जाऊंगी.'


मिर्जापुर के चुनार गेस्ट हाउस में रुकी प्रियंका गांधी से मिलने के लिए पीड़ित परिवार के लोग वहां पहुंचे थे. हालांकि प्रियंका के मुताबिक, प्रशासन ने उन लोगों को उनसे मिलने नहीं दिया और गेस्ट हाउस के गेट पर ही रोक दिया. प्रियंका ने यह आरोप लगाया कि उन्होंने जब पता चला कि वे लोग गेस्ट आए हैं तो उनसे मिलने गेट तक जा रही थीं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें गेट पर जाने तक की इजाजत नहीं दी.


वहीं सत्ताधारी पार्टी द्वारा इसे पॉलिटिकल टूरिज्म बताए जाने पर प्रियंका गांधी ने कहा, 'यहां नरसंहार हुआ है, 10 लोग मारे गए हैं और वे लोग ऐसी बात कह रहे हैं. हम यहां हैं क्योंकि यही कांग्रेस है. हर कांग्रेसी कार्यकर्ता यहां है क्योंकि हमारी यही विचारधारा है. हम गरीबों के साथ खड़े रहेंगे.'

इस पहले शनिवार सुबह उन्होंने एक ट्वीट कर पूछा था, क्या इन आँसुओं को पोंछना अपराध है?



बता दें कि प्रियंका गांधी वाड्रा शुक्रवार को पीड़ितों से मिलने को सोनभद्र के लिए निकली थीं, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें वहां हिरासत में ले लिया. प्रियंका ने जमानत के लिए पर्सनल बॉन्ड देने से इनकार कर दिया और मिर्जापुर जिले के एक गेस्टहाउस में ठहरीं, जहां उन्हें अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठने के बाद ले जाया गया. वह लगातार मांग करती रहीं कि उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने और आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए.

पुलिस उपमहानिरीक्षक पीयूष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक चुनार के गेस्टहाउस में गांधी के संपर्क में थे ताकि उन्हें आगे की यात्रा न करने के लिए राजी किया जा सके.


शुक्रवार देर रात तक प्रशासन और प्रियंका के बीच गतिरोध खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिखा. अतिथिगृह में प्रियंका के साथ मौजूद उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा, 'हमने स्पष्ट रूप से कहा है, या तो हम पीड़ितों से मिलें या हमें जेल भेजें.'

(AP Photo/Anshul Mishra)


प्रियंका ने किया ट्वीट
शुक्रवार रात को कई ट्वीट्स में गांधी ने अपनी मांगों को दोहराया और कहा कि वह प्रभावित ग्रामीणों से मिलने के अपने फैसले को नहीं बदलेंगीं.

प्रियंका ने लिखा-  'मैं नरसंहार का दंश झेल रहे गरीब आदिवासियों से मिलने, उनकी व्यथा-कथा जानने आयी हूँ. जनता का सेवक होने के नाते यह मेरा धर्म है और नैतिक अधिकार भी. उनसे मिलने का मेरा निर्णय अडिग है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा मुझे पिछले 9 घंटे से गिरफ़्तार करके चुनार किले में रखा हुआ है. प्रशासन कह रहा है कि मुझे 50,000 की जमानत देनी है अन्यथा मुझे 14 दिन के लिए जेल की सज़ा दी जाएगी, मगर वे मुझे सोनभद्र नहीं जाने देंगे ऐसा उन्हें ‘ऊपर से ऑर्डर है’.

प्रियंका ने लिखा कि 'मैंने न कोई क़ानून तोड़ा है न कोई अपराध किया है.बल्कि सुबह से मैंने स्पष्ट किया था कि प्रशासन चाहे तो मैं अकेली उनके साथ पीड़ित परिवारों से मिलने आदिवासियों के गाँव जाने को तैयार हूँ या प्रशासन जिस तरीके से भी मुझे उनसे मिलाना चाहता है मैं तैयार हूँ.'

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(PTI Photo)


प्रियंका ने कहा कि....

प्रियंका ने कहा कि - 'मगर इसके बावजूद उप्र सरकार ने यह तमाशा किया हुआ है. जनता सब देख रही है. मैं इस संदर्भ में जमानत को अनैतिक मानती हूँ और इसे देने को तैयार नहीं हूँ. मेरी साफ माँग है कि मुझे पीड़ित आदिवासियों से मिलने दिया जाय. सरकार को जो उचित लगे वह करे. अगर सरकार पीड़ितों से मिलने के अपराध के लिए मुझे जेल में डालना चाहें तो मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूँ.'

(PTI Photo)


ट्रामा सेंटर गईं थी प्रियंका
इससे पहले, पूर्वी यूपी की प्रभारी कांग्रेस नेता ने सोनभद्र से 60 किलोमीटर दूर वाराणसी के बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में कुछ घायलों से मुलाकात की थी. सोनभद्र की ओर जाते समय उसे वाराणसी-मिर्जापुर मार्ग पर नारायणपुर में रोका गया. कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने वाले राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई को अवैध गिरफ्तारी कहा.

जैसे ही कांग्रेस नेता समर्थन में बाहर आए और पार्टी कार्यकर्ताओं ने यूपी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, तृणमूल कांग्रेस ने घोषणा की कि वह शनिवार को राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन की अध्यक्षता में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे. कांग्रेस ने भी अपने कार्यकर्ताओं को सभी राज्यों में धरने के विरोध में धरने का नेतृत्व करने के लिए कहा है.

यूपी वेस्ट के कांग्रेस महासचिव प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रियंका को हिरासत में लेना लोकतंत्र का 'खुला अपमान' है. उन्होंने एक ट्वीट में कहा, 'पीड़ितों के परिवारों से मिलना और संवेदना व्यक्त करना जन प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है. सरकार ने लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया है, जो बहुत ही निंदनीय है.'

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(PTI Photo)


कांग्रेस ने पूछा- 

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक ट्वीट में पूछा कि 'क्या यूपी सरकार गांधी को गिरफ्तार करके और उन्हें चुनार में रखकर 10 आदिवासियों की हत्याओं को कवर कर पाएगी?'

यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि स्थिति आगे न बढ़े, चाहे वह सत्ता पक्ष हो या विपक्ष. उन्होंने कहा, 'विपक्ष को लोगों के बीच सामंजस्य बनाने में मदद करनी चाहिए.'

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First published: July 20, 2019, 11:10 AM IST
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