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RTI संशोधन पर सोनिया गांधी ने साधा निशाना, कहा, 'कानून को प्रभावहीन करना चाह रही सरकार'

News18Hindi
Updated: October 31, 2019, 3:48 PM IST
RTI संशोधन पर सोनिया गांधी ने साधा निशाना, कहा, 'कानून को प्रभावहीन करना चाह रही सरकार'
आरटीआई को लेकर सोनिया गांधी ने साधा सरकार पर निशाना.

कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कहा कि सरकार के खिलाफ सूचना (RTI) जारी करने वाले किसी भी सूचना अधिकारी को अब तत्काल हटाया जा सकता है या फिर पद से बर्खास्त किया जा सकता है.

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  • Last Updated: October 31, 2019, 3:48 PM IST
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नई दिल्‍ली. सूचना का अधिकार एक्‍ट (RTI) में किए गए संशोधन पर कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने केंद्र सरकार (Modi government) पर निशाना साधा है. उन्‍होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार सूचना आयुक्‍तों के अधिकारों को घटाकर आरटीआई को प्रभावहीन करना चाहती है.

'जवाबदेही से गुरेज करती है सरकार'
सोनिया गांधी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार आरटीआई की संस्था को अपने निरंकुश एजेंडा को लागू करने में एक बड़ी अड़चन के तौर पर देखती आई है. यह कानून जवाबदेही मांगता है और भाजपा सरकार किसी भी तरह के जवाब देने से साफ-साफ गुरेज करती आई है. इसीलिए भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में एक एजेंडा के तहत केंद्र व राज्यों में बड़ी संख्या में सूचना आयुक्तों के पद रिक्त पड़े रहे. यहां तक कि केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त का पद भी दस महीने तक खाली रहा. यह सब करके मोदी सरकार का लक्ष्य केवल आरटीआई कानून को प्रभावहीन एवं दंतविहीन करना था.

कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने अब आरटीआई कानून पर अपना निर्णायक प्रहार कर दिया है. इस कानून की प्रभावशीलता को और कमजोर करने के लिए सरकार ने ऐसे संशोधन पारित किए हैं, जो सूचना आयुक्तों की शक्तियों को संस्थागत तरीके से कमजोर करके उन्हें सरकार की अनुकंपा के अधीन कर देंगे. उन्‍होंने कहा कि इसका लक्ष्य साफ है- सूचना आयुक्त सरकारी अधिकारियों की तरह काम करके सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित न कर पाएं.

'सूचना आयुक्‍त का कार्यकाल घटाया'
सोनिया गांधी ने कहा कि सूचना आयुक्तों के पद का कार्यकाल केंद्र सरकार के निर्णय के अधीन करते हुए पांच से घटाकर तीन साल कर दिया गया है. 2005 के कानून के तहत उनका कार्यकाल पूरे पांच साल के लिए निर्धारित था, ताकि वो सरकार व प्रशासन के हस्तक्षेप व दबाव से पूरी तरह मुक्त रहें. लेकिन संशोधित क़ानून में पूरी तरह उनकी स्वायत्तता की बलि दे दी गई है.

उन्‍होंने कहा कि सरकार के खिलाफ सूचना जारी करने वाले किसी भी सूचना अधिकारी को अब तत्काल हटाया जा सकता है या फिर पद से बर्खास्त किया जा सकता है. इससे केंद्र व राज्य के सभी सूचना आयुक्तों का अपने कर्तव्य का निर्वहन करने तथा सरकार को जवाबदेह बनाने का उत्साह ठंडा पड़ जाएगा.
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'सरकार का रहेगा हस्‍तक्षेप'
सोनिया गांधी ने आगे कहा कि कानून में दूसरा संशोधन है- केंद्रीय सूचना आयुक्तों के वेतन, भत्तों व शर्तों के नियम, जो चुनाव आयुक्तों के बराबर थे. अब केंद्र सरकार द्वारा नए सिरे से तय किए जाएंगे. दूसरे शब्दों में कहें, तो उनके वेतन व भत्तों को मोदी सरकार की इच्छानुसार कम-ज्यादा किया जा सकेगा.

सोनिया गांधी ने सरकार पर साधा निशाना.


उन्‍होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण पदों के कार्यकाल व भत्तों को कम करने का अधिकार अपने हाथ में लेकर मोदी सरकार ने सुनिश्चित कर दिया है कि कोई भी वरिष्ठ स्वाभिमानी अधिकारी इस तरह के तनावपूर्ण व निगरानी भरे वातावरण में काम करना स्वीकार ही नहीं करेगा. इन संशोधनों के बाद कोई भी सूचना आयुक्त मोदी सरकार के हस्तक्षेप व निर्देशों से बचा नहीं रह सकेगा.

'हमने संसद में संशोधनों का विरोध किया'
सोनिया गांधी ने कहा कि हमने संसद में इन संशोधनों का विरोध किया है और आगे भी इनके खिलाफ लड़ते रहेंगे. हम अपने लोकतांत्रिक संस्थानों पर इस षड्यंत्रकारी हमले की कड़ी निंदा करते हैं और देश के कल्याण के विपरीत लिए जा रहे भाजपा सरकार के निर्णयों तथा निरंकुश एवं तानाशाही गतिविधियों का निरंतर विरोध करते रहेंगे.

यूपीए सरकार की गिनाईं उपलब्धियां
सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की सबसे गौरवशाली उपलब्धियों में से एक 2005 में ‘सूचना का अधिकार कानून’ बनाना था. इस ऐतिहासिक कानून ने सूचना आयोग जैसी संस्था को जन्म दिया, जिसने पिछले 13 सालों में प्रजातंत्र के मायने बदलकर शासन व प्रशासन में पारदर्शिता लाने तथा सरकारों की आम जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने का काम किया. यूपीए के आरटीआई कानून को विश्व के सर्वश्रेष्ठ जन सापेक्ष कानूनों में से एक माना गया.

आरटीआई कानून ने सरकार एवं नागरिकों के बीच उत्तरदायित्व व जिम्मेदारी का सीधा संबंध स्थापित किया तथा भ्रष्टाचारी आचरण पर निर्णायक प्रहार भी किया.पूरे देश के आरटीआई कार्यकर्ताओं ने भ्रष्टाचार के उन्मूलन, सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता के आकलन तथा नोटबंदी व चुनाव जैसी प्रक्रियाओं की कमियों को उजागर करने के लिए इस कानून का प्रभावी ढंग से उपयोग किया.

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First published: October 31, 2019, 3:46 PM IST
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