कोरोना पर सोनिया गांधी ने बुलाई विपक्ष की बड़ी बैठक; मायावती और अखिलेश नहीं होंगे शामिल

कोरोना पर सोनिया गांधी ने बुलाई विपक्ष की बड़ी बैठक; मायावती और अखिलेश नहीं होंगे शामिल
सोनिया गांधी ने विपक्ष की बड़ी बैठक बुलाई. PTI

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) विपक्षी दलों (Opposition Parties) के नेताओं की बैठक की अध्यक्षता करेंगी. करीब 17 राजनीतिक दलों ने इस बैठक में शामिल होने पर सहमति जताई है.

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नई दिल्ली. कांग्रेस (congress) की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की अगुवाई में शुक्रवार को विपक्षी दलों की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से एक बैठक होगी. इस बैठक में कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) के बीच प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों एवं आर्थिक पैकेज पर मुख्य रूप से चर्चा की जाएगी.

सपा, बसपा ने नहीं की बैठक में शामिल होने की पुष्टि
सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक की अध्यक्षता करेंगी. करीब 17 राजनीतिक दलों ने इस बैठक में शामिल होने पर सहमति जताई है. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इस बैठक में शामिल नहीं होंगी. वहीं दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से भी कोई जवाब नहीं आया है. कहा जा रहा है कि उन्हें बैठक में शामिल होने के लिए अब तक न्योता नहीं मिला है. यह बैठक शुक्रवार को तीन बजे बुलाई गई है.

विपक्ष सरकार पर लगा रही है ये आरोप



कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए गत 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लगने के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक बड़े शहरों से अपने घर जाने के लिए पैदल निकल गए हैं. कई जगहों पर हुई दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की मौत भी हो गई है. विपक्षी दलों ने सरकार पर प्रवासी श्रमिकों से जुड़े इस संकट से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है.



बैठक में, कुछ प्रदेशों में श्रम कानूनों में किए गए हालिया बदलावों को लेकर भी चर्चा होगी. कुछ राज्यों में श्रम कानूनों में बदलाव करते हुए कामकाज के घंटों को बढ़ाया गया है.

सीताराम येचुरी उठा सकते हैं ये मुद्दा
सीपीआईएम के नेता सीताराम येचुरी इस दौरान विपक्षी दलों के सामने केंद्र सरकार द्वारा प्रवासियों और गरीबों के खाते में 7,500 रुपये के सीधे नकद हस्तांतरण को तुरंत लागू करने संबंधी मुद्दा उठा सकते हैं. इसके साथ ही अगले छह महीने के लिए जरूरतमंद लोगों को प्रति माह 10 किलो खाद्यान्न के वितरण के अलावा सभी प्रवासी मजदूरों को उनके मूल स्‍थान तक मुफ्त परिवहन से भेजने का मुद्दा भी उठा सकते हैं.

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