सोनिया गांधी कैंप VS टीम राहुल : क्या है पर्दे के पीछे की पूरी कहानी?

सोनिया गांधी कैंप VS टीम राहुल : क्या है पर्दे के पीछे की पूरी कहानी?
राहुल गांधी और सोनिया गांधी की (फ़ाइल फोटो)

कांग्रेस (Congress) एक ओर जहां बाहर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी से लड़ रही है वहीं अंदर ही अंदर उसके अपने संघर्ष हैं. एक विचार लेकिन दो धाराओं के बीच कांग्रेस का भविष्य लिखने की कोशिश हो रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2020, 11:46 AM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) एक ओर सत्ता के लिए संघर्ष कर रही है और दूसरी ओर खुद और अपने भविष्य से लड़ रही है. गांधी परिवार के खिलाफ जो बड़े आरोप लगते हैं उसमें एक यह है कि वह  तीन घेरों से घिरे हुए हैं. माना जाता है कि गांधी परिवार दोस्त, सहयोगियों और करीबियों के घेरे से घिरा हुआ है. ये तीनों घेरे हमेशा के लिए बने हुए हैं. बस कुछ सालों बाद इनमें कुछ नई एंट्री होती हैं तो कुछ बाहर निकल जाते हैं. ये इनर सर्किल सोलर सिस्टम की तरह है. ये सदस्य निर्णय लेने में कितना आगे रहते हैं यह गांधियों से उनकी निकटता पर निर्भर करता है. क्योंकि उनका राजनीतिक करियर उस समय के पार्टी के चमकते सितारे की परिक्रमा से ही तय होगा. लेकिन अब कांग्रेस के पास दो चमकते सितारे हैं. एक सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) और दूसरे राहुल गांधी (Rahul Gandhi). इनमें से कई सालों से उनके साथ हैं तो कुछ दोनों के साथ हैं.

अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी ने को पुराने नेताओं पर अब भी भरोसा है. उनके साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी जैसे सम्मानित नेता हैं. इसके साथ ही अंबिका सोनी और पार्टी कोषाध्यक्ष अहमद पटेल भी साल 1998 से ही उनके साथ हैं. इसके बाद नाम आता है सुमन दूबे का जो पूर्व पीएम राजीव गांधी के करीबी दोस्त रहे हैं.

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हाल ही में कांग्रेस में फूटे लेटर बम के बाद गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और वीरप्पा मोइली सरीखे सीनियर लीडर फिलहाल इस घेरे से बाहर हैं. वहीं दूसरे घेरे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और नौ बार के लोकसभा सांसद, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सूरजेवाला शामिल हैं. वहीं तीसरे और सबसे बाहरी घेरे में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पी. चिदंबरम, जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी हैं.
राहुल गांधी की टीम में कौन?
एक ओर जहां सोनिया के आसपास दिग्गज और वरिष्ठ नेताओं का घेरा है जो खुद को पहले से साबित कर चुके हैं वहीं राहुल कैंप में ज्यादातर युवा नेता और पेशेवर में शामिल हैं जो सोचते हैं कि वे कांग्रेस में नए वर्क कल्चर के जरिए फिर से उसका भाग्योदय कर देंगे.

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सुरजेवाला और वेणुगोपाल के अलावा, राहुल गांधी के सबसे करीबी सहयोगियो में सोशल मीडिया कोआर्डिनेटर निखिल अल्वा, फॉर्मर इन्वेसटमेंट बैंकर अलंकार सवाई, 'रणनीतिक सलाहकार' सचिन राव, ऑक्सफोर्ड स्कॉलर कौशल किशोर विद्यार्थी और सैम पित्रोदा हैं. राहुल गांधी की कोर टीम के दूसरे घेरे    में असम के सांसद गौरव गोगोई,  अजय माकन, एके एटंनी, श्रीनिवास बीवी, मनिका टैगोर और सुष्मिता देव शामिल हैं. राहुल के सबसे आखिरी और तीसरे घेरे में राजीव गौड़ा औऱ सचिन पायलट शामिल हैं.

यह रिपोर्ट मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है. इसे और पढ़ने लिए यहां क्लिक करें-

Sonia Gandhi Camp vs Team Rahul Gandhi: A Behind-the-Scenes Look at Congress’ Power Play
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