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बधाई के बहाने सोनिया गांधी और राहुल ने उद्धव ठाकरे को ये मैसेज तो नहीं दिया!

Piyush Babele | News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 7:23 PM IST
बधाई के बहाने सोनिया गांधी और राहुल ने उद्धव ठाकरे को ये मैसेज तो नहीं दिया!
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पत्र लिखकर उद्धव ठाकरे से शपथ ग्रहण समारोह में न आ पाने के लिए माफी मांगी है (फाइल फोटो, PTI)

कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पत्रों की भाषा को गौर से पढ़ें तो यह पत्र बधाई से ज्यादा आने वाली चुनौतियों से आगाह करने वाले पत्र लगते हैं.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 7:23 PM IST
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नई दिल्ली. उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के रूप में पहली बार मातोश्री का कोई सदस्य देश के सबसे अमीर राज्य का मुख्यमंत्री (CM) बनने जा रहा है. देश की व्यावसायिक राजधानी के शिवाजी पार्क (Shivaji Park) में जब ठाकरे शपथ ले रहे होंगे तो उन्हें बधाइयों के ढेर में दो बधाइयां खासकर याद रहेंगी जो उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पत्रों में दी गई है. इन पत्रों की भाषा को गौर से पढ़ें तो यह पत्र बधाई से ज्यादा आने वाली चुनौतियों से आगाह करने वाले पत्र लगते हैं. इनकी भाषा से यह साफ होता है कि ये पत्र किसी आपद धर्म का निर्वाह करने के लिए लिखे गए हैं.

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने अपने पत्र के पहले पैराग्राफ में नव नियुक्त मुख्यमंत्री को बधाई दी और साथ ही शपथग्रहण समारोह में शामिल न हो पाने पर खेद व्यक्त किया. इसके बाद सोनिया गांधी ने साफ लिखा '' शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ऐसे बेहद असामान्य हालात में एक साथ आए हैं, जब देश भाजपा की तरफ से अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहा है. राजनैतिक वातावरण जहरीला हो गया है और अर्थव्यवस्था ढह गई है. किसान आफत के मारे हैं.'' इसके आगे सोनिया गांधी नए मुख्यमंत्री को याद दिलाती हैं '' शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस एक साझा कार्यक्रम पर सहमत हुए हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि तीनों पार्टियां इस प्रोगाम को अक्षरश: लागू करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रहने देंगी.''

देश की परिस्थितियों को असामान्य और राजनैतिक माहौल (Political Environment) को जहरीला बताने जैसे कठोर शब्दों का प्रयोग शायद ही कभी बधाई पत्रों में किया जाता हो. यही नहीं भाजपा की ओर से देश को अभूतपूर्व खतरे की बात कह कर सोनिया गांधी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यह गठबंधन आपद् धर्म का निर्वाह करने के लि बना है.

जिस तरह की धीर गंभीर भाषा का इस्तेमाल सोनिया गांधी ने किया उससे आगे बढ़कर भाषा का प्रयोग राहुल गांधी ने किया है. राहुल ने भी पहली लाइन में बधाई दी और कार्यक्रम में न आ पाने की बात कही. उसके बाद राहुल ने लिखा, '' महाराष्ट्र में सरकार बनने के पहले के घटनाक्रम ने देश के लोकतंत्र के सामने एक खतरनाक नजीर पेश की है. मुझे खुशी है कि महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (Maharashtra Vikas Aghadi) ने लोकतंत्र को नजरअंदाज करने की भाजपा की कोशिश का जवाब दिया है.'' पत्र के अंत में राहुल गांधी ने यह भी लिख दिया कि उन्हें भरोसा है कि गठबंधन सरकार एक सेक्युलर और गरीब हितैषी सरकार साबित होगी.



राहुल गांधी के पत्र में उन्हीं चुनौतियों को और दृढ़ता से बताया गया जिनका जिक्र सोनिया गांधी ने किया था. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की परंपरा और देश के संविधान की भावना के अनुसार सेक्युलर (Secular) शब्द भी जोड़ दिया.

इन दोनों पत्रों में बधाई से ज्यादा यह दिखता है कि दोनों नेता मुख्यमंत्री को उनका कर्तव्य याद दिला रहे हैं और शायद उन्हें उनके कार्यक्षेत्र का दायरा भी बता रहे हैं.
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सोनिया गांधी जहां उद्धव ठाकरे को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (Common Minimum Programme) से बाहर न जाने की नसीहत देती दिख रही हैं, वहीं राहुल गांधी उन्हें सांप्रदायिकता से बचने की सलाह देते दिख रहे हैं. इन दोनों पत्रों इन संदेशों को इसलिए नजरंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी ठाकरे को बधाई दी है, लेकिन उनके पत्र की भाषा विशुद्ध बधाई पत्र की है, जिसमें आने वाली चुनौतियों की चर्चा न करने की परंपरा को कायम रखा गया है. मनमोहन के पत्र में देश की विकट स्थितियों की भी चर्चा नहीं की गई है. जाहिर सोनिया और राहुल ने इस बधाई पत्र के माध्यम से न सिर्फ ठाकरे को आगाह किया है बल्कि भविष्य में गठबंधन में उठने वाले किसी विवाद के लिए एक कसौटी भी तैयार कर दी है.

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First published: November 28, 2019, 6:54 PM IST
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